
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के मूल निवासी अभ्यर्थियों को राज्य कोटे के तहत प्रवेश देने के लिए अलग सूची जारी नहीं किए जाने के मुद्दे पर बिलासपुर निवासी दिनेश पटेल की याचिका पर हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस पार्थ प्रीतम साहू और जस्टिस सुषमा सावंत की डिवीजन बेंच ने 16 सितंबर 2026 को मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को इस मुद्दे समेत याचिका में उठाए गए अन्य बिंदुओं पर आवश्यक निर्देश लेने कहा है।
राज्य की ओर से उप महाधिवक्ता आनंद दादरिया ने काउंसिलिंग प्रक्रिया संबंधित नियमों के अनुसार संचालित किए जाने की बात कही और अलग सूची प्रकाशित नहीं होने के मुद्दे पर निर्देश लेने के लिए एक दिन का समय मांगा।
कोर्ट ने मामले को 17 सितंबर को फिर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राजीव कुमार दुबे ने कोर्ट को बताया कि अब तक की प्रक्रिया के अनुसार राज्य के मूल निवासी अभ्यर्थियों की अलग सूची प्रकाशित की जाती थी। इसी सूची के आधार पर राज्य कोटे में नीट-यूजी प्रवेश की प्रक्रिया आगे बढ़ती थी।
याचिकाकर्ता का कहना है कि इस वर्ष ऐसी कोई अलग सूची प्रकाशित नहीं की गई है। इसी को लेकर याचिका में आपत्ति उठाई गई है। मकअतराज्य ने कहा- नियमों के अनुसार काउंसिलिंग सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता आनंद दादरिया ने कहा कि नीट-यूजी की काउंसिलिंग प्रक्रिया लागू नियमों के अनुसार ही संचालित की जा सकती है। हालांकि, अलग सूची प्रकाशित नहीं होने को लेकर याचिकाकर्ता की ओर से उठाए गए विशेष आधार पर उन्होंने सरकार से आवश्यक निर्देश लेने के लिए कम समय देने का आग्रह किया।
कोर्ट ने राज्य के अधिवक्ता को केवल अलग सूची के मुद्दे पर ही नहीं, बल्कि याचिका में उठाए गए अन्य सभी बिंदुओं पर भी निर्देश प्राप्त करने को कहा। बाक्स17 सितंबर को फिर होगी सुनवाईडिवीजन बेंच ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 सितंबर 2026 की तारीख तय की है। फिलहाल हाई कोर्ट ने अलग सूची जारी करने या नीट-यूजी प्रवेश प्रक्रिया में कोई अंतिम आदेश नहीं दिया है। अगली सुनवाई में राज्य का पक्ष और उसके निर्देश सामने आने के बाद मामले पर आगे की कार्रवाई होगी।