
बिलासपुर (निप्र)। हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ बार कौंसिल के चुनाव में नियम का पालन नहीं करने के खिलाफ पेश याचिका पर 7 माह बाद निर्णय पारित किया है। कोर्ट ने बीसीआई को तीन सप्ताह में नई कमेटी गठित करने तथा 5 माह के अंदर चुनाव कराने का आदेश दिया है।
छत्तीसगढ़ राज्य विधिज्ञ परिषद का चुनाव कार्यक्रम घोषित कर मतदाता सूची का प्रकाशन, नामांकन पत्र दाखिल करने समेत मतदान तिथि 5 सितंबर तय की गई थी। चुनाव प्रक्रिया प्रारंभ होने के बाद अरशद खान ने अधिवक्ता वीजी तामस्कर व अधिवक्ता अशाक तिवारी राज्य विधिज्ञ परिषद के पूर्व सदस्य अशोक तिवारी ने अधिवक्ता संदीप दुबे के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका लगाते हुए कहा था कि परिषद का कार्यकाल समाप्त होने के बाद 6 माह के लिए आगे बढ़ाया गया। बढ़ा हुआ कार्यकाल मई 2013 में पूरा हो गया। कार्यकाल पूरा होने के बाद अधिसूचना जारी की गई। अधिसूचना का राज्य शासन के गजट में भी प्रकाशन नहीं हुआ है। परिषद का कार्यकाल पूरा होने के बाद चुनाव कराने बार कौंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) द्वारा स्पेशल कमेटी का गठन किया जाना है। स्पेशल कमेटी के महाधिवक्ता चेयरमैन होते हैं, चेयरमैन को चुनाव कराना है। वर्तमान चुनाव परिषद के उप सचिव द्वारा कराया जा रहा है। पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने बार कौंसिल ऑफ इंडिया को हमदस्त नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। बीसीआई की ओर से अधिवक्ता ने जवाब प्रस्तुत करते हुए कहा था कि चुनाव में प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है। उन्होंने बीसीआई से मिले निर्देश के अनुसार चुनाव रद्द कर जल्द से जल्द नए चुनाव कराने आदेश पारित किए जाने की बात कही थी। कोर्ट ने राज्य विधिज्ञ परिषद से पूछा कि चुनाव के लिए गठित स्पेशल कमेटी ने क्या काम किया है। इस पर परिषद के अधिवक्ता ने कहा कि अभी तक कमेटी द्वारा एक भी बैठक नहीं बुलाई गई है और कोई काम नहीं किया गया है। मामले में परिषद के अधिवक्ता ने कोई भी अभिमत देने से इनकार कर दिया। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने प्रकरण को निर्णय के लिए सुरक्षित रख लिया था। पूर्व में याचिका पर जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर के कोर्ट में सुनवाई हुई थी। रोस्टर बदलने के बाद गुरुवार को मामले की सुनवाई जस्टिस एनके अग्रवाल के कोर्ट में हुई। सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने पाया कि 10 जुलाई 2013 को अधिसूचना जारी हुई और इसी दिन स्पेशल कमेटी का गठन भी किया गया। स्पेशल कमेटी की बैठक कागज में हुई। इसके अलावा क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर परिषद के उप सचिव द्वारा चुनाव कराया जा रहा था। कोर्ट ने उक्त चुनाव को निरस्त करते हुए बार कौंसिल ऑफ इंडिया को तीन सप्ताह के अंदर नई कमेटी बनाने या इसी कमेटी को विस्तारित करने, 75 दिन में नए मतदाताओं के नाम जोड़कर मतदाता सूची का प्रकाशन तथा 5 माह के अंदर चुनाव करने का आदेश दिया है।
हस्तक्षेप याचिका भी पेश हुई थी
चुनाव के खिलाफ याचिका पेश होने के बाद अलग से हस्तक्षेप याचिका भी पेश की गई थी। इसमें परिषद के पदाधिकारियों पर चुनाव कराए जाने तथा मतदाताओं को प्रभावित करने अधिवक्ता पात्रता परीक्षा में नए वकीलों को मॉडल आंसर पेपर दिए जाने का आरोप लगाया गया था। इस याचिका पर प्रदेशभर के अधिवक्ताओं की नजर लगी रही है। चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद 115 अधिवक्ता नामांकन पत्र दाखिल कर प्रचार कार्य में जुट गए थे।