
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। बिलासपुर-मुंगेली-पंडरिया बायपास सड़क निर्माण के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे पर दो पक्षों के बीच चल रहे विवाद में हाई कोर्ट ने मुंगेली के सिविल न्यायालय को आठ महीने के भीतर मूल मुकदमे का निराकरण करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जमीन का मालिकाना हक, कब्जा और मुआवजा पाने का अधिकार तथ्यात्मक विवाद हैं, जिनका फैसला दोनों पक्षों के साक्ष्य दर्ज करने के बाद ही किया जा सकता है।
न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल ने मुंगेली निवासी 66 वर्षीय तिरिथ राम की याचिका का निराकरण करते हुए यह निर्देश दिया। याचिकाकर्ता ने अतिरिक्त जिला न्यायाधीश, मुंगेली के 13 अप्रैल 2022 के आदेश को चुनौती दी थी। उस आदेश में उनकी अपील खारिज करते हुए सिविल न्यायालय के 4 दिसंबर 2018 के आदेश को बरकरार रखा गया था। तिरिथ राम का दावा है कि उन्होंने खसरा नंबर 3/4 की 1.38 एकड़ जमीन पंजीकृत विक्रय पत्र से खरीदी थी और उस पर उनका कब्जा था।
इसमें से 53 डिसमिल जमीन बायपास सड़क निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई। वर्ष 2016 में राज्य शासन ने मुआवजा निर्धारित किया, लेकिन राजस्व अभिलेखों में दर्ज नाम के आधार पर यह राशि सुशीला बाई के नाम तय कर दी गई। याचिकाकर्ता का कहना है कि पंजीकृत विक्रय पत्र के आधार पर वह जमीन के मालिक हैं, इसलिए मुआवजे के भी हकदार हैं।
दूसरी ओर सुशीला बाई ने दावा किया कि उन्होंने 31 मार्च 2010 को स्नेहा केशरवानी से खसरा नंबर 1/1 की 3.53 एकड़ जमीन खरीदी थी। अधिग्रहित 53 डिसमिल हिस्सा भी इसी जमीन में शामिल है। उन्होंने मुआवजे की राशि तिरिथ राम को दिए जाने पर रोक लगाने के लिए प्रतिदावा और अस्थायी निषेधाज्ञा का आवेदन पेश किया था।
सिविल न्यायालय ने 4 दिसंबर 2018 को सुशीला बाई का अस्थायी रोक लगाने का आवेदन खारिज कर दिया था। हालांकि, आदेश में यह उल्लेख किया गया था कि वादी तिरिथ राम और प्रतिवादी सुशीला बाई तथा सहोदरा बाई जमीन पर अपने-अपने कब्जे और खेती का दावा कर रहे हैं। इसके बाद दोनों पक्षों ने अलग-अलग अपील की थी। जिला अदालत ने 13 अप्रैल 2022 को दोनों अपीलें खारिज कर दीं।
सुशीला बाई ने अपनी अपील खारिज होने के आदेश को आगे चुनौती नहीं दी। हाई कोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि विवाद का फैसला साक्ष्यों के आधार पर होना है, इसलिए लंबित मूल मुकदमे को शीघ्र निपटाने का निर्देश दिया जाए। सुशीला बाई की ओर से भी इस मांग पर सहमति जताई गई। हाई कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्ष जमीन खरीदने, मालिकाना हक और कब्जे के आधार पर मुआवजे पर अपना अधिकार जता रहे हैं।
इन सभी प्रश्नों का निर्णय साक्ष्य दर्ज करने के बाद ही संभव है। अदालत ने मुंगेली के सिविल न्यायालय को सिविल सूट क्रमांक एस-9ए/2017 की सुनवाई तेज कर आदेश की प्रति मिलने की तारीख से अधिमानतः आठ महीने के भीतर, कानून के अनुसार फैसला करने का निर्देश दिया। पक्षकारों से भी अनावश्यक स्थगन नहीं लेने और सुनवाई में सहयोग करने की अपेक्षा की गई है।
हाई कोर्ट ने याचिका का निराकरण करते हुए 11 मई 2022 को जारी अंतरिम आदेश भी समाप्त कर दिया। अदालत ने जमीन के मालिकाना हक या मुआवजे का अंतिम हकदार कौन है, इस पर कोई फैसला नहीं दिया है। यह निर्णय अब सिविल न्यायालय को साक्ष्यों के आधार पर करना होगा।