नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुरः मौसम में हो रहे बदलाव ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित और परेशान कर रखा है। हवा में नमी और तापमान के उतार-चढ़ाव के बीच शरीर को बीमार बनाने वाले वायरस बेहद ताकतवर हो गए हैं और एक तरह से आक्रामक वायरल अटैक कर रहे हैं।
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इससे यह अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है कि इन दिनों रोजाना की ओपीडी संख्या 2000 से ज्यादा चल रही है। इनमें से लगभग 20 से 25 प्रतिशत मरीज अकेले सर्दी, खांसी, छींक, नाक बहना, गले में खराश और तेज बदन दर्द की गंभीर समस्या लेकर डाक्टरों के पास पहुंच रहे हैं। सिम्स के मेडिसिन ओपीडी में सबसे ज्यादा भीड़ पहुंच रही है।
डाक्टरों का कहना है कि जांच में यह बात सामने आ रही है कि मरीज बुखार से पीड़ित नहीं हो रहे है।वे सिर्फ सर्दी, खांसी, नाक बहना, कमजोर, दर्द, छींक से परेशान चल रहे है। दवा असर तो कर रहा है लेकिन समस्या को पूरी तरह से खत्म होने में काफी समय लग रहा है।एक बार संक्रमित होने के बाद ठीक होने में एक से दो सप्ताह का समय लग जा रहा है। इसलिए इन दिनों सावधानी बरतने की अवश्यकता है।
हालाकि अस्पताल में इस वायरल अटैक से निपटने के लिए सभी प्रकार की दवाएं उपलब्ध है और इलाज भी किया जा रहा है। ठीक होने में लग रहा लंबा समय सामान्य तौर पर मौसमी बीमारियां तीन से पांच दिन के भीतर ठीक हो जाती हैं, लेकिन इन दिनों फैले मौसमी बीमारी के वायरस काफी शक्तिशाली और आक्रामक हैं। इस वजह से पीड़ित व्यक्ति को पूरी तरह स्वस्थ होने में सामान्य से अधिक यानी 10 दिनों से भी ज्यादा का लंबा समय लग रहा है। मरीज लंबे समय तक कमजोरी और थकान से भी जूझ रहे हैं।
यह है बचाव
सार्वजनिक और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें, क्योंकि वहां संक्रमण फैलने का खतरा सबसे ज्यादा होता है।
घर से बाहर निकलते समय हमेशा अच्छी क्वालिटी का मास्क पहनें ताकि हवा में मौजूद वायरस सीधे श्वसन नली तक न पहुंच सकें।
इम्युनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) मजबूत रखने के लिए ताजे फल, हरी सब्जियां और पौष्टिक आहार का सेवन करें।
ठंडी चीजों, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक्स और सड़क किनारे मिलने वाले खुले खाद्य पदार्थों के सेवन से पूरी तरह दूर रहें।
इस तरह से बरतें सावधानी
- समय-समय पर अपने हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोएं या सैनिटाइज़र का उपयोग करें।
- गंदे हाथों से बार-बार अपनी आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें।
- खांसते या छींकते समय अपने मुंह और नाक को रुमाल या टिशू पेपर से जरूर ढकें।
- पर्याप्त रेस्ट और कम से कम 7-8 घंटे की नींद की जरूरत होती है, इसलिए आराम में कोताही न बरतें।
वायरल तेज गति से दिखा रहा असर
सिम्स के एमएस व मेडीसिन विशेषज्ञ डा़ लखन सिंह का कहना है कि इस बार का वायरल संक्रमण पिछले संस्करणों की तुलना में अधिक संक्रामक और लंबे समय तक असर दिखाने वाला है। मौसम के इस दौर में लापरवाही भारी पड़ सकती है। लगातार सिरदर्द या सांस लेने में हल्की तकलीफ महसूस हो, सर्दी-खांसी हो, नाक बह रही हो तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या योग्य चिकित्सक से संपर्क करें। किसी भी प्रकार की एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं अपनी मर्जी से मेडिकल स्टोर से लेकर न खाएं, क्योंकि यह सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।