बिलासपुर। Historic Steam Locomotive in Bilaspur: छोटी रेल लाइन में चलने वाला भाप इंजन अब दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जोन कार्यालय परिसर में आकर्षण का केंद्र बनकर नजर आएगा। विशेष साज- सज्जा के साथ इंजन को स्थापित किया गया है। इसके साथ ही महाप्रबंधक गौतम बनर्जी ने इसका अनावरण भी किया। इस मौके पर अपर महाप्रबंधक प्रमोद कुमार, मंडल रेलवे प्रबंधक आलोक सहाय के अलावा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
रेलवे की विरासत व स्वर्णिम इतिहास से लोगों को परिचय कराने और कार्यालय के आकर्षण के लिए रेलवे प्रशासन ने यह अनूठी पहल की है। वर्तमान में जोन की अधिकांश छोटी लाइन को बड़ी लाइन में परिवर्तित किया जा चुका है। कुछ जगहों पर इस पर काम तीव्र गति से चल रहा है। भविष्य में ये भी नजर नहीं आएंगे। पर रेलवे का एक प्रयास है कि इसके बारे में हर वर्ग को बताए।
भाप इंजन के इसी इतिहास से परिचय कराने व पुराने समय में चलन में इस इंजन के यादों को संजोए रखने के लिए कार्यालय परिसर में स्थापित किया गया है। इस लोकोमोटिव के चारों तरफ चबूतरे का आकार देकर आकर्षक ढंग से बेहतर प्रकाश व्यवस्था के साथ सुंदरीकरण किया गया है। इसके साथ ही पौधे लगाकर आसपास के क्षेत्र को ग्रीन क्षेत्र बनाया गया है। इसके पहले दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे मुख्यालय परिसर में भाप से चलने वाली पुरानी क्रेन को प्रतिस्थापित किया गया है।
इंजन का इतिहास एक नजर में
वर्ष - 114 साल पुराना
निर्माण - वर्ष 1907 में
निर्माणकर्ता - नार्थ ब्रिटिश कंपनी ग्लासगो इंग्लैंड
लंबाई - 9,060 मिमी
चौड़ाई - 2,290 मिमी
अंतिम सेवा वर्ष - 1956
मालगाड़ी से चावल ढुलाई के लिए करते थे उपयोग
पुराने बंगाल नागपुर रेलवे में चलने वाले इस लोकोमोटिव इंजन का उपयोग मालगाड़ी में चावल की ढुलाई के लिए किया जाता था। इसका मेंटेनेंस स्टीम लोकोशेड में होता था। वहीं से इसे वर्ष 2009 में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के भिलाई शेड लाया गया था, जहां से इसे नवीनीकरण व रंगरोगन के बाद दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे मुख्यालय भेजा गया।