
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: सीपत-मोपका मार्ग स्थित बिड़ला ओपन माइंड्स स्कूल में, आधे शैक्षणिक सत्र के बाद अचानक स्कूल का नाम बदलने की कवायद तेज हो गई है। फोन से जानकारी मिलने के बाद अभिभावकों में भारी आक्रोश है। प्रबंधन द्वारा फोन कर नाम बदले जाने की जानकारी दिए जाने के बाद पालकों ने इसे सीधे तौर पर धोखाधड़ी करार दिया है। अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि वे बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं होने देंगे।
अभिभावकों का कहना है कि सत्र के बीच में अचानक नाम बदलने का फैसला समझ से परे और नियम विरुद्ध है। उन्होंने बिड़ला ब्रांड और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठा को देखकर भारी-भरकम फीस चुकाकर अपने बच्चों का दाखिला कराया था। पालकों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर के संस्थान में बच्चों की दक्षता और शैक्षणिक स्तर अन्य स्कूलों की तुलना में बेहतर माना जाता है।
अब जब आधा सत्र बीत चुका है, तब प्रबंधन द्वारा मनमाने ढंग से नाम परिवर्तन का दबाव बनाया जा रहा है, जिससे बच्चों के भविष्य और प्रमाण पत्रों की वैधता पर गहरा संकट खड़ा हो गया है। पालकों का एक प्रतिनिधिमंडल इस मनमानी के खिलाफ एकजुट हो चुका है। अभिभावकों ने निर्णय लिया है कि सोमवार को स्कूल परिसर पहुंचकर प्रबंधन से इस विषय पर बातचीत की जाएगी। यदि प्रबंधन ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया और नाम बदलने की प्रक्रिया वापस नहीं ली, तो जिला शिक्षा अधिकारी और कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपकर मान्यता रद्द करने की मांग करेंगे।
पालकों का स्पष्ट कहना है कि उन्होंने बिड़ला समूह के नाम और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठा के आधार पर लाखों रुपये फीस देकर दाखिला कराया था। अचानक नाम बदलकर किसी स्थानीय या अज्ञात बैनर तले स्कूल चलाना पालकों के विश्वास के साथ खुला विश्वासघात है। यदि पहले सत्र में यह जानकारी दी जाती, तो पालक किसी अन्य बेहतर स्कूल का विकल्प चुनते।
सोमवार को प्रबंधन से सकारात्मक निष्कर्ष न निकलने पर अभिभावकों ने आंदोलन का कानूनी रास्ता तैयार कर लिया है। पालक सीधे कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी से मिलकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग करेंगे। पालकों का कहना है कि शिक्षा विभाग से जिस नाम पर संचालन की अनापत्ति और सीबीएसई संबद्धता ली गई थी, उसमें बीच सत्र में फेरबदल पूरी तरह अवैध है।