
बिलासपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि: राज्य में अपनी तीन प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलनरत छत्तीसगढ़ राजस्व पटवारी संघ ने शासन-प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ का स्पष्ट कहना है कि वे लंबे समय से अपनी वाजिब मांगों के समाधान का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब लड़ाई आर-पार की होगी। इसी कड़ी में संघ के प्रतिनिधियों ने बिलासपुर कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्याओं के शीघ्र निराकरण की गुहार लगाई है।
संघ का आरोप है कि ऐप में तकनीकी एवं मैदानी (फील्ड) स्तर पर गंभीर व्यावहारिक कठिनाइयां आ रही हैं। इसी वजह से पटवारी इस ऐप का पूरी तरह बहिष्कार कर रहे हैं। संघ के नेताओं ने बताया कि वर्ष 2017 के बाद नियुक्त कर्मचारियों और 2003 के वरिष्ठ पटवारियों के वेतन में भारी विषमता है।
विडंबना यह है कि नए पटवारियों को अधिक और वरिष्ठ पटवारियों को कम वेतन मिल रहा है। इसे तत्काल दुरुस्त करने की मांग की गई है। पटवारियों का कहना है कि राजस्व विभाग में 30 से 35 वर्षों की सेवा देने के बाद भी कर्मचारी पटवारी पद से ही सेवानिवृत्त हो जाते हैं। संघ ने राजस्व निरीक्षक पद पर समय पर पदोन्नति दिए जाने की मांग की है। इससे शासन पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार भी नहीं पड़ेगा।
राजस्व पटवारी संघ के प्रदेश संयोजक बृजेश सिंह राजपूत ने कहा कि पदोन्नति व विसंगति दूर करना कर्मचारियों का अधिकार है। अन्य विभागों में पदोन्नति का प्रावधान है, लेकिन राजस्व विभाग में पटवारियों को इससे वंचित रखा गया है। जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, उनका आंदोलन निरंतर जारी रहेगा।