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MP-CG की सहमति के बाद भी नहीं मिला एरियर, सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, 17 दिसंबर को प्रदेशव्यापी आंदोलन

बिलासपुर में भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ की प्रांतीय कार्यसमिति की बैठक में 2 प्रतिशत महंगाई राहत (डीआर) और लंबित एरियर का भुगतान न होने पर...और पढ़ें

By kranti namdevEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Sun, 20 Sep 2026 04:03:50 PM (IST)Updated Date: Sun, 20 Sep 2026 04:03:50 PM (IST)
MP-CG की सहमति के बाद भी नहीं मिला एरियर, सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, 17 दिसंबर को प्रदेशव्यापी आंदोलन

HighLights

  1. पेंशनरों को 2% महंगाई राहत का भुगतान न होने से आक्रोश।
  2. एमपी-छत्तीसगढ़ के बीच सहमति के बाद भी अटका एरियर।
  3. 17 दिसंबर को राष्ट्रीय पेंशनर दिवस पर आंदोलन की चेतावनी।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुरः सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक जीवन और समय पर वित्तीय स्वत्वों की उम्मीद लगाए बैठे प्रदेश के पेंशनरों की चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच सहमति की पुरानी कानूनी पेचीदगियां हटने के बाद भी दो प्रतिशत महंगाई राहत (डीआर) का भुगतान अब तक नहीं हो सका है।

इसी मुद्दे को लेकर रविवार को भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ की प्रांतीय कार्यसमिति की बैठक में गहरा असंतोष नजर आया। शासन स्तर पर मुख्य सचिव से हुई वार्ता के बाद भी वित्तीय विसंगतियों का ठोस समाधान न निकलने से पेंशनरों में नाराजगी है।


बैठक में वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि उम्र के इस पड़ाव पर बुनियादी अधिकारों और लंबित एरियर के लिए बार-बार ज्ञापन व प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़े, यह व्यवस्था की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है। प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र नामदेव ने बताया कि 11 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया जारी है, लेकिन जमीनी स्तर पर वित्तीय लाभ पेंशनरों के खातों तक नहीं पहुंचे हैं।

कार्यक्रम में पहुंचे छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डा. विनय पाठक ने भी पेंशनरों की इस लड़ाई को जायज ठहराया। उन्होंने रेखांकित किया कि जीवन भर सेवा देने वाले कर्मचारियों को अपने ही हक के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, जबकि सेवानिवृत्ति के बाद उनके अनुभव का लाभ समाज को मिलना चाहिए। संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि शासन स्तर पर जल्द निर्णय नहीं हुआ, तो आगामी 17 दिसंबर को राष्ट्रीय पेंशनर दिवस पर आंदोलन तेज किया जाएगा।

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