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SIR के नाम पर नया साइबर जाल: 'वोटर लिस्ट' की APK खोलते ही फोन गुलाम, FUD कोड ने एंटीवायरस को भी किया फेल - निर्वाचन आयोग ने दी चेतावनी

SIR को लेकर लोगों की उत्सुकता का फायदा उठाकर साइबर ठग WhatsApp पर फर्जी वोटर लिस्ट APK भेज रहे हैं। फाइल खोलते ही मालवेयर एक्टिव हो जाता है और फोन का ...और पढ़ें

By kranti namdevEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Thu, 08 Oct 2026 10:19:07 PM (IST)Updated Date: Thu, 08 Oct 2026 10:19:07 PM (IST)
SIR के नाम पर नया साइबर जाल: 'वोटर लिस्ट' की APK खोलते ही फोन गुलाम, FUD कोड ने एंटीवायरस को भी किया फेल - निर्वाचन आयोग ने दी चेतावनी

HighLights

  1. SIR वोटर लिस्ट के नाम पर फर्जी APK फाइल वायरल।
  2. 6.8 MB फाइल डाउनलोड करते ही मोबाइल हैक।
  3. बैंक OTP, फोटो, कॉन्टैक्ट सीधे ठगों तक पहुंचेंगे।

नईदुनिया प्रतिनिधी, बिलासपुर: एसआइआर को लेकर मचे सियासी और प्रशासनिक घमासान के बीच, साइबर ठगों ने आम जनता की गाढ़ी कमाई और निजी जिंदगी में, सेंध लगाने का यह नया खतरनाक रास्ता खोज निकाला है। वर्तमान में एसआइआर मुद्दा पूरे प्रदेश में लगातार चर्चा के केंद्र में बना हुआ है। हर कोई इससे जुड़े नए घटनाक्रम, अपनी स्थिति और प्रशासनिक सूचियों को जानने के लिए बेहद उत्सुक नजर आ रहा है। ठगों द्वारा तैयार एपीके की फाइल खोलते ही, डाटा चोरी, निजी फोटो, दस्तावेज और कान्टैक्ट लिस्ट का क्लोन तैयार हो जाता है।

एसआईआर को लेकर जनता की जिज्ञासा, जल्दबाजी और भय की नब्ज को भांपते हुए शातिर साइबर ठगों ने, आनलाइन ठगी का एक अत्यंत परिष्कृत और घातक जाल तैयार किया है। ठगों की टोली वाट्सएप ग्रुपों और निजी संदेशों के माध्यम से धड़ल्ले से एसआइआर वोटर लिस्ट एफयू 1 एपीके नाम की 6.8 एमबी आकार वाली एक संदिग्ध फाइल प्रसारित कर रही है। संदेश में दावा किया जाता है कि इसमें एसआइआर के अंतर्गत तैयार की गई अधिकृत मतदाता सूची शामिल है, जिसे देखकर नागरिक अपना नाम तुरंत सत्यापित कर सकते हैं।


सूची में अपना नाम ढूंढने की हड़बड़ाहट में जैसे ही कोई आम नागरिक इस फाइल को डाउनलोड करता है, मोबाइल के भीतर छिपा मालवेयर सक्रिय हो जाता है और डिवाइस का पूरा रिमोट एक्सेस सीधे हैकर्स के सर्वरों तक पहुंचा देता है। मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए जब नईदुनिया ने जिला निर्वाचन कार्यालय, बिलासपुर से इस संदर्भ में संपर्क साधा, तो प्रशासनिक स्तर पर भारी हड़कंप मच गया।

निर्वाचन शाखा के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग किसी भी सूरत में सोशल मीडिया या वाट्सएप चैट पर ऐसी कोई एपीके फाइल अथवा बाहरी साफ्टवेयर साझा नहीं करता है। उप निर्वाचन अधिकारी शिव बनर्जी ने नागरिकों को आगाह करते हुए कहा कि साइबर अपराधियों द्वारा फैलाए जा रहे इस झांसे से पूरी तरह सतर्क रहें। किसी भी अज्ञात स्रोत से भेजी गई फाइल को खोलना अत्यंत नुकसानदेह साबित हो सकता है।

क्या है एपीके और यह फोन में कैसे करता है काम

एपीके फाइल एंड्रायड पैकेज किट कहलाती है। यह एंड्रायड आपरेटिंग सिस्टम पर किसी भी साफ्टवेयर को सीधे डिवाइस में स्थापित करने का मूल पैकेज प्रारूप है।

आधिकारिक ऐप स्टोर किसी भी एप को कड़े सुरक्षा परीक्षणों के बाद ही मंजूरी देता है। वहीं, वाट्सएप से भेजी जाने वाली यह अनवेरिफाइड एपीके फाइल फोन में सीधे साइडलोड हो जाती है। इंस्टाल होते ही यह ऐप स्क्रीन से छिपकर बैकग्राउंड में सक्रिय रहता है। यह चुपके से फोन के कैमरे, माइक्रोफोन, गैलरी, कान्टैक्ट्स और एसएमएस बाक्स की पूरी अनुमतियां अपने नियंत्रण में ले लेता है और फोन को साइबर ठगों का गुलाम बना देता है।

फाइल के नाम में छिपा एफयूडी कोड, सुरक्षा कवच भी ध्वस्त

वायरल हो रही फाइल के नाम में दर्ज एफयूडी तकनीकी दुनिया का सबसे खतरनाक कोड है, जिसका अर्थ फुल्ली अनडिटेक्टेबल होता है। इसका सीधा मतलब यह है कि यह स्पाईवेयर फोन में मौजूद एंटीवायरस और गूगल प्ले प्रोटेक्ट जैसे सुरक्षा प्रणालियों को पूरी तरह चकमा दे देता है। यह साइलेंट मोड में काम करते हुए फोन के भीतर मौजूद बैंकिंग ऐप्स, पिन, और पासवर्ड को की-लागर तकनीक से रिकार्ड कर सीधे साइबर ठगो तक पहुंचाता रहता है।

सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव, इन नियमों को अपनाएं

अज्ञात फाइलें तुरंत हटाएं- वाट्सएप पर .एपीके लिखी किसी भी फाइल को गलती से भी टैप या डाउनलोड न करें। आधिकारिक स्रोत का ही इस्तेमाल- मतदाता सूची देखने के लिए केवल चुनाव आयोग के आधिकारिक पोर्टल या अधिकृत वोटर हेल्पलाइन एप का ही उपयोग करें।

सेटिंग्स में बदलाव करें- स्मार्टफोन की सेटिंग्स में जाकर इस्टाल अज्ञात स्रोत को हमेशा बंद डिसएबल रखें।

तुरंत हेल्पलाइन पर सूचना दें- यदि किसी ने फाइल डाउनलोड कर ली है, तो फोन को तुरंत एयरप्लेन मोड पर डालें और राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।

निर्वाचन आयोग मतदाता सूची या किसी भी तरह की शासकीय सूचना के आदान-प्रदान के लिए वाट्सएप पर कोई एपीके फाइल नहीं भेजता। सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही फाइल पूरी तरह फर्जी और साइबर ठगी का सुनियोजित जरिया है। नागरिक ऐसे किसी भी झांसे में न आएं, न इसे डाउनलोड करें और न ही किसी अन्य ग्रुप में अग्रेषित करें। शिव बनर्जी, उप जिला निर्वाचन अधिकारी बिलासपुर