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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 22, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Gupt Navratri 2023: देवी मंदिरों में हुई घटस्थापना, साधकों ने किया पाठ

Gupt Navratri 2023: शहर के प्रमुख देवी मंदिरों में भी आदिशक्ति की विधिवत पूजा अर्चना की गई।

By Abrak AkroshEdited By: Abrak Akrosh
Publish Date: Sun, 22 Jan 2023 09:22:49 PM (IST)Updated Date: Sun, 22 Jan 2023 09:22:49 PM (IST)
Gupt Navratri 2023: देवी मंदिरों में हुई घटस्थापना, साधकों ने किया पाठ

Gupt Navratri 2023: बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। रविवार से गुप्त नवरात्र प्रारंभ हुआ। प्रथम दिवस मां शैलपुत्री स्वरूप की पूजा अर्चना हुई। आदिशक्ति मां महामाया मंदिर में घटस्थापना के बाद साधकों ने दुर्गासप्तशती का पाठ किया। शहर के प्रमुख देवी मंदिरों में भी आदिशक्ति की विधिवत पूजा अर्चना की गई। फल, फूल, धूप-दीप, कुमकुम, अक्षत आदि से मां शैलपुत्री की पूजा कर प्रसन्न किया गया।

सनातन धर्म में चार नवरात्र

पंडित रमेश तिवारी ने बताया कि सनातन धर्म में चार नवरात्र होते हैं। माघ और आषाढ़ में पड़ने वाली नवरात्र को गुप्त नवरात्र कहा जाता है। इसके अलावा चैत्र और शारदीय नवरात्र मनाया जाता है। इसमें भी नौ दिनों तक आदिशक्ति के अलग-अलग रूपों की पूजा अर्चना की जाती है। इसमें तांत्रिक व सात्विक दोनों प्रकार की पूजा-आराधना होती है। सिद्ध शक्तिपीठ श्री महामायादेवी मंदिर ट्रस्ट रतनपुर में माघ नवरात्र महोत्सव शुरू हुआ। माघ शुक्ल एक की सुबह सात बजे घटस्थापन कर ज्योतिकलश प्रज्ज्वलित किया गया। साधकों ने देवी षोडशोपचार पूजन, दुर्गासप्तशती आदि पाठ किया।


यहां भी मनाया उत्सव

शहर के श्री पीताम्बरा पीठ सुभाष चौक सरकंडा स्थित श्री ब्रम्हशक्ति बगलामुखी देवी मंदिर में माघ गुप्त नवरात्र उत्सव मनाया जा रहा है। माता श्री ब्रम्हशक्ति बगलामुखी देवी का विशेष पूजन, श्रृंगार, देवाधिदेव महादेव का स्र्द्राभिषेक, महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती, राजराजेश्वरी, त्रिपुर सुंदरी देवी का श्री सूक्त षोडश मंत्र द्वारा दूधधारियापूर्वक अभिषेक, बगलामुखी मंत्र जाप ब्राह्मणों के द्वारा निरंतर चलेगा। प्रथम दिवस मंत्र जाप, अनुष्ठान, प्रतिदिन रुद्राभिषेक किया गया।

साधक रखते हैं पूर्ण संयम और शुद्धता

मान्यता है कि गुप्त नवरात्र में मां दुर्गा शीघ्र प्रसन्न होती हैं। गुप्त नवरात्र को खासतौर से तंत्र-मंत्र और सिद्धि-साधना आदि के लिए बहुत ही खास माना जाता है। इस दौरान व्यक्ति ध्यान साधना करके दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति कर सकता है। इस समय की गई साधना शीघ्र फलदायी होती है। पंडित वासुदेव शर्मा ने कहा कि इस नवरात्र को करने में साधक को पूर्ण संयम और शुद्धता के साथ मां भगवती की आराधना करनी चाहिए। गुप्त नवरात्र की पूजा के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के साथ-साथ 10 महाविद्याओं की भी पूजा का विशेष महत्व है।