बिलासपुर। Bilaspur High Court News: सेवानिवृत्त व्याख्याता शिक्षक को समयमान-वेतनमान का लाभ नहीं दिया जा रहा है। इस मामले में दायर याचिका की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता के पेंशन प्रकरण का तीन माह के भीतर एरियर्स समेत भुगतान करने का आदेश दिया है। बिलासपुर के तालापारा निवासी गीतांजली कालोनी निवासी के हफीज मोहम्मद कुरैशी रनतपुर के करैहापारा हाईस्कूल में व्याख्याता के पद पर कार्यरत थे। यहां पदस्थ रहते हुए 31 मई 2021 को उन्हें सेवानिवृत्ति दी गई।

इस बीच उनकी सेवानिवृत्ति के पहले ही उन्हें संभागीय संयुक्त संचालक द्वारा समयमान वेतनमान भुगतान किए जाने का प्रस्ताव भेजा गया था। लेकिन, उनकी सेवानिवृत्ति के बाद भी समयमान वेतनमान का निर्धारण नहीं किया गया। इसके चलते उनके पेंशन का भुगतान नहीं किया जा रहा है। इस संबंध में उन्होंने विभागीय अधिकारियों के समक्ष आवेदनपत्र प्रस्तुत किया। लेकिन, कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे परेशान होकर उन्होंने अपने अधिवक्ता अब्दुल वहाब खान के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी।

इसमें बताया गया कि शासन के प्रविधान के अनुसार शिक्षकों को तय समय सीमा का कार्यकाल पूरा होने पर समयमान वेतनमान दिया जाना है। याकिचाकर्ता शिक्षक के समयमान वेतनमान का निर्धारण नहीं होने के कारण पेंशन प्रकरण का निराकरण नहीं हो सका है। इसके चलते उन्हें पेंशन का भुगतान भी नहीं किया जा रहा है। पूर्व में हाई कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान शिक्षा विभाग के अफसरों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।

शासन का जवाब आने के बाद याचिकाकर्ता के अधिवक्ता के तर्कों को सुनने के बाद जस्टिस पीसेम कोशी की एकलपीठ ने लोक शिक्षण संचालनालय के संयुक्त संचालक व जिला शिक्षा अधिकारी को याचिकाकर्ता के समयमान वेतनमान का निर्धारण कर एरियर्स सहित तीन माह के भीतर पेंशन प्रकरण का निराकरण करने का आदेश दिया है।

Posted By: sandeep.yadav

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