बिलासपुर। Filarial Disease: अंबिकापुर में राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन अभियान पर आधारित मीडिया सहयोगियों के लिए जिला स्तरीय संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन शनिवार को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के मंथन सभाकक्ष में किया गया। मालूम हो कि लिंफेटिक फाइलेरिया से सरगुजा समेत प्रदेश के 16 जिले प्रभावित हैं।

राष्ट्रीय जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत लिंफैटिक फ़ैलेरियासिस (हाथीपांव) के नोडल अधिकारी व जिला मलेरिया अधिकारी डा.अनिल प्रसाद ने कहा कि फाइलेरिया से मौत नहीं होती, पर फाइलेरिया को समझना जरूरी है। लिंफेटिक फाइलेरिया पीड़ादायक रोग है। संक्रमित मच्छर के काटने से फैलता है। यह संक्रमण आमतौर पर बचपन में हो जाता है जो शरीर की लसिका तंत्र (लिंफैटिक सिस्टम) को क्षतिग्रस्त कर देता है।

सही समय में इसका इलाज नहीं होने पर बाद में संक्रमण बढ़ता है, जिससे शरीर के अंग असामान्य होने लगते हैं। इसके लक्षण हाथ या पांव की सूजन व हाइड्रोसिल है। उन्होंने बताया कि बीमारी फैलने में पांच से 10 साल का समय लगता है। समय रहते ध्यान नहीं देने पर बीमारी से बचाव के लिए दी जाने वाली दवा के सेवन से कीटाणु खत्म हो सकते हैं, पर सूजन की स्थिति बनी रहती है।

23 नवंबर को फाइलेरिया के जोखिम से मुक्ति दिलाने के लिए हर आंगनबाड़ी केंद्रों में दो से 65 साल के लोगों को डीईसी व अल्बेंडाजोल की खुराक दी जाएगी। दो से पांच वर्ष के बच्चों को डीईसी व अल्बेंडाजोल की एक-एक गोली, छह से 14 वर्ष के बच्चों को डीईसी की दो व अल्बेंडाजोल की एक, 15 वर्ष व उससे बड़े लोगों को डीईसी की तीन व अल्बेंडाजोल की एक गोली खिलाई जाएगी।

एक वर्ष से कम उम्र के बच्चे को दवा नहीं देना है। एक से दो वर्ष तक के बच्चे को डीईसी की गोली नहीं दी जाएगी, अल्बेंडाजोल की आधी गोली खिलाई जाएगी। इसके बाद घर-घर जाकर सर्वे करके दवा खिलाई जाएगी। इस दौरान स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को इस बात का ध्यान रखने के लिए कहा गया है कि वे दवा छोड़ने के बजाय घर के सभी सदस्यों को अपने सामने गोली खिलाएं। गर्भवती महिला, किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित लोगों व उम्रदराज को यह गोली नहीं दी जाएगी। अगर किसी महिला ने बच्चे को जन्म दिया है और अवधि सात दिन हो चुकी है तो उसे गोली देने में दिक्कत नहीं है।

डा.प्रसाद ने बताया कि फाइलेरिया ऐसा रोग है जिससे मनुष्य की कार्यक्षमता कम हो जाती है, जो राष्ट्रीय क्षति है। इसे देखते हुए दवा खिलाने के बाद संबंधित घर के आगे एक पंपलेट चस्पा किया जाएगा, जिससे यह पता चल सके कि स्वास्थ्य कार्यकर्ता संबंधित व्यक्ति के घर पहुंचा है।

सरगुजा समेत छत्तीसगढ़ के 16 जिले प्रभावित

पत्रकारों के एक सवाल पर जिला स्तरीय संवेदीकरण कार्यशाला में पहुंचे डा.जमील सरोज ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडलाइन के अनुरूप राष्ट्रीय फाइलेरिया कार्यक्रम लंबे समय से चल रहा है। समय-समय पर कार्यक्रम में बदलाव भी आया है।

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य में वर्ष 2019 की स्थिति में 16 जिले प्रभावित मिले थे, जिसमें सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, रायगढ़, जांजगीर, जशपुर, बिलासपुर, महासमुंद, दुर्ग, रायपुर, बलौदाबाजार, बालोद, धमतरी, गरियाबंद, बेमेतरा और मुंगेली शामिल हैं, इनमें रायगढ़ जिला सर्वाधिक इंफेक्टेड है।उन्होंने बताया कि सर्वे के बीच बच्चों में कीटाणु की जांच में कमी सामने आने पर जिले को फाइलेरिया मुक्त माना जाता है।

राज्य में 16 प्रभावित जिलों में लिंफेडिमा के पांच हजार 829 और हाइड्रोसिल के पांच हजार 814 मामले दर्ज किए गए हैं। इसके बाद फाइलेरिया के एक्सीलरेटेड उन्मूलन के लिए प्राथमिकता के क्षेत्र तय किए गए हैं। एमडीए राउंड के सफल होने के लिए कम से कम 85 प्रतिशत लोगों को दवाइयों का सेवन कराना सुनिश्चित किया गया है। एमडीए राउंड के दौरान सामुदायिक सहभागिता से ज्यादा से ज्यादा लोगों को दवाई के सेवन के लिए प्रोत्साहित करने की सोच रखी गई है। लोगों में इस चेतना का विकास होना जरूरी है कि इस दवा के सेवन से उनका भविष्य सुरक्षित हो सकता है।

Posted By: anil.kurrey

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