मरवाही वनमंडल का महाघोटाला: तत्कालीन रेंजर खैरवार सस्पेंड, जांच के घेरे में कई वन अधिकारी
मरवाही वनमंडल में हुए करोड़ों रुपये के गोबर खाद और कैंपा मद घोटाले में प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्रीनिवास राव वेमूला ने तत्कालीन रेंजर रमेश कुमार खैरवा...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 28 May 2026 07:33:19 AM (IST)Updated Date: Thu, 28 May 2026 07:33:19 AM (IST)
HighLights
- गोबर खाद खरीदी और कैंपा मद में करोड़ों की वित्तीय अनियमितता का मामला
- सहायक ग्रेड-2 के बाद विभाग की दूसरी बड़ी गाज, विधानसभा तक गूंज चुकी है गड़बड़ी की आवाज
- पीसीसीएफ का बड़ा एक्शन तत्कालीन रेंजर रमेश कुमार खैरवार सस्पेंड
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुरः गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के वनमंडल मरवाही में सामने आए बहुचर्चित गोबर खाद घोटाले और कैंपा कार्यों में वित्तीय अनियमितताओं के मामले में अब विभागीय कार्रवाई तेज हो गई है। सहायक ग्रेड-2 भूपेंद्र साहू के निलंबन के बाद अब विभाग ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए मरवाही के तत्कालीन रेंजर एवं वनक्षेत्रपाल रमेश कुमार खैरवार को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह निलंबन आदेश प्रधान मुख्य वन संरक्षक छत्तीसगढ़ श्रीनिवास राव वेमूला द्वारा जारी किया गया है।
आदेश के अनुसार, वर्ष 2022 में गोबर खाद खरीदी के नाम पर कथित रूप से फर्जी भुगतान, संदिग्ध दस्तावेजों के उपयोग और सरकारी राशि के दुरुपयोग से जुड़ी शिकायतें शासन स्तर पर सामने आई थीं। मामले की उच्चस्तरीय विभागीय जांच के दौरान तत्कालीन रेंजर रमेश कुमार खैरवार की गंभीर लापरवाही और कथित संलिप्तता प्रथम दृष्टया सही पाई गई। इसके बाद विभाग ने उनके खिलाफ निलंबन की यह दंडात्मक कार्रवाई की है।
रमेश कुमार खैरवार 14 अगस्त 2023 से 28 दिसंबर 2025 तक मरवाही वन परिक्षेत्र में पदस्थ रहे। इसी कार्यकाल के दौरान कैंपा कार्यों और गोबर खाद खरीदी से जुड़े कई मामलों में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ियों की शिकायतें वन विभाग के आला अधिकारियों तक पहुंची थीं। प्रारंभिक जांच में सरकारी खजाने की राशि के गलत उपयोग और रिकार्ड में गंभीर अनियमितताओं के पुख्ता संकेत मिलने के बाद कार्रवाई का दायरा बढ़ाया गया है।
कई और चेहरे हो सकते हैं बेनकाब
घोटाले की परतें अभी पूरी तरह खुलना बाकी है। जांच वर्तमान में भी जारी है और आने वाले समय में कुछ अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ भी गाज गिर सकती है। फिलहाल फर्जी दस्तावेजों के आधार पर किए गए भुगतान और वित्तीय लेनदेन की पूरी प्रक्रिया की कड़ाई से जांच की जा रही है। संबंधित दस्तावेजों, बैंक खातों और भुगतान रिकॉर्ड का गहन परीक्षण किया जा रहा है।
घोटाले में अब तक हुई कार्रवाई
इससे पहले कैंपा शाखा प्रभारी (सहायक ग्रेड-2) भूपेंद्र साहू को भी निलंबित किया जा चुका है। उन पर लगभग 14.77 लाख रुपये के अवैध लेखा समायोजन और फर्जी एलओसी तैयार करने के गंभीर आरोप लगे थे। यह महाघोटाला प्रदेश स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है और इसकी गूंज विधानसभा में भी सुनाई दे चुकी है। विपक्ष के हमलों के बाद सरकार इस मामले में पूरी तरह सख्त नजर आ रही है। लगातार दो बड़ी कार्रवाइयों के बाद वन विभाग में हड़कंप की स्थिति है। इस कार्रवाई के बाद विभागीय स्तर पर जवाबदेही और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं।