• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • AI बूटकैंप
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • गणेशोत्‍सव 2026
  • हनुमान अंश
  • Mutual Funds मास्टरी
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • मानसून
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • बिलासपुर

वाट्सएप पर पहुंचा त्रैमासिक परीक्षा का प्रश्नपत्र, छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग की गोपनीयता और व्यवस्थाओं पर उठे गंभीर सवाल

प्रदेशभर में सोमवार से शुरू हुई त्रैमासिक परीक्षाओं के दौरान शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है, जहां गोपनीय प्रश्नपत्र सीलबंद लिफाफे की बजाय व...और पढ़ें

By kranti namdevEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Tue, 22 Sep 2026 04:29:52 PM (IST)Updated Date: Tue, 22 Sep 2026 04:29:52 PM (IST)
वाट्सएप पर पहुंचा त्रैमासिक परीक्षा का प्रश्नपत्र, छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग की गोपनीयता और व्यवस्थाओं पर उठे गंभीर सवाल
एआई जनरेट फोटो

HighLights

  1. त्रैमासिक परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्र सुरक्षित माध्यम की बजाय सोशल मीडिया पर शेयर किए गए।
  2. वार्षिक परीक्षा परिणाम में 30% वेटेज रखने वाली इस परीक्षा की गोपनीयता पर उठे गंभीर सवाल।
  3. डीईओ संदीप पांडे ने कहा कि मामला संज्ञान में है और जल्द ही वितरण प्रणाली को सुधारा जाएगा।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुरः प्रदेशभर के स्कूलों में त्रैमासिक परीक्षाएं सोमवार से शुरू होते ही विभाग की लापरवाही उजागर हो गई। परीक्षा के पहले दिन विभिन्न परीक्षा केंद्रों तक गोपनीय प्रश्नपत्र सामान्य डाक या सुरक्षित माध्यम के बजाय वाट्सएप ग्रुप्स के जरिए भेजे गए। वाट्सएप पर खुला पेपर कई अनाधिकृत लोगों के फोन तक पहुंचने से इसके लीक होने की प्रबल आशंका बन गई है।

लोक शिक्षण संचालनालय की व्यवस्था और निर्देशों के तहत आयोजित होने वाली त्रैमासिक परीक्षा का 30 प्रतिशत और छमाही परीक्षा का 35 प्रतिशत अंक सीधे मुख्य वार्षिक परीक्षा परिणाम में जुड़ता है। इतना महत्वपूर्ण वेटेज होने के बावजूद शिक्षा विभाग ने गोपनीयता की धज्जियां उड़ा दीं। विभागीय अफसरों का तर्क है कि पहले भी प्रश्नपत्र भेजने की यही परिपाटी रही है, लेकिन डिजिटल युग में कुछ ही मिनटों में पेपर अनगिनत निजी मोबाइलों में फारवर्ड हो गया।


सरकारी दावों के विपरीत बिना किसी सुरक्षा प्रोटोकाल के सीधे स्क्रीनशाट और पीडीएफ शेयर करने से परीक्षा की शुचिता तार-तार हो गई है। अगर समय रहते ऐसी लचर कार्यप्रणाली पर रोक नहीं लगाई गई, तो इसका सीधा असर छात्रों के शैक्षणिक भविष्य और मेरिट सूची पर पड़ेगा। जानकारों की माने तो जिम्मेदारों को चाहिए कि वे तकनीक की आड़ में गोपनीयता खत्म करने के बजाय प्रिंटेड और सीलबंद पैकेट में ही पेपर वितरण सुनिश्चित कराएं।

नियमों की अनदेखी से बिगड़ेगा छात्रों का रिजल्ट

डीपीआइ के स्पष्ट नियम हैं कि त्रैमासिक के 30 प्रतिशत और छमाही के 35 प्रतिशत अंक वार्षिक परिणाम का आधार बनते हैं। इतने अहम अंकों के बावजूद बिना सीलबंद व्यवस्था के खुले व्हाट्सएप से प्रश्नपत्र बांटना शिक्षा प्रणाली की गंभीर विफलता दर्शाता है। लापरवाही से होनहार विद्यार्थियों की मेहनत पर पानी फिरने का खतरा बना हुआ है।

यह भी पढ़ें- नंबर प्लेट पर टेप-पन्नी लगाने वालों पर गाज, बिलासपुर में 724 वाहन जब्त, 7 लाख से ज्यादा चालान, कई आरोपी पहुंचे जेल

डिजिटल लापरवाही से सेंटरों में मची अफरा-तफरी

सैकड़ों केंद्रों तक पेपर पहुंचने से पहले ही इंटरनेट पर कई गैर-संबंधित लोगों के पास पहुंच गया। अधिकारियों ने इसे सामान्य व्यवस्था बताया, लेकिन इंटरनेट मीडिया के दौर में पेपर का वायरल होना परीक्षा की पारदर्शिता पर सीधा प्रहार है। यदि पेपर रद होता है तो बच्चों को दोबारा परेशानी झेलनी पड़ेगी।

वर्जन:

मामला संज्ञान में आया है। इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों से विस्तृत चर्चा की गई है। परीक्षा की गोपनीयता और पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं होगा, वितरण व्यवस्था को जल्द ही दुरुस्त किया जाएगा।

संदीप पांडे, जिला शिक्षा अधिकारी