
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की नई विषय योजना में अब विद्यार्थियों की रुचि, कौशल और भविष्य की तैयारी को अधिक महत्व दिया गया है। शैक्षणिक सत्र 2027-28 से दसवीं की बोर्ड परीक्षा में पांच विषय अनिवार्य होंगे, जबकि अन्य विषयों के चयन में विद्यार्थियों को विकल्प मिलेंगे। व्यावसायिक शिक्षा को अनिवार्य बनाए रखने के साथ बोर्ड ने विषय प्रतिस्थापन और विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए भी अलग व्यवस्था निर्धारित की है।
नई व्यवस्था के अनुसार, पहली भाषा, दूसरी भाषा, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान की परीक्षा सभी विद्यार्थियों को देनी होगी। इसके अतिरिक्त विद्यार्थी 57 विषयों में से एक वैकल्पिक विषय चुन सकेंगे। उन्नत गणित, उन्नत विज्ञान और व्यावसायिक शिक्षा के विकल्प भी उपलब्ध रहेंगे।
कौशल शिक्षा के लिए 22 विषय निर्धारित किए गए हैं, जिनमें सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आंकड़ा विज्ञान, स्वास्थ्य देखभाल, कृषि, बैंकिंग एवं बीमा, पर्यटन और डिजाइन संबंधी विषय शामिल हैं। कौशल विकास विषय लेने वाले विद्यार्थियों का मूल्यांकन विद्यालय स्तर पर होगा, जबकि अधिसूचित कौशल विषय चुनने वालों को बोर्ड परीक्षा देनी होगी।
निर्धारित शर्तों के तहत कौशल विषय या वैकल्पिक भाषा के अंकों के आधार पर अनुत्तीर्ण विषय को बदलने का अवसर भी मिलेगा। वर्तमान सत्र 2026-27 में नौवीं के विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम से समाज में व्यक्तियों की भूमिका विषय तथा संगणनात्मक चिंतन एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माड्यूल हटाए गए हैं। दसवीं में पर्यावरण शिक्षा भी सत्र 2027-28 से नहीं पढ़ाई जाएगी। वर्तमान में दसवीं में अध्ययनरत विद्यार्थियों पर बदलाव लागू नहीं होंगे।
नई विषय योजना में विद्यार्थियों को पारंपरिक शैक्षणिक विषयों के साथ व्यावहारिक दक्षता विकसित करने का अवसर मिलेगा। कृषि, स्वास्थ्य देखभाल, पर्यटन, बैंकिंग, सूचना प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे विषय आगे की पढ़ाई तथा रोजगार की संभावनाओं से जुड़ते हैं। कौशल विषय की बोर्ड परीक्षा में सफल विद्यार्थियों को अंकतालिका में अंक और श्रेणी के साथ राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचे का प्रमाणपत्र भी मिलेगा।
यदि विद्यार्थी गणित, विज्ञान या सामाजिक विज्ञान में निर्धारित 33 प्रतिशत अंक हासिल नहीं कर पाता, लेकिन चुने गए कौशल विषय में सफल रहता है, तो नियमानुसार उस विषय के स्थान पर कौशल विषय के परिणाम पर विचार किया जा सकेगा। भाषा के मामले में भी निर्धारित शर्तों के तहत वैकल्पिक भाषा से प्रतिस्थापन संभव होगा। हालांकि, कौशल विकास विषय चुनने वालों को यह सुविधा नहीं मिलेगी।
विशेष जरूरत वाले विद्यार्थियों को एक अनिवार्य भाषा की बोर्ड परीक्षा देनी होगी। शेष चार विषयों के चयन में गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, संगीत, चित्रकला, गृह विज्ञान, कंप्यूटर अनुप्रयोग और कौशल विषयों जैसे विकल्प उपलब्ध रहेंगे। वे अधिकतम दो कौशल विषय चुन सकेंगे। हालांकि, सूचना प्रौद्योगिकी, कंप्यूटर अनुप्रयोग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता तीनों विषय एक साथ लेने की अनुमति नहीं होगी।
विषय चयन में लचीलापन समावेशी शिक्षा सीबीएसई की नई विषय योजना विद्यार्थियों को अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार पढ़ाई की दिशा तय करने में मदद कर सकती है। पांच अनिवार्य विषयों के साथ कौशल आधारित विकल्प मिलने से व्यावहारिक शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। इससे विद्यार्थियों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप दक्षता विकसित करने का अवसर मिलेगा। विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए विषय चयन में लचीलापन समावेशी शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। रमन मिश्रा, प्रभारी प्राचार्य, कृष्णा पब्लिक स्कूल