
कृष्णचंद्र मिश्रा नईदुनिया पेंड्रा। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के कोटमीकला साप्ताहिक हाट बाजार में पिछले महीने हुए बहुचर्चित ज्वेलरी व्यवसायी प्रदीप सोनी हत्याकांड और सनसनीखेज लूट का पुलिस ने 14 दिनों के भीतर राजफाश कर दिया है। पुलिस महानिरीक्षक (IG) बिलासपुर रेंज रामगोपाल गर्ग के मार्गदर्शन में काम कर रही विशेष जांच टीम ने तकनीकी खुफिया तंत्र (TechINT) और मानवीय सूचना (HumINT) के सटीक समन्वय से बिहार और झारखंड तक फैले अंतरराज्यीय आपराधिक नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया है। इस कार्रवाई में घटना को अंजाम देने वाले पेशेवर शूटरों समेत कुल 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
आपराधिक घटनाक्रम के अनुसार, 26 मई 2026 की शाम करीब 7 बजे कोटमीकला हाट बाजार के ज्वेलरी व्यापारी प्रदीप सोनी अपनी दुकान बढ़ाकर लौट रहे थे। इसी दौरान घात लगाए बैठे बाइक सवार बदमाशों ने उनका सोना-चांदी से भरा बैग लूटने का प्रयास किया। प्रदीप सोनी ने जब विरोध किया गया, तो आरोपियों ने उन पर नजदीक से गोली चला दी। गोली लगने से गंभीर रूप से घायल व्यवसायी को तत्काल पुलिस पेट्रोलिंग गाड़ी से जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद थाना पेण्ड्रा में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103, 309(6), 313, 3(5) एवं आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर तफ्तीश शुरू की गई थी।
पुलिस अधीक्षक और एएसपी अविनाश मिश्रा के नेतृत्व में गठित टीम की कस्टोडियल पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों से यह स्पष्ट हुआ कि लूट की इस साजिश का ताना-बाना स्थानीय आरोपी खुशीराम साहू (निवासी सीपत) ने बुना था। खुशीराम ने बिहार और झारखंड के अपने परिचित पेशेवर अपराधियों—मनीष मंडल उर्फ राहुल, सुजीत कुमार उर्फ राजू और संतोष कुमार दास को छत्तीसगढ़ बुलाया था। इन आरोपियों ने देवरीखुर्द में एक अन्य सहयोगी गया प्रसाद रजक के घर पर पनाह ली और कोटमी बाजार में प्रदीप सोनी की कई दिनों तक रेकी की। वारदात के दिन योजनाबद्ध तरीके से राहुल ने प्रदीप सोनी पर ट्रिगर दबाया था।
वारदात को अंजाम देने के बाद शूटर राहुल और संतोष रास्ता भटक गए थे, जिसके कारण उन्होंने बोदरापारा तिलोरा की दुर्गम पहाड़ियों में रात बिताई। अगले दिन सुबह मुख्य साजिशकर्ता खुशीराम ने उन्हें वापस बुलाया और बोदरापारा की टेकरी पर लूट के सामान की झिल्लियां-डिब्बे जलाकर साक्ष्य नष्ट किए। इसके बाद देवरीखुर्द में बैठकर बकायदा लूट के जेवरों का बंटवारा किया गया। खुशीराम ने अपने हिस्से का कुछ माल अपने दामाद श्रेयांश शुक्ला को भी छुपाने के लिए दिया था।
पुलिस की विशेष टीमों ने आरोपियों का पीछा करते हुए बांका व रजौन (बिहार) तथा गोड्डा (झारखंड) से तीन मुख्य शूटरों को धर दबोचा। पकड़े गए आरोपियों में से सुजीत कुमार पर नौ और मनीष मंडल व संतोष पर 5-5 संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कुल 40 ग्राम सोना, 4 किलो 480 ग्राम चांदी, 2 देशी कट्टा, 4 जिंदा कारतूस, वारदात में इस्तेमाल की गई 1 स्विफ्ट कार, 2 मोटरसाइकिलें और 7 मोबाइल फोन विधिवत जब्त किए हैं। सभी आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।