नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के विभिन्न शासकीय महाविद्यालयों में पदस्थ 18 सहायक प्राध्यापकों के अकादमिक ग्रेड पे और उसके बकाया भुगतान की मांग पर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को पात्रता की जांच कर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने याचिका का निस्तारण करते हुए कहा कि यदि सभी याचिकाकर्ता पूर्व में तय लोकमणि यादव एवं अन्य बनाम छत्तीसगढ़ शासन एवं अन्य मामले में समान रूप से प्रभावित कर्मचारी पाए जाते हैं तो उनकी शिकायतों पर उसी आदेश के अनुसार विचार किया जाए।
याचिकाकर्ता बिलासपुर, रायगढ़, जांजगीर-चांपा, रायपुर, बालोद, कोरिया और दुर्ग समेत प्रदेश के विभिन्न शासकीय महाविद्यालयों में पदस्थ 18 सहायक प्राध्यापक शामिल हैं। इनमें वनस्पति शास्त्र, हिंदी, प्राणी शास्त्र, भूगोल, वाणिज्य, अंग्रेजी, रसायन शास्त्र और अर्थशास्त्र जैसे विषयों के प्राध्यापक हैं। सभी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर अकादमिक ग्रेड पे और उससे संबंधित एरियर भुगतान की मांग की थी।
सुनवाई के दौरान उनके अधिवक्ता विजय के. देशमुख ने बताया कि इसी तरह का मामला लोकमणि यादव एवं अन्य और उससे जुड़े मामलों में हाई कोर्ट की समन्वय पीठ के समक्ष आया था। कोर्ट ने 25 जून 2024 को उसका निराकरण करते हुए पात्रता की जांच के लिए समिति गठित करने का निर्देश दिया था।
एक महीने में समिति, तीन महीने में जांच
लोकमणि यादव मामले में हाई कोर्ट ने निर्देश दिया था कि उच्च शिक्षा विभाग के सचिव आदेश की प्रति मिलने के एक महीने के भीतर समिति गठित करें। समिति को प्रत्येक याचिकाकर्ता की पात्रता की जांच करनी होगी। समिति के गठन के बाद तीन महीने के भीतर अकादमिक ग्रेड पे दिए जाने के संबंध में प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
यदि संबंधित सहायक प्राध्यापक पात्र पाए जाते हैं तो उन्हें जिस तारीख से अकादमिक ग्रेड पे के लिए पात्रता बनती है, उसी तारीख से उसका लाभ और बकाया राशि देने का निर्देश था।
याचिका में राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा संचालनालय, उच्च शिक्षा आयुक्त तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को पक्षकार बनाया गया था। सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से पैनल अधिवक्ता अनादि शर्मा और यूजीसी की ओर से अधिवक्ता जेएन नांदे उपस्थित रहे।
समान स्थिति होने पर मिलेगा लाभ
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस याचिका का निस्तारण लोकमणि यादव मामले में दिए गए आदेश की शर्तों के अनुसार किया जा रहा है। यानी केवल याचिका दायर करने से स्वतः ग्रेड पे का लाभ नहीं मिलेगा। पहले संबंधित प्राध्यापकों की पात्रता और यह तथ्य जांचा जाएगा कि वे पूर्व मामले के याचिकाकर्ताओं के समान स्थिति में हैं या नहीं। पात्र पाए जाने पर उनके अकादमिक ग्रेड पे और संबंधित बकाया पर नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा।