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छत्तीसगढ़ में दूसरी पत्नी बनी 'नौकरानी' तो कैसे मिले न्याय? पहली पत्नी के हक के लिए बदलेगा कानून

छत्तीसगढ़ में पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी करने के मामलों को साबित करने की कानूनी पेचिदगियों को दूर करने के लिए राज्य महिला आयोग कानून में संशोधन की ...और पढ़ें

By kranti namdevEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Tue, 22 Sep 2026 06:17:50 PM (IST)Updated Date: Tue, 22 Sep 2026 06:17:50 PM (IST)
छत्तीसगढ़ में दूसरी पत्नी बनी 'नौकरानी' तो कैसे मिले न्याय? पहली पत्नी के हक के लिए बदलेगा कानून
एआई जनरेट फोटो

HighLights

  1. दूसरी शादी साबित करने में आने वाली अड़चनों को दूर करने के लिए शासन को भेजा जाएगा प्रस्ताव।
  2. एफआईआर के अभाव और सबूत न मिलने के कारण पहली महिलाओं को होती है भारी परेशानी।
  3. राज्य महिला आयोग की जनसुनवाई में समझाइश के बाद कई मामलों में हुआ आपसी समझौता।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुरः पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी करने या किसी अन्य महिला को पत्नी बनाकर रखने के मामलों में पीड़ित महिलाओं को कानूनी पेचिदगियों के कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में सीधे एफआइआर दर्ज नहीं होने से पहली पत्नी को अदालत में स्वयं गवाह व दस्तावेज जुटाने पड़ते हैं। इस गंभीर विसंगति को दूर करने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग प्रदेशभर के प्रकरणों की केस स्टडी कर कानून में संशोधन की सिफारिश शासन से करेगा।

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त डा. ममता साहू ने कहा कि दूसरी शादी के मामलों में साक्ष्य जुटाना सबसे बड़ी चुनौती है। कई बार पुलिस जब संबंधित व्यक्ति के घर पहुंचती है, तो साथ रह रही दूसरी महिला खुद को पत्नी न बताकर नौकरानी बता देती है। ऐसी स्थिति में पहली पत्नी के लिए पति का दूसरा विवाह साबित करना कानूनी रूप से बेहद कठिन हो जाता है।


आयोग अब पूरे प्रदेश से ऐसे सभी मामलों का संकलन कर विधिक व व्यावहारिक अड़चनों का विस्तृत अध्ययन करेगा। इसके बाद विधि विशेषज्ञों, पुलिस, न्यायपालिका, महिला एवं बाल विकास विभाग, एनजीओ और मीडिया प्रतिनिधियों से परामर्श कर शासन को ठोस प्रस्ताव भेजा जाएगा। इसके साथ ही भारतीय न्याय संहिता की धारा 64 व 69 के तहत दर्ज मामलों की पुलिस अधिकारियों व अधिवक्ताओं के साथ समीक्षा होगी। त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए पुलिस व संबंधित विभागों के साथ प्रशिक्षण शिविर भी चलाए जा रहे हैं।

वर्जन-

दूसरी शादी को साबित करने की कानूनी पेचीदगियों के कारण पहली पत्नी को भारी मानसिक और कानूनी संघर्ष से गुजरना पड़ता है। आयोग प्रदेशभर के प्रकरणों की केस स्टडी कर रहा है, ताकि कानून में आवश्यक बदलाव के लिए सरकार को ठोस सिफारिश भेजी जा सके।

डा. ममता साहू, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग

अहंकार टूटा तो जुड़ गया आशियाना, फिर एक हुए पति-पत्नी

  • महिला आयोग की समझाइश से बिखरने की कगार पर पहुंचे दांपत्य में आई मिठास
  • 13 शिकायतों पर त्वरित संज्ञान, धर्म परिवर्तन और प्रताड़ना मामलों में निर्देश

वर्षों की कड़वाहट, तल्ख जुबानी जंग और अदालत के दरवाजे तक पहुंच चुकी रंजिश भी अंततः अपनों के स्नेह के आगे हार गई। एक-दूसरे की शक्ल न देखने की जिद पर अड़े पति-पत्नी के अहंकार की दीवार जैसे ही ढही, आंसुओं के बीच बिखरता आशियाना फिर से आबाद हो गया। मौका था राज्य महिला आयोग की जनसुनवाई का, जहां 13 मामलों की सुनवाई के बीच यह अनूठा मानवीय समाधान सबसे बड़ी उम्मीद बनकर उभरा।

जल संसाधन विभाग के प्रार्थना सभाकक्ष में आयोजित जनसुनवाई में दोनों पक्षों के चेहरे पर खिंचाव और पुरानी रंजिश साफ झलक रही थी। आयोग की अध्यक्ष डा. ममता साहू और सदस्यों ने कानूनी दांव-पेंच के बजाय दोनों को आमने-सामने बैठाकर बेहद संवेदनशील तरीके से काउंसलिंग शुरू की। पहले अलग-अलग और फिर संयुक्त चर्चा में जब दोनों के गिले-शिकवे कुरेदे गए, तो सामने आया कि रिश्ते की नींव किसी बड़े अपराध से नहीं बल्कि छोटी-छोटी गलतफहमियों और संवादहीनता से दरक रही थी।

समझाइश का दौर आगे बढ़ा तो दोनों का आक्रोश आंसुओं में बदल गया। दोनों पक्षों ने अपनी गलतियां स्वीकारते हुए आयोग के समक्ष लिखित शपथ पत्र सौंपा कि वे अतीत के तमाम मतभेद भुलाकर एक छत के नीचे सम्मानपूर्वक जीवन बिताएंगे। साथ ही भविष्य में कभी विवाद न करने का लिखित वचन दिया।

धर्म परिवर्तन समेत 12 अन्य प्रकरणों पर भी हुई सुनवाई

जनसुनवाई में धर्म परिवर्तन संबंधी विवाद में आयोग ने मामले की जांच सिविल लाइन पुलिस को सौंपते हुए अगली तारीख पर केवल आवेदिका को तलब किया। दूसरी शादी व भरण-पोषण नहीं देने के आरोप वाले शिक्षक के मामले में विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए। सुनवाई तिथि की गलतफहमी, आवेदिका की अस्वस्थता, दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा के मामलों में संबंधित पक्षों व अधिकारियों को जांच व अगली पेशी के निर्देश मिले।

कार्यस्थल पर प्रताड़ना, पैतृक संपत्ति विवाद, बुजुर्ग महिला के भरण-पोषण, स्त्रीधन वापसी और सोशल मीडिया पर चरित्र हनन की शिकायतों में जांच, कानूनी सहायता व आवश्यक कार्रवाई के आदेश दिए गए। नशाखोरी से परिवार प्रभावित होने के मामले में आयोग ने पति को चेतावनी देकर काउंसलिंग और नियमित भरण-पोषण सुनिश्चित करने को कहा।