
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय के सप्तम दीक्षांत समारोह में राज्यपाल एवं समारोह अध्यक्ष रमेन डेका ने विद्यार्थियों को जीवन की सफलता और संतुष्टि का अनूठा मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में कंटेनर नहीं, कंटेंट महत्वपूर्ण है। विश्वविद्यालय की खूबसूरत इमारत से ज्यादा वहां की पढ़ाई, शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच संबंध मायने रखते हैं।
भौतिक सुख-सुविधाओं के बजाय मन की संतुष्टि, अपनी सोच और अच्छे कर्मों को जीवन का आधार बनाने की सीख दी। समारोह में पांच शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि एवं 72 मेधावियों को स्वर्ण पदक से अलंकृत किया गया। 24,800 विद्यार्थियों की उपाधि जारी किया गया। समाज में उत्कृष्ठ योगदान देने वाले चार प्रमुख हस्तियों को सम्मानित किया गया।
विश्वविद्यालय का सप्तम दीक्षा समारोह मंगलवार को गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। समारोह की अध्यक्षता कुलाधिपति एवं राज्यपाल रमेन डेका ने की। मुख्य अतिथि उप मुख्यमंत्री अरुण साव, दीक्षा अतिथि राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यान परिषद नई दिल्ली के अध्यक्ष एवं पूर्व कुलपति प्रो. नागेश्वर राव एवं दीक्षा वक्ता हरियाणा उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो.कैलाश चंद शर्मा मंच पर मौजूद रहे।
इसके अलावा अन्य विशिष्ट अतिथियों में विधायक धरमजीत सिंह, सुशांत शुक्ता एवं महापौर पूजा विधानी उपस्थित रहीं। समारोह का शुभारंभ शोभायात्रा, वंदे मातरम राष्ट्रीय गीत और जन गण मन राष्ट्र गान से हुआ। दीप प्रज्ज्वलन और राजकीय परंपराओं के साथ हुआ। कुलपति प्रो. वीरेंद्र कुमार सारस्वत ने स्वागत भाषण में विश्वविद्यालय की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की।
समारोह में राज्यपाल ने आगे कहा कि मैटेरियल वर्ल्ड में संतुष्टि नहीं है। सुख खरीदा जा सकता है, लेकिन इनर संतुष्टि और माइंड में संतुष्टि होना जरूरी है। संतुष्टि कंटेनर में नहीं, कंटेंटमेंट में देखनी चाहिए। घर में शांति और परिवार में प्रेम है तो वही वास्तविक सुख है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की गुणवत्ता वहां की शिक्षण व्यवस्था, शिक्षकों के पढ़ाने के तरीके, शिक्षक-विद्यार्थी संबंध और विद्यार्थियों की उपलब्धियों से तय होती है।
स्कूल की बिल्डिंग खराब हो तो कोई बात नहीं, लेकिन वहां अच्छी पढ़ाई होनी चाहिए। उन्होंने प्रसिद्ध दार्शनिक रेने डेकार्ट्स के कथन 'आई थिंक, देयरफोर आई एम' का उल्लेख करते हुए कहा कि मन को नियंत्रित करना सीखें। पड़ोसी के पास क्या है, इससे तुलना न करें। 'कंपेयर एंड कापी विल नाट हेल्प इन योर लाइफ'।
अपनी सोच विकसित करें और जीवन में तीन पी-पर्सिवियरेंस, प्रैक्टिस और पेशेंस अपनाएं। टालमटोल की आदत छोड़ें, सफलता आपके हाथ में होगी। उन्होंने डिजिटल एडिक्शन को खतरनाक बताते हुए कहा कि मोबाइल की लगातार लत व्यक्ति को एल्गोरिदम और पापकार्न ब्रेन स्टेटस की ओर ले जाती है, जो अंततः डिप्रेशन का कारण बन सकती है। विद्यार्थियों को नशे और डिजिटल लत से दूर रहने की सलाह दी। समारोह लगभग सवा दो घंटे में संपन्न हुआ।
मुख्य अतिथि उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि पंडित सुंदरलाल शर्मा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी होने के साथ महान समाज सुधारक भी थे। उनके नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय प्रदेश के ग्रामीण, दूरस्थ और वंचित वर्गों तक शिक्षा पहुंचाने का महत्वपूर्ण काम कर रहा है। नैक से ए-प्लस ग्रेड प्राप्त यह संस्थान गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपनी पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप विश्वविद्यालय विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने विद्यार्थियों से असफलताओं से सीख लेकर निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया।
दीक्षा वक्ता एवं हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. कैलाश चंद्र शर्मा ने कहा कि आधुनिक विज्ञान और तकनीक के समन्वय से शिक्षा प्रदेश के सामाजिक एवं आर्थिक विकास का प्रभावी माध्यम बन सकती है। उच्च शिक्षा में संचार कौशल, डिजिटल दक्षता, तार्किक चिंतन, समस्या समाधान और उद्यमिता जैसे विषय विद्यार्थियों को स्थानीय रोजगार से जोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों का दायित्व केवल रोजगारपरक शिक्षा देना नहीं, विद्यार्थियों का समग्र व्यक्तित्व विकास करना भी है। इसके लिए भौतिक शिक्षा के साथ आध्यात्मिक ज्ञान, स्वाध्याय, सत्यनिष्ठा और कर्तव्यपालन की भावना आवश्यक है।
समारोह में दीक्षा अतिथि नैक के अध्यक्ष एवं पूर्व कुलपति प्रो. नागेश्वर राव ने कहा कि मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा ने उच्च शिक्षा की पहुंच का विस्तार किया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत वर्ष 2035 तक सकल नामांकन अनुपात 50 प्रतिशत करने के लक्ष्य में मुक्त विश्वविद्यालयों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल प्रवेश संख्या तक सीमित नहीं होनी चाहिए, विद्यार्थियों को समय पर अध्ययन सामग्री, शैक्षणिक मार्गदर्शन और समस्याओं का समाधान मिलना चाहिए। आनलाइन शिक्षा के साथ सीमित इंटरनेट और संसाधनों वाले विद्यार्थियों की जरूरतों का भी ध्यान रखना होगा।