• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • बिलासपुर

गांजे की खेती साबित करने में नाकाम रही पुलिस, 21 साल बाद छत्तीसगढ़ के ग्रामीण को मिला न्याय, हाईकोर्ट ने पलटा निचली अदालत का फैसला

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के पसान थाना क्षेत्र से जुड़े 21 साल पुराने एनडीपीएस मामले में उच्च न्यायालय ने एक अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी चत्तर सिंह गोंड ...और पढ़ें

By Kamlesh RajakEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Wed, 07 Oct 2026 04:39:18 PM (IST)Updated Date: Wed, 07 Oct 2026 04:39:18 PM (IST)
गांजे की खेती साबित करने में नाकाम रही पुलिस, 21 साल बाद छत्तीसगढ़ के ग्रामीण को मिला न्याय, हाईकोर्ट ने पलटा निचली अदालत का फैसला
Chhattisgarh High Court

HighLights

  1. कोरबा जिले में 21 साल पुराना एनडीपीएस मामला खारिज।
  2. हाईकोर्ट ने संदेह का लाभ देकर ग्रामीण को किया बरी।
  3. केवल जब्ती से खेती का अपराध नहीं माना जाएगा।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। कोरबा जिले के पसान थाना क्षेत्र में घर के पीछे 425 गांजे के पौधे मिलने के मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 21 साल पुरानी सजा रद्द कर दी है। न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास ने कहा कि अभियोजन यह साबित नहीं कर सका कि इन पौधों की खेती चत्तर सिंह गोंड, निवासी ग्राम बघिंदंड, थाना पसान, जिला कोरबा ने की थी। केवल आरोपी के घर के पीछे गांजे के पौधे मिल जाना खेती का अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए चत्तर सिंह को बरी कर दिया।

21 अगस्त 2004 को पसान पुलिस को सूचना मिली थी कि चत्तर सिंह ने अपने घर के पीछे मक्के की फसल के बीच गांजे के पौधे लगा रखे हैं। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर 425 पौधे जब्त किए। नमूने की जांच में गांजा होने की पुष्टि हुई। इसके आधार पर चत्तर सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।


अतिरिक्त सत्र एवं विशेष न्यायाधीश, कोरबा ने 28 जनवरी 2005 को स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम की धारा 20 के तहत चार साल के सश्रम कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। जुर्माना नहीं देने पर छह महीने अतिरिक्त कारावास का आदेश था। चत्तर सिंह की ओर से अधिवक्ता चेतना शर्मा ने कहा कि अभियोजन ने यह साबित नहीं किया कि जमीन या गांजे के पौधों पर आरोपी का अकेला कब्जा था। तलाशी, जब्ती और नमूना प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए।

कोर्ट ने साक्ष्यों की जांच में पाया कि कोटवार सुपेद दास ने केवल घर के पीछे गांजे के पौधे उगने की बात कही, खेती चत्तर सिंह द्वारा किए जाने की बात नहीं कही। स्वतंत्र गवाह बलदेव ने भी कहा कि उसे पता नहीं था कि पीछे की जमीन किसकी है। पुलिसकर्मी ने स्वीकार किया कि आरोपी के पिता सुखराम जीवित थे और भाइयों के बीच जमीन का बंटवारा नहीं हुआ था।

पटवारी ने भी बताया कि जिस खसरा नंबर 74/1 में पौधे मिले, उसके मालिक के रूप में सुखराम का नाम दर्ज था। विवेचक ने दावा किया कि होलसाई ने उसे चत्तर सिंह द्वारा खेती करने की जानकारी दी थी, लेकिन इस व्यक्ति का बयान दर्ज नहीं किया गया और उसे गवाह भी नहीं बनाया गया।

यह भी पढ़ें- बिलासपुर में मोबाइल टावर पर अर्धनग्न अवस्था में चढ़ी युवती, लोगों ने नीचे उतरने की अपील की, नहीं मान रही बात, पुलिस ने बुलाई SDRF

कोर्ट ने कहा- खेती साबित होना जरूरी

उच्च न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के अलख राम बनाम उत्तर प्रदेश मामले का हवाला देते हुए कहा कि गांजे के पौधे मिलना भर पर्याप्त नहीं है। अभियोजन को यह प्रमाणित करना होगा कि आरोपी ने उन्हें लगाया और उनकी खेती की। पौधे प्राकृतिक रूप से भी उग सकते हैं।

कोर्ट ने माना कि चत्तर सिंह द्वारा गांजे की खेती किए जाने का मूल तथ्य ही साबित नहीं हुआ। इसलिए 28 जनवरी 2005 की सजा रद्द करते हुए अपील स्वीकार कर ली और उसे आरोप से बरी कर दिया। वह वर्तमान में जमानत पर है और उसके जमानत बंधपत्र छह महीने तक जारी रहेंगे।