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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, पुलिस आरक्षक प्रमोशन पर लगी रोक

जस्टिस पीपी साहू की सिंगल बेंच का अंतरिम आदेश; कोर्ट ने कहा- प्रक्रिया जारी रखें, लेकिन अंतिम सूची जारी करने पर रहेगी पाबंदी

By Manoj Kumar TiwariEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Wed, 20 May 2026 03:31:07 PM (IST)Updated Date: Wed, 20 May 2026 03:31:07 PM (IST)
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, पुलिस आरक्षक प्रमोशन पर लगी रोक

HighLights

  1. छत्तीसगढ़ में पुलिस प्रमोशन पर हाई कोर्ट का बड़ा झटका
  2. 1 जून को जारी होने वाली थी फाइनल लिस्ट
  3. नियम 2007 को ताक पर रख चल रही थी पदोन्नति?

नई दुनिया प्रतिनिधि बिलासपुर l छत्तीसगढ़ में पुलिस आरक्षकों के प्रधान आरक्षक पद पर होने वाले प्रमोशन को लेकर बिलासपुर हाई कोर्ट ने एक बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट के जस्टिस पीपी साहू की सिंगल बेंच ने इस पदोन्नति प्रक्रिया के तहत अंतिम आदेश जारी करने पर रोक लगा दी है।

अदालत ने अपने अंतरिम आदेश में स्पष्ट किया है कि विभागीय पदोन्नति समिति अपनी मूल्यांकन प्रक्रिया को जारी रख सकती है, लेकिन याचिका की अगली सुनवाई और कोर्ट की अनुमति के बिना किसी भी आरक्षक का अंतिम प्रमोशन ऑर्डर जारी नहीं किया जाएगा। कोरबा जिले समेत विभिन्न थानों में पदस्थ लव कुमार पात्रे, भूपेंद्र कुमार पटेल, विक्रम सिंह शांडिल्य समेत कुल 73 आरक्षकों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने यह निर्देश दिया है।


इसलिए उठा विवाद: गृह सचिव और डीजीपी बनाए गए पक्षकार

याचिकाकर्ताओं ने राज्य शासन, गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक, आईजी बिलासपुर रेंज और एसपी कोरबा समेत अन्य संबंधित अधिकारियों को मामले में पक्षकार बनाया है। आरक्षकों का आरोप है कि वर्तमान में चल रही पदोन्नति प्रक्रिया में तय नियमों और शर्तों को ताक पर रख दिया गया है। यदि हाई कोर्ट इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करता, तो नियमों के विपरीत आगामी 1 जून 2026 को फाइनल फिट लिस्ट जारी कर दी जाती, जिससे सालों से एक ही जिले में पूरी निष्ठा से काम कर रहे जवानों का हक मारा जाता।

सरकार का तर्क: दूसरी ओर, राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए कोर्ट को बताया गया कि पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी स्पष्टीकरण पत्र को इस याचिका में सीधे चुनौती नहीं दी गई है। साथ ही सरकार ने यह भी दावा किया कि वर्तमान में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, याचिका दायर करने वाले कई आरक्षकों के नाम भी फिट लिस्ट में शामिल हो सकते हैं।

नियम 2007 का उल्लंघन: खुद की मर्जी से ट्रांसफर लेने वालों को फायदा देने का आरोप

याचिकाकर्ताओं ने अदालत के सामने 'छत्तीसगढ़ पुलिस एग्जीक्यूटिव फोर्स कांस्टेबल भर्ती, पदोन्नति, सेवा शर्त नियम 2007' में किए गए संशोधनों का हवाला दिया।

क्या है नियम: नियमानुसार, यदि कोई भी पुलिस कर्मचारी अपनी मर्जी से एक जिले से दूसरे जिले में ट्रांसफर लेता है, तो नए जिले की वरिष्ठता सूची में उसका नाम सबसे नीचे दर्ज किया जाना चाहिए।

यह है आपत्ति: आरक्षकों का आरोप है कि पुलिस मुख्यालय द्वारा शुरू की गई इस प्रमोशन प्रक्रिया में उन कर्मचारियों को भी उनकी शुरुआती नियुक्ति तिथि के आधार पर सीनियर मानकर प्रमोशन देने की तैयारी की जा रही है, जिन्होंने खुद अपनी मर्जी से जिला बदला था। हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माना कि यह मामला प्रथम दृष्टया सेवा नियमों के उल्लंघन से जुड़ा हुआ है।