
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: कोटा क्षेत्र में मलेरिया का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है, जहां रविवार को तीन नए मरीज सामने आए हैं। नए मामले मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। औरापारा और केंदा सहित प्रभावित ग्रामीण इलाकों में पिछले 14 दिनों से लगातार स्वास्थ्य शिविर लगाकर बीमार लोगों की जांच और इलाज किया जा रहा है।
कोटा क्षेत्र के विभिन्न गांवों में सर्दी, खांसी और बुखार से पीड़ित लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। स्वास्थ्य विभाग की जांच में अब तक कुल 33 मरीजों में मलेरिया की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें से 16 एक्टिव मरीजों का फिलहाल इलाज चल रहा है। रविवार को तीन नए मरीज मिलने के बाद जिला मलेरिया अधिकारी डा. वीके वैष्णव एवं कृष्णा कुमारी के नेतृत्व में विशेष टीम ने प्रभावित क्षेत्रों का मोर्चा संभाल लिया है।
स्वास्थ्य शिविरों में आने वाले ग्रामीणों की तत्काल रक्त जांच की जा रही है। इसके साथ ही मितानिनों के माध्यम से गांव-गांव में जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। ग्रामीणों को सलाह दी जा रही है कि वे अपने घरों और आसपास के गड्ढों में ठहरे पानी को तुरंत खाली करें, परिसर में साफ-सफाई रखें और शाम के समय मच्छर भगाने के लिए धुआं करें। विभाग का पूरा ध्यान मच्छरों के लार्वा को नष्ट करने और नए मरीजों की पहचान कर समय पर इलाज मुहैया कराने पर है।
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जलभराव और गंदगी से बढ़ रहा मच्छरों का प्रकोप
बारिश के मौसम में ग्रामीण इलाकों में जगह-जगह जलजमाव होने से मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ी है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर जलभराव वाले स्थानों की जांच कर रही हैं। शिविर में बुखार की शिकायत लेकर पहुंचने वाले हर व्यक्ति का कार्ड टेस्ट कराया जा रहा है, ताकि शुरुआती दौर में ही बीमारी को पकड़ा जा सके।
दवाओं के छिड़काव और मच्छरदानी वितरण की मांग
प्रभावित गांवों के निवासियों ने मांग की है कि केवल शिविर लगाने तक सीमित न रहकर पूरे गांव में एंटी-लार्वा केमिकल और डीडीटी का छिड़काव कराया जाए। इसके साथ ही गरीब व संवेदनशील परिवारों को नि:शुल्क मच्छरदानी उपलब्ध कराई जाए, ताकि रात के समय मच्छरों के काटने से बचाव हो सके और संक्रमण का प्रसार रुक सके।