
बिलासपुर (निप्र)। जांजगीर-चांपा कलेक्टर को पता ही नहीं है कि आपदा प्रबंधन की राशि से कलेक्टोरेट के लिए प्रिंटर किस मापदंड के आधार पर खरीदी जा रही है। कलेक्टर अभी भी यह सोच रहे हैं कि डीजीएस एंड डी मापदंड के आधार पर खरीदी हो रही है।
हकीकत ये है कि मातहत अधिकारियों ने टेंडर के साथ ही सप्लाई के लिए वर्क आर्डर जारी कर दिया है। एक और गफलत यह कि तय रेट से ऊंची कीमत देकर इसकी खरीदी की जा रही है। बहरहाल, इस गड़बड़ी की शिकायत संभागायुक्त कार्यालय पहुंच गई है। केंद्र सरकार द्वारा जिला मुख्यालय में राहत एवं आपदा प्रबंधन के नाम से फंड रखा जाता है। इस फंड से प्राकृतिक आपदा के दौरान जिन लोगों को क्षति पहुंचती है उसकी मदद की जाती है। लोगों को मदद के बजाय जिला प्रशासन जांजगीर-चांपा द्वारा आयुक्त राहत एवं आपदा प्रबंधन के आदेश का हवाला देते हुए लाखों रुपए खर्च कर कंप्यूटर, प्रिंटर व फैक्स मशीन खरीदी जा रही है। आपदा राहत कोष से 20 कंप्यूटर, 20 प्रिंटर व 10 फैक्स मशीनों की खरीदी की जा रही है। इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा अलग-अलग फर्मों से कंप्यूटर, प्रिंटर व फैक्स मशीन सप्लाई का आर्डर दिया गया है। राहत एवं आपदा कोष की राशि से किस आधार पर खरीदी की जा रही है, इसकी हकीकत जानने जयरामनगर के संजय सिंह ठाकुर ने सूचना के अधिकार के तहत आवेदन देकर जानकारी मांगी थी। लोक सूचना अधिकारी द्वारा दी गई जानकारी कम चौंकाने वाला नहीं है। आरटीआई की जानकारी में पिं्रटर के साथ ही अन्य सामान की खरीदी के लिए संबंधित फर्म को सप्लाई के लिए आर्डर देने का खुलासा किया गया है। इसमें क्रिस्टल कंप्यूटर को पांच नग लेजर प्रिंटर सप्लाई का आर्डर जारी किया गया है। एक पिं्रटर की कीमत फर्म ने 19 हजार 850 रुपए तय की है। इसी रेट के आधार पर जिला प्रशासन ने आपूर्ति के लिए आर्डर जारी कर दिया है। नेट के जरिए सर्च करने पर कंपनी ने इसी लेजर प्रिंटर का जो रेट तय किया है, उसमें और जिला प्रशासन द्वारा ली जा रही रेट में भारी अंतर है। कंपनी ने 13 हजार 347 रुपए कीमत तय की है, जबकि जिला प्रशासन द्वारा इसी प्रिंटर को 6 हजार 503 रुपए ऊंची कीमत देकर 19 हजार 850 रुपए में खरीदा जा रहा है। आरटीआई कार्यकर्ता ने इस पूरे मामले की जांच के लिए संभागायुक्त कार्यालय को पत्र लिखा है।
क्या है डीजीएस एंड डी रेट
केंद्रीय औद्योगिक विकास निगम द्वारा सामग्री खरीदी के लिए डीजीएस एंड डी रेट तय किया जाता है। इसमें टेंडर की जरूरत नहीं पड़ती है। संबंधित विभाग द्वारा शासन द्वारा तय किए गए रेट के आधार पर अच्छी गुणवत्ता की सामग्री खरीदने संबंधित कंपनी को सीधे आर्डर दे दिया जाता है। यहां मामला कुछ और है। अचरज की बात ये है कि कलेक्टर को ही इस बात की भनक नहीं लग पाई है कि आपदा प्रबंधन की राशि से की जा रही खरीदी किस मापदंड के आधार पर की जा रही है। आयुक्त आपदा एवं राहत प्रबंधन ने डीजीएस एंड डी रेट के आधार पर खरीदी का आदेश जारी किया है। यहां टेंडर के जरिए मनमाफिक तरीके से जान पहचान की कंपनी को उपकृत करने का खेल खेला जा रहा है।
''आयुक्त राहत व आपदा प्रबंधन की अनुशंसा के बाद आपदा एवं राहत प्रबंधन की राशि से 20 कंप्यूटर, 20 प्रिंटर व 10 फैक्स मशीन की खरीदी की जा रही है। खरीदी का काम डीजीएस एंड डी रेट के आधार पर हो रही है।''
पी अन्बलगन
कलेक्टर, जांजगीर-चांपा
''आपदा एवं राहत प्रबंधन की राशि से जांजगीर-चांपा जिले में कंप्यूटर व प्रिंटर खरीदी के संबंध में शिकायत की जानकारी नहीं है। शिकायत होगी तो नियमानुसार पूरे मामले की जांच कराई जाएगी।''
एसएल रात्रे
प्रभारी संभागायुक्त, बिलासपुर संभाग