
बिलासपुर (निप्र)। बिलासपुर विश्वविद्यालय नए सत्र से कॉलेजों में च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) लागू करने जा रहा है। वहीं, कॉलेजों में जरूरी सुविधा और संसाधनों का अभाव है। वे यूजीसी मापदंडों पर भी खरा नहीं उतर पाए हैं। फैकेल्टी व डिपार्टमेंट की स्थिति बेहद खराब है। ऐसे में सीबीसीएस सिस्टम लागू करना बड़ी चुनौती है।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग(यूजीसी) ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को नए सत्र से सीबीसीएस लागू करने के लिए कहा है। इस कड़ी में बिलासपुर विश्वविद्यालय ने कदम आगे बढ़ा दिया है। दूसरी ओर कॉलेजों में अब भी पर्याप्त सुविधा व संसाधनओं की भारी कमी है। कई कॉलेजों में बहुत कम पाठ्यक्रम हैं। ऐसे में सत्र 2015-16 से सीबीसीएस लागू करना बड़ी चुनौती साबित होगी। शिक्षाविदों के बीच भी इस सिस्टम को लेकर दो राय है। एक पक्ष में खड़ा है तो दूसरा पहले सुविधा व संसाधन जुटाने की बात कह रहा है। प्रदेश में भी उच्च शिक्षा का हाल बेहतर नहीं है। इसकी वजह से कई कॉलेज इस योजना में रुचि नहीं ले रहे हैं। बावजूद विश्वविद्यालय उन पर दबाव बना रहा है। संसाधन के मामले में संबद्ध 54 में 40 से अधिक शासकीय कॉलेजों की स्थिति ठीक नहीं है। वहीं, प्राइवेट कॉलेज ले देकर आगे बढ़ रहे हैं। सीबीसीएस को लेकर पिछले वर्ष तीन ऑटोनामी कॉलेज बिलासा कन्या महाविद्यालय, ई. राघवेंद्र राव विज्ञान महाविद्यालय बिलासपुर और शासकीय किरोड़ीमल महाविद्यालय रायगढ़ में सेमेस्टर सिस्टम लागू किया गया है। इसमें सफलता तो मिली है, लेकिन आशा के अनुरूप नहीं। ऐसे में अन्य कॉलेजों की स्थिति आसानी से समझा जा सकती है।
क्या है सीबीसीएस
सीबीसीएस में छात्रों को घंटे की पढ़ाई के हिसाब से क्रेडिट अंक दिए जाते हैं। कोर विषयों के साथ ही छात्रों को सलेक्टिव विषय और फाउंडेशन कोर्स के विषयों का चयन करना होता है। एक घंटे की पढ़ाई और दो घंटे के प्रेक्टिकल वर्क के लिए एक-एक क्रेडिट अंक रहता है। अंडर और पोस्ट ग्रेजुएट के लिए क्रेडिट अंक अलग-अलग निर्धारित रहते है। सीबीसीएस में छात्रों को अपने मूल विषयों के साथ कम से कम एक अन्य विषय चुनकर पढ़ने की छूट होगी। जैसे बी. कॉम का छात्र निर्धारित विषयों के साथ विशेष रूप से बीमा या कंप्यूटर अकाउंटिंग जैसे विषय भी पढ़ सकता है। यह विषय किसी दूसरे डिपार्टमेंट का हो सकता है।
कॉलेज की परेशानी
सीबीसीएस को लेकर यूजीसी का मापदंड कड़े हैं। प्रत्येक 25 से 30 छात्रों पर एक शिक्षक होना चाहिए। वहीं, वर्तमान में सौ से डेढ़ सौ छात्रों पर एक शिक्षक हैं। सरकारी कॉलेजों में फैकेल्टी की कमी के कारण इस सिस्टम को फिलहाल कॉलेज लागू करने से कतरा रहे हैं। कई शिक्षाविद मानते हैं कि यह सिस्टम केवल ऑटोनॉमस कॉलेजों में ही सफल रहा है।
मुंबई में मंथन कर्नाटक में सिस्टम फेल
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग सीबीसीएस को लेकर देशभर के कुलपतियों के साथ मंथन कर रहा है। जानकारी के मुताबिक गुरुवार से मुंबई यूनिवर्सिटी में इसे लेकर गाइडलाइन जारी करने की तैयारी है। गुरुवार को बिलासपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.जीडी शर्मा वहां पहुंचे हैं। जबकि कर्नाटक में यह सिस्टम पहले ही फेल हो चुका है।
शासन ने केंद्र से मांगी है मदद
सीबीसीएस पर उच्च शिक्षा विभाग ने यूजीसी को अपनी राय बता दी है। शिक्षामंत्री ने कहा है कि सीबीसीएस उच्च शिक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण योजना है। वहीं, वर्तमान समय में शिक्षकों की उपलब्धता, पाठ्यक्रम के अनुसार सुविधा जरूरी है। यहां तक की मूल्यांकन की प्रक्रिया बदलनी होगी। सीबीसीएस के क्रियान्वय के लिए अलग से अनुदान राशि का भी जिक्र करते हुए शिक्षण संस्थानों को विशेष राहत देने की बात कही है।
सीबीसीएस से उच्च शिक्षा में व्यापक बदलाव देखने को मिलेंगे। यह एक महत्वपूर्ण कदम है। यूजीसी की बैठक में हमने अपनी राय प्रकट कर दी है। नए सत्र से इसे हर हाल में लागू करेंगे। कॉलेजों में व्याप्त कमियां को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रो.जीडी शर्मा
कुलपति, बिलासपुर विश्वविद्यालय