
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। नगर निगम बिलासपुर की बेशकीमती जमीनों के आवंटन को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है। पूर्व महापौर रामशरण यादव सहित निगम के तत्कालीन अधिकारियों पर करोड़ों रुपये की कथित घूस लेकर जमीन कम कीमत पर दिलाने का आरोप लगाया गया है। इसकी शिकायत सिविल लाइन थाना में दी गई है, जिसके बाद इस प्रकरण को लेकर शहर में चर्चा तेज हो गई है। मामला सामने आने के बाद आयुक्त ने तत्कालीन संपदा अधिकारी राजेश देवांगन को निलंबित कर दिया है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नगर निगम के व्यापार विहार क्षेत्र स्थित तीन अलग-अलग भूखंडों (सात हजार वर्ग फीट) को टेंडर प्रक्रिया प्रभावित कर निजी हितग्राहियों को लाभ पहुंचाया गया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि गणेश ट्रेडर्स के संचालक निखिल अग्रवाल समेत चार हितग्राहियों को लाभ पहुंचाने के लिए लगभग चार करोड़ रुपये की लेन-देन की गई।
तत्कालीन महापौर रामशरण यादव, तत्कालीन संपदा अधिकारी राजेश देवांगन और निगम के राजस्व निरीक्षक पर टेंडर प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने और सीमांकन को प्रभावित करने के आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि टेंडर फार्म की प्रक्रिया में भी अनियमितता की गई तथा आवेदन दस्तावेजों को निर्धारित प्रक्रिया से अलग तरीके से भरवाया गया।
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि कथित रूप से करोड़ों रुपये लेकर टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित किया गया और बाद में मामले को मेयर-इन-काउंसिल तथा सामान्य सभा से मंजूरी दिलाई गई। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि इस मामले को लेकर पूर्व में पुलिस अधिकारियों को लिखित शिकायत दी गई थी और शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाने की बातें भी सामने आईं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह शासकीय भूमि के आवंटन में भ्रष्टाचार और शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाने का मामला हो सकता है।
पूर्व महापौर रामशरण यादव ने व्यापार विहार की एक जमीन को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को भ्रामक, मनगढ़ंत और तथ्यहीन बताया है। उन्होंने कहा कि संबंधित जमीन की बिक्री के लिए नियमानुसार टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई थी। टेंडर जारी करने से पहले एमआइसी की स्वीकृति और निगम आयुक्त का अनुमोदन लिया गया था तथा टेंडर आयुक्त के पदनाम से जारी किया गया। निविदाओं को निगम आयुक्त और टेंडर समिति ने स्वीकृत किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि शासकीय भूमि आवंटन में अंतिम स्वीकृति शासन अथवा कलेक्टर स्तर से होती है।
रामशरण यादव ने बताया कि कलेक्टर स्तर पर टेंडर प्रक्रिया में त्रुटियां पाए जाने के बाद जांच के निर्देश दिए गए थे। जांच के बाद नगर निगम आयुक्त ने पूरी प्रक्रिया को निरस्त कर दिया। उनके अनुसार कथित 7,000 वर्गफीट जमीन किसी भी व्यक्ति को आवंटित नहीं की गई और जमीन अब भी नगर निगम की संपत्ति है। उन्होंने कहा कि निजी व्यक्ति के नाम जमीन की रजिस्ट्री और लाभ पहुंचाने के आरोप गलत हैं तथा इस मामले में पहले ही शिकायतों की जांच हो चुकी है, जिसमें भ्रष्टाचार का मामला नहीं पाया गया।
पूर्व संपदा अधिकारी ने आरटीआइ एक्टिविस्ट और जांजगीर-चांपा से भाजपा सांसद कमलेश जांगड़े के प्रतिनिधि अनुभव तिवारी पर ब्लैकमेल कर 50 लाख मांगने के आरोप लगाए हैं। पूर्व संपदा अधिकारी राजेश देवांगन ने कहा कि फर्जी शिकायत की पहले ही जांच हो चुकी है। जांच में उसे आधारहीन माना गया था। वहीं, अनुभव की शिकायत को भी पुलिस ने पहले ही खारिज कर दिया था।
इस मामले में राजेश देवांगन का एक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है, जिसमें वे कथित तौर पर लेनदेन का जिक्र करते नजर आ रहे हैं। राजेश देवांगन ने स्पष्ट किया कि इस मामले में मेरी ओर से कोई शिकायत नहीं की गई है। अनुभव तिवारी नाम के व्यक्ति ने शिकायत की है, जो मुकेश पाठक का दोस्त है और मेरे घर भी आता-जाता था।
कार्यालय अधीक्षक राजेश देवांगन द्वारा व्यापार विहार भू-आवंटन प्रकरण के संबंध में इंटरनेट मीडिया पर दिए गए बयान, विभिन्न माध्यमों में प्रसारित समाचार तथा रिश्वत जैसे गंभीर मामले से संबंधित बातचीत के वीडियो सार्वजनिक होने पर नगर पालिक निगम बिलासपुर की छवि प्रभावित हुई है। इस घटनाक्रम को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है।
इसी परिप्रेक्ष्य में निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे के निर्देश पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के प्रविधानों के तहत राजेश कुमार देवांगन, सहायक कार्यालय अधीक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान मुख्यालय आयुक्त कार्यालय (विकास भवन), नगर पालिक निगम बिलासपुर निर्धारित किया गया है।
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रिश्वत जैसे गंभीर मामले से संबंधित बातचीत का वीडियो सार्वजनिक होने का नगर निगम की छवि पर असर पड़ रहा है। इसे गंभीरता से लिया गया है। ऐसे में कार्रवाई करते हुए कार्यालय अधीक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। - प्रकाश कुमार सर्वे, आयुक्त, नगर निगम