
बिलासपुर (निप्र)। बिल्हा विकासखंड के ग्राम चोरहादेवरी निवासी पिता-पुत्री की मलेरिया से शहर के निजी अस्पताल में मौत हो गई। उसकी बीमार पत्नी और पुत्र को उपचार के लिए सिम्स में भर्ती कराया गया है। इस घटना से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है।
बिल्हा विकासखंड के अंतिम छोर पर ग्राम चोरहादेवरी स्थित है, जहां पर बड़ी संख्या में शिकारी जाति के लोग रहते हैं। इनमें अधिकांश खानाबदोश हैं। यहां पर स्वास्थ्य विभाग का मैदानी अमला भी नहीं पहुंच पाता है। इससे हर साल यहां पर संक्रामक बीमारी का प्रकोप बारिश के मौसम में शुरू हो जाता है। पिछले कुछ दिनों से कृष्ण कुमार शिकारी, उसकी पत्नी राधाबाई शिकारी, पुत्री संगीता (8) और पुत्र शिवम को बुखार की शिकायत थी।
स्थानीय सरकारी अस्पताल में इलाज कराने के बाद भी उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार परिजनों ने कृष्ण कुमार को किम्स और संगीता को देवकीनंदन स्कूल के पास स्थित डॉ. देवरस के निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां पीड़ित दोनों पिता-पुत्री की मौत हो गई। इसकी जानकारी लगने पर स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। आनन-फानन में बुखार से पीड़ित मृतक की पत्नी राधा बाई शिकारी और उसके बेटे शिवम को उपचार के लिए सिम्स भेजा गया, जहां दोनों की हालत गंभीर बनी हुई है।
किडनी और लीवर भी खराब
निजी अस्पताल से स्वास्थ्य विभाग को मिली रिपोर्ट के अनुसार संगीता के रक्त की जांच कराने पर उसे मलेरिया से पीड़ित पाया गया। इसके अलावा उसकी किडनी, लीवर भी खराब हो गई थी। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि बच्ची काफी दिनों से बीमार थी, जिसे समय पर उचित उपचार की सुविधा उपलब्ध नहीं हुई।
पीलिया की भी आशंका
मृतक कृष्ण कुमार शिकारी को मलेरिया के साथ-साथ पीलिया होने की भी आशंका स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जता रहे हैं। हालांकि अभी रिपोर्ट नहीं आने के कारण मृत्यु के कारण की पुष्टि नहीं की जा रही है। इसकी वजह है कि मलेरिया के मद्देनजर स्लाइड जांच होना जरूरी है। निजी अस्पतालों में किट से मलेरिया समेत अन्य रोगों की जांच होती है।
प्रभावित गांव में लगा शिविर
मलेरिया से दो लोगों की मौत की जानकारी लगते ही स्वास्थ्य विभाग का पूरा अमला सक्रिय हो गया। बुखार से पीड़ित 25 लोगों की स्लाइड बनाई गई है। इसके अलावा अन्य लोगों की भी स्वास्थ्य की जांच की गई है।
संक्रामक निवारण अमला नींद में
बारिश शुरू होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग का संक्रामक निवारण अमला फील्ड में नहीं जा रहा है। इसके कारण मलेरिया, डायरिया समेत अन्य संक्रामक बीमारियों का प्रकोप शुरू हो गया है। हालात यह है कि चोरहादेवरी में फैली बीमारी की जानकारी भी इस विभाग के प्रमुख को नहीं थी।
मलेरिया नियंत्रण पखवाड़ा कागजों में
इस बार भी मलेरिया के मामले में अतिसंवेदनशील गौरेला, पेंड्रा, मरवाही, कोटा आदि जगहों पर डीडीटी का छिड़काव समय पर नहीं शुरू हो सका था, जबकि इस बार सभी विकासखंड चिकित्सा अधिकारियों को मलेरिया नियंत्रण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिला मलेरिया विभाग का अमला केवल दफ्तर में समय बीता कर वापस लौट जाता है। फील्ड में जाने की केवल कागजी कार्रवाई की जाती है।
पीड़ित मां-बेटे को अपोलो रिफर करने के निर्देश
सीएमओ ने मलेरिया से पीड़ित राधा बाई शिकारी और उसके पुत्र शिवम को अपोलो में भर्ती कराने के निर्देश दिए हैं। उनका देर शाम तक सिम्स में इलाज चल रहा था। सीएमओ का कहना था कि अपोलो को इलाज के लिए कहा गया है। अगर वह राजी नहीं होता है तो अन्य कोई व्यवस्था की जाएगी।
'डॉ. देवरस के अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार बच्ची को मलेरिया की शिकायत थी। इसके अलावा उसकी किडनी और लीवर भी खराब हो गई थी।'
डॉ. अमर सिंह ठाकुर, सीएमओ, बिलासपुर
'मलेरिया प्रभावित क्षेत्र में शिविर का आयोजन किया गया है। वहां पर एक भी मरीज मलेरिया से पीड़ित नहीं पाया गया है।'
डॉ. शरद गढ़ेवाल, बीएमओ, बिल्हा