
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। मंगला चौक से उसलापुर ओवरब्रिज तक हरियाली सुरक्षित नहीं है। कुछ लोग इनकी जान के दुश्मन बन गए हैं। अब जहरीला पाउडर डालकर हरे-भरे वृक्षों को मारने की साजिश चल रही है। ब्रिज के पास ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां एक या दो नहीं बल्कि चार वृक्षों के नीचे हिस्से में सफेद पाउडर का छिड़काव किया गया था। जब इसकी सूचना मिली तो वन विभाग में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में एक टीम जांच करने पहुंची। जांच में यह तो स्पष्ट हो गया है कि यह न तो चींटी मार पाउडर है और आटा। विभाग को पूरा यकीन है कि यह जहरीला पाउडर है, जिसे सोची समझी साजिश के तहत डाला गया है।
इस मार्ग पर हरे-भरे वृक्षों को नष्ट करने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले कटाई, गर्डनिंग के जरिए वृक्षों को नुकसान पहुंचाया जा चुका है। जिला प्रशासन व नगर निगम सख्त नहीं होने के कारण अब तक हरियाली के हत्यारे पकड़ में नहीं आए और न उन पर कार्रवाई हो सकी। प्रशासन की इसी लापरवाही के कारण नुकसान पहुंचाने का सिलसिला जारी है। अब एक और मामला सामने आ गया है, जिसमें उसलापुर ओवरब्रिज के पास चार वृक्षों पर सफेद रंग के पाउडर डाले गए थे।
हरियाली प्रेमी की इस पर नजर पड़ी तो उन्होंने मामले की जानकारी वन विभाग को दी। राहगीर ने आशंका जताई कि यह पेड़ों को सूखाने की साजिश है। यदि गंभीरता से जांच होती है तो बड़ा मामला सामने आ सकता है। हरियाली प्रेमी की इसकी सूचना जिला प्रशासन व नगर निगम को केवल इसलिए नहीं दी गई कि क्योंकि उनका अमला हर बार सांठगांठ कर आरोपितों पर कार्रवाई नहीं करता। इधर जानकारी मिलते ही बिलासपुर वन परिक्षेत्र की तीन सदस्यीय टीम सर्किल प्रभारी मुकेश साहू के नेतृत्व में मौके पर पहुंची। सूचना सही निकली।
हालांकि वन अमले को पहले तो यह लगा कि चींटी या कीड़े-मकोड़े पर नियंत्रण करने के लिए ऐसा किया गया होगा। लेकिन, जांच में यह स्पष्ट हो गया कि पाउडर न आटा है और न चींटी मार दवा। मतलब जहरीला पाउडर है, जिसके प्रभाव यह चारों वृक्ष सूख सकते हैं। विभाग इस पूरे मामले की बेहद सूक्ष्मता से जांच कर रही है। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया गया कि यह बदमाशी जिसकी, उसे किसी भी सूरत में नहीं बख्शा जाएगा। वन अधिनियम के तहत अपराध दर्ज उसे जेल भेजा जाएगा।
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लिया सौंपल, जांच में स्पष्ट होगा कौन पाउडर
जांच के लिए पहुंची वन विभाग की टीम पेड़ के नीचे हिस्से में डाले गए इस सफेद पाउडर का सैंपल लिया है। इस सैंपल को जांच के लिए भेजा जाएगा। जांच रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि कौन सा पाउडर है। यदि जहरीला व पेड़ सूखाने के लिए इस्तेमाल होने वाला निकला तो अपराध दर्ज कर खोजबीन शुरू कर दी जाएगी। प्रथम दृष्टया तो किसी की साजिश ही माना जा रहा है।
वन अमले की सतर्कता से बची वृक्षों की जान
वन अमले की तत्परता के कारण चाराें वृक्षों की जान बच गई है। दरअसल जांच के बाद वन अमले ने तत्काल श्रमिकों को बुलाया और पेड़ के नीचे से पाउडर को हटाकर फेंका गया। इसके बाद झाडू से सफाई करने के बाद पूरे हिस्से को पानी से धोया गया। विभाग का मानना है कि अब इस पाउडर का प्रभाव वृक्षों की हरियाली पर नहीं पड़ेगा।
पुराने मामलों कार्रवाई हुई न आरोपितों को पकड़ा
इस मार्ग के दोनों ओर हरियाली है। अधिकांश वृक्ष गुलमोहर के हैं। इन वृक्षों के कारण यह मार्ग हरा-भरा नजर आता है। लेकिन, जिस निजी स्वार्थ के लिए लोग वृक्षों को निशाना बना रहे हैं, उससे हरियाली पर खतरा मंडराने लगा है। यही स्थित रही तो हरियाली पूरी तरह खत्म हो जाएगी। हालांकि इसके लिए कोई और नहीं बल्कि जिला व नगर निगम प्रशासन ही जिम्मेदार है। जिन्होंने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया। बार-बार शिकायतें हुई। लेकिन, उन्होंने जांच तक नहीं कराई। पुराने कटाई मामलों के आरोपित अब भी बेखौफ घूम रहे हैं।
दुकान के सामने ढलाई में दबी है हरियाली के निशान
मंगला चौक से लेकर उसलापुर ओवरब्रिज तक सड़क के दोनों तरफ दुकानें हैं। पूर्व में तो कुछ दुकानदारों के नाम भी सामने आए थे। लेकिन, उन पर कार्रवाई नहीं हुई। मामला जैसे ही ठंडा हुआ, दुकान संचालकों ने पहले ठूंठ साफ किया। उसके बाद क्रांकीट की ढलाई कर हरियाली के नामों निशान मिटा दिए। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि दुकानों के सामने ढलाई उखाड़ी जाएगी तो आज भी कई वृक्षों के ठूंठ उभरकर सामने आ जाएंगे।