
बिलासपुर (निप्र)। रिश्वत मांगने व लेने के आरोपी बर्खास्त लिपिक को 28 साल बाद हाईकोर्ट से न्याय मिला है। निचली अदालत ने उसे दोषी करार दिया था और इसके चलते उसे बर्खास्त कर दिया गया था।
यदुनंदननगर निवासी सुशीलधर दीवान ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया कि वह अंबिकापुर के पंचायत व समाज कल्याण विभाग के उपसंचालक कार्यालय में लिपिक के पद पर कार्यरत था। वर्ष 1986 में एंटी करप्शन की टीम ने रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। बाद में उसे निलंबित कर दिया गया। एंटी करप्शन ब्यूरो ने कोर्ट में चालान पेश किया और ट्रायल के बाद निचली अदालत ने उसे दोषी करार दिया। लिहाजा, विभाग ने उसे बर्खास्त कर दिया। सुशीलधर दीवान ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की। इस दौरान उनके वकील ने बताया कि याचिकाकर्ता को जबरिया फंसाया गया था। इस मामले में न तो रंगीन नोट जब्त किए गए हैं और न ही कोई सबूत है। जिस वर्मा बाबू के एरियर्स भुगतान करने के एवज में रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया था, उसे पहले ही एरियर्स का भुगतान कर दिया गया था। सभी पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को दोष मुक्त कर दिया है।