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आयुष्मान योजना के तहत अस्पतालों में लगेगा बीमारियों का रेट बोर्ड, इलाज से पहले पढ़ लें स्वास्थ्य विभाग के निर्देश

बिलासपुर में आयुष्मान भारत योजना के नाम पर निजी अस्पतालों की मनमानी और मरीजों से ओवरचार्जिंग पर स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। जिला प्रभारी शि...और पढ़ें

By Atul VasingEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Wed, 16 Sep 2026 10:35:26 PM (IST)Updated Date: Wed, 16 Sep 2026 10:35:26 PM (IST)
आयुष्मान योजना के तहत अस्पतालों में लगेगा बीमारियों का रेट बोर्ड, इलाज से पहले पढ़ लें स्वास्थ्य विभाग के निर्देश

HighLights

  1. विशेषज्ञ डॉक्टर न होने पर आयुष्मान मरीजों को तुरंत रेफर करें।
  2. अस्पतालों में बीमारियों और पैकेज रेट का डिस्प्ले बोर्ड लगाना अनिवार्य।
  3. आयुष्मान योजना के जिला प्रभारी शिशिर परमार ने थमाया नोटिस।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। राज्य में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज के नाम पर निजी और बड़े अस्पतालों द्वारा मरीजों से की जा रही कथित मनमानी और ओवरचार्जिंग का मामला एक बार फिर गरमा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और स्वास्थ्य संवाददाताओं के बीच हाल ही में सामने आई बातचीत में यह बात खुलकर सामने आई है कि कई अस्पताल बिना पर्याप्त विशेषज्ञ डॉक्टरों और सुविधाओं के भी मरीजों को भर्ती कर रहे हैं, जिससे बाद में मरीजों और उनके परिजनों को भारी आर्थिक व मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

वही अब इन बातों को ध्यान में रखकर आयुष्मान भारत से इलाज करने वाले सभी अस्पतालों को नोटिस जारी कर दिया गया है। जिसमे साफ किया गया है कि यदि किसी अस्पताल में संबंधित बीमारी के विशेषज्ञ डाक्टर या सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, तो वे आयुष्मान योजना के तहत इलाज करने से सीधे मना कर दें और मरीज को उच्च चिकित्सा संस्थानों (हायर सेंटर) के लिए रेफर करें।


साथ ही यह भी सख्त निर्देश दिया गया है कि अस्पताल में एक नोटिस बोर्ड चस्पा करे। किस-किस बीमारी का आयुष्मान भारत के माध्यम से इलाज किया जाता है और उसकी पैकेज राशी कितनी है।

आयुष्मान भारत विश्व की सबसे बड़ी निश्शुल्क स्वास्थ्य योजना है। जिसके माध्यम से हितग्राहियों के बीमारियों का इलाज किया जाता है। इसके लिए ऐसे निजी अस्पतालों का चयन किया जाता है जो विभिन्न तरह की बीमारियों का इलाज इस योजना के साथ कर सके।

लेकिन यह बात देखने को मिली है कि जब कोई मरीज आयुष्मान भारत से इलाज कराने के लिए अस्पताल पहुंचता है तो वह संशय की स्थिति में रहता है, क्योंकि अस्पताल में आयुष्मान से इलाज होने वाले बीमारियों का बोर्ड ही चस्पा नहीं रहता है। ऐसे में अक्सर यह होता है कि कई बार मरीज को बताया जाता है कि इलाज नहीं होगा और मन करता है कह जाता है कि इलाज हो जाएगा।

इसी तरह विशेषज्ञ डाक्टर के नहीं होने पर भी उस बीमारी का आयुष्मान से इलाज करने हामी भरी जाती है और मरीज को दूसरे अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है। जिससे मरीज व स्वजन परेशान होते है। साथ ही अक्सर इलाज नहीं मिल पाता है।

ये है समस्याएं और प्रशासनिक लापरवाही

  • उपचार योग्य बीमारियों की सूची का प्रदर्शन न होना: नियमों के अनुसार योजना से जुड़े प्रत्येक अनुबंधित अस्पताल में आयुष्मान के तहत इलाज होने वाली बीमारियों और पैकेज की पूरी सूची का बोर्ड प्रमुखता से चस्पा होना चाहिए। लेकिन अधिकांश अस्पतालों में ऐसा कोई बोर्ड नजर नहीं आता, जिससे मरीज और उनके परिजन हमेशा संशय की स्थिति में रहते हैं।
  • पारदर्शिता का अभाव और असमंजस: बोर्ड न होने के कारण अस्पताल प्रबंधन और कर्मचारियों की मनमानी बढ़ जाती है। कई बार मरीजों को यह कहकर टरका दिया जाता है कि उनकी बीमारी का इलाज इस योजना के तहत संभव नहीं है, जबकि कुछ ही समय बाद अपनी सुविधा या अन्य कारणों से उसी इलाज के लिए हामी भी भर ली जाती है।
  • विशेषज्ञ डाक्टरों की अनुपस्थिति में जोखिम: योजना के तहत सूचीबद्ध कई निजी अस्पतालों में संबंधित बीमारियों के विशेषज्ञ डाक्टर उपलब्ध नहीं होते हैं। इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन लालच या अन्य कारणों से आयुष्मान के तहत इलाज करने की हामी भर लेते हैं।

  • अचानक रेफर करने की प्रवृत्ति: विशेषज्ञ डाक्टरों के न होने या संसाधनों की कमी के बावजूद मरीज को भर्ती कर लिया जाता है, और जब स्थिति गंभीर होती है या इलाज में अड़चन आती है, तो अंतिम समय में मरीज को दूसरे अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाता है। इस उठापटक में मरीज का कीमती समय और स्वास्थ्य दोनों दांव पर लग जाते हैं।
  • यह है निर्देश

    अस्पतालों में किन-किन बीमारियों का आयुष्मान के तहत मुफ्त इलाज होता है, इसका पूरा विवरण और डिस्प्ले बोर्ड प्रमुखता से लगाया जाए। जो बीमारियां योजना के दायरे में नहीं आती हैं, उनकी जानकारी हेल्पडेस्क पर उपलब्ध हो और प्रशिक्षित काउंसलर्स के माध्यम से मरीजों व उनके परिजनों को बेहतर ढंग से समझाया जाए।

    मरीजों पर किसी भी प्रकार का अनावश्यक आर्थिक दबाव न डाला जाए और जो सुविधाएं अस्पताल में मौजूद हैं, केवल उन्हीं का लाभ दिया जाए। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी अस्पताल में संबंधित बीमारी के इलाज की सुविधा या विशेषज्ञ डाक्टर उपलब्ध नहीं हैं, तो वे बेवजह मरीजों को अपने यहां रोककर पैसे न ऐंठें। ऐसे मामलों में मरीजों को तुरंत बड़े अस्पतालों में रेफर किया जाना चाहिए।

    यह भी पढ़ें- आयुष्मान भारत योजना के नाम पर दोहरी लूट, बिलासपुर के अस्पतालों में कार्ड से फर्जीवाड़ा, नकद वसूली जारी

    चल रही मनमर्जी

    आयुष्मान से इलाज करने के मामलों में ज्यादातर निजी अस्पतालों की मनमानी चल रही है। मन करता है तो इलाज कर देते है और मन नहीं पड़ता है तो यह कहकर मरीज को चलता कर दिया जाता है कि आयुष्मान भारत से इलाज नहीं होता है। इस तरह की मनमर्जी का शिकार रोजाना सैकड़ों मरीज हो रहे है। जिस पर भी लगाम लगाना जरुरी हो गया है।

    आयुष्मान भारत से इलाज करने वाले सभी अस्पतालों को नोटिस जारी किया गया है। सख्त निर्देश दिया गया है कि किन बीमारियों का आयुष्मान से इलाज किया जा रहा है, उसका बोर्ड लगाए, ताकि मरीज गुमराह न हो। शिशिर परमार, जिला प्रभारी, आयुष्मान भारत