• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • बिलासपुर

'दृश्यम-2' स्टाइल मर्डर केस में हाई कोर्ट से पति बरी; कोर्ट ने क्या कहा...जमीन में दफ्न राज की पढ़ें पूरी कहानी

बालोद जिले के तुंडेकुंडेल के जंगल में पत्नी की हत्या कर जलने की पति ने बताई थी कहानी, जले कंकाल को पत्नी का साबित नहीं कर सकी पुलिस, हाई कोर्ट ने कहा-...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Wed, 19 Aug 2026 12:41:45 PM (IST)Updated Date: Wed, 19 Aug 2026 12:41:45 PM (IST)
'दृश्यम-2' स्टाइल मर्डर केस में हाई कोर्ट से पति बरी; कोर्ट ने क्या कहा...जमीन में दफ्न राज की पढ़ें पूरी कहानी
प्रतीकात्मक चित्र (एआइ निर्मित)

HighLights

  1. बिना डीएनए जांच केवल लाल चूड़ियों से पहचान अमान्य।
  2. हाई कोर्ट ने कहा: संदेह कितना भी गहरा हो, प्रमाण नहीं।
  3. बालोद के चर्चित मर्डर केस में आरोपी पति मनोहर बरी।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित हत्या के मामले में अहम फैसला सुनाते हुए बालोद के मनोहर मांडवी को बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि जंगल से मिला जला हुआ महिला का कंकाल मृतका कीर्ति भुआर्या का ही था, यह अभियोजन वैज्ञानिक और विश्वसनीय साक्ष्य से साबित नहीं कर सका। कंकाल की पहचान केवल लाल चूड़ियों के आधार पर की गई, जबकि कोई डीएनए जांच नहीं कराई गई। वहीं मेडिकल विशेषज्ञ यह भी नहीं बता सके कि महिला की हत्या कर शव जलाया गया था या उसे जिंदा जलाया गया।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने 17 अगस्त 2026 को मनोहर मांडवी की आपराधिक अपील स्वीकार करते हुए प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, बालोद के 2 फरवरी 2022 के फैसले को रद कर दिया। ट्रायल कोर्ट ने उसे धारा 302 और 201 आइपीसी में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और सात साल की सजा सुनाई थी। हाई कोर्ट ने उसे संदेह का लाभ देते हुए दोनों आरोपों से बरी कर दिया और अन्य मामले में आवश्यकता नहीं होने पर तत्काल रिहा करने का आदेश दिया।


पति पर था जंगल में पत्नी की हत्या का आरोप

अभियोजन के अनुसार मनोहर ने कीर्ति से प्रेम विवाह किया था। दोनों अलग-अलग समुदाय से होने के कारण सामाजिक बहिष्कार का सामना कर रहे थे और रोजगार के लिए गांव से बाहर रहते थे। आरोप था कि वर्ष 2019 में विवाद के बाद मनोहर अपनी पत्नी को तुंडेकुंडेल के जंगल में ले गया, गमछे से गला दबाकर उसकी हत्या की और दो चट्टानों के बीच लकड़ी व घास डालकर शव जला दिया।

26 सितंबर 2019 को ग्रामीण मनोहर को कीर्ति के मायके लेकर पहुंचे और उससे पत्नी के बारे में पूछताछ की। पुलिस के अनुसार उसने पहले कीर्ति को मायके में छोड़ने की बात कही, बाद में जंगल में हत्या कर शव जलाने की बात बताई। अगले दिन वह पुलिस और ग्रामीणों को जंगल में उस स्थान तक ले गया, जहां जला हुआ मानव कंकाल मिला। मौके से चूड़ियां, जली मिट्टी और राख आदि बरामद हुई थी।

छह अहम कड़ियां टूटीं

हाई कोर्ट ने कहा कि हत्या के इस मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था। अभियोजन को परिस्थितियों की ऐसी पूरी श्रृंखला साबित करनी थी, जिससे आरोपी के अलावा किसी अन्य की संलिप्तता की संभावना समाप्त हो जाए। लेकिन कई महत्वपूर्ण कड़ियां साबित नहीं हुईं।

पहली, कंकाल की पहचान की पुष्टि नहीं हुई। पिता ने लाल चूड़ियों के आधार पर उसे बेटी का कंकाल बताया, लेकिन अन्य गवाहों ने माना कि केवल कंकाल देखकर उसकी पहचान संभव नहीं थी। लाल चूड़ियां बाजार में आम तौर पर उपलब्ध थीं।

दूसरी, कंकाल की डीएनए जांच नहीं कराई गई। कोर्ट ने कहा कि जले हुए कंकाल के मामले में वैज्ञानिक पहचान विशेष महत्व रखती है।

तीसरी, डॉक्टर ने मौत का कारण नहीं बताया। चिकित्सकीय जांच में कंकाल महिला का और उम्र करीब 25 वर्ष ± पांच वर्ष पाई गई, लेकिन यह नहीं बताया जा सका कि उसकी मौत कैसे हुई।

चौथी, गला दबाने का आरोप भी मेडिकल साक्ष्य से साबित नहीं हुआ। कथित गमछा या कोई अन्य लिगेचर बरामद नहीं हुआ।

पांचवीं, ग्रामीणों के सामने कथित स्वीकारोक्ति भी संदेह से परे नहीं थी। पूछताछ के दौरान करीब 60-70 लोग मौजूद थे। पुलिस ने उस व्यक्ति शर्मा महाराज का बयान भी दर्ज नहीं किया, जिसकी भूमिका स्वीकारोक्ति कराने में बताई गई थी।

छठी, मनोहर द्वारा कंकाल मिलने की जगह बताना मात्र उसके ज्ञान को दर्शाता है, हत्या में उसकी भागीदारी को नहीं।

'संदेह कितना भी गहरा हो, प्रमाण का स्थान नहीं ले सकता'

बेंच ने कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य वाले मामले में प्रत्येक परिस्थिति को स्वतंत्र रूप से साबित करना जरूरी है। केवल यह तथ्य कि आरोपी ने वह स्थान बताया जहां मानव कंकाल मिला, उसे हत्या का दोषी साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि "संदेह, चाहे कितना भी गंभीर हो, प्रमाण का स्थान नहीं ले सकता।" अभियोजन को यह साबित करना था कि कीर्ति की मृत्यु हुई, बरामद कंकाल उसी का था, मृत्यु हत्या के कारण हुई और आरोपी ने ही हत्या की। इन बुनियादी कड़ियों में ही गंभीर संदेह रह गया।

ट्रायल कोर्ट ने परिस्थितियों को जोड़कर दोषी माना था

हाई कोर्ट ने माना कि मनोहर का व्यवहार संदेह पैदा करता है। उसने पत्नी के बारे में अलग-अलग बातें बताईं और बाद में कंकाल मिलने की जगह भी बताई। लेकिन आपराधिक न्याय व्यवस्था में केवल संदेह के आधार पर दोषसिद्धि नहीं हो सकती। अभियोजन को अपने साक्ष्यों के बल पर मामला साबित करना होता है।

बेंच ने कहा कि "मय बी गिल्टी" और "मस्ट बी गिल्टी" के बीच का अंतर आपराधिक न्याय में बेहद महत्वपूर्ण है। इस मामले में परिस्थितियां आरोपी पर संदेह तो पैदा करती हैं, लेकिन यह साबित नहीं करतीं कि वही हत्या का दोषी है।

नतीजा: हाई कोर्ट ने मनोहर मांडवी की अपील स्वीकार कर ली। 2 फरवरी 2022 की दोषसिद्धि और सजा रद करते हुए उसे धारा 302 और 201 आइपीसी से बरी कर दिया गया। अन्य मामले में आवश्यकता नहीं होने पर उसकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया गया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट में संभावित अपील के लिए 25 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और समान राशि के दो जमानतदारों की शर्त लगाई गई।