75 लाख के बांड विवाद में फंसी रेलवे की नौकरी, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने केंद्र और राज्य को भेजा नोटिस
छत्तीसगढ़ में मेडिकल हेल्थ ऑफिसर के पद पर कार्यरत डॉ. अधिश्री बाजपेयी का यूपीएससी के जरिए भारतीय रेलवे में असिस्टेंट डिविजनल मेडिकल ऑफिसर (ग्रुप-ए) के पद पर चयन हुआ है। लेकिन राज्य सरकार द्वारा 75 लाख रुपये के सेवा बांड के चलते एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) देने से इनकार करने के बाद यह मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है।
Publish Date: Mon, 24 Aug 2026 11:00:37 PM (IST)Updated Date: Mon, 24 Aug 2026 11:00:37 PM (IST)
प्रतीकात्मक चित्रHighLights
- छत्तीसगढ़ की डॉक्टर की बढ़ी मुश्किलें।
- रेलवे में चयन के बाद भी राज्य सरकार ने रोकी एनओसी।
- हाई कोर्ट में चार सप्ताह के भीतर मांगा गया जवाब।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुरः भारतीय रेलवे में यूपीएससी के जरिए ग्रुप-ए अधिकारी के पद पर चयनित छत्तीसगढ़ की मेडिकल हेल्थ आफिसर डा. अधिश्री बाजपेयी के लिए राज्य सरकार द्वारा 75 लाख रुपये का बांड अब एक बड़ी समस्या बन गया है।
राज्य सरकार ने रेलवे की नौकरी ज्वाइन करने के लिए मांगी गई अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) देने से इन्कार कर दिया है। इस मामले में दायर याचिका पर हाई कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने 19 अगस्त 2026 को मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने फिलहाल न तो एनओसी जारी करने का निर्देश दिया है और न ही 75 लाख रुपये के बांड से कोई अंतरिम छूट दी है। मामले को 28 सितंबर 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
याचिका के अनुसार, डा. अधिश्री बाजपेयी वर्तमान में राज्य सरकार के अधीन मेडिकल हेल्थ आफिसर के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने राज्य सरकार के साथ सेवा संबंधी बांड निष्पादित किया था। इसी दौरान उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा दी और भारतीय रेलवे में असिस्टेंट डिविजनल मेडिकल आफिसर (ग्रुप-ए) के पद के लिए चयनित हुईं। उन्हें 30 जनवरी 2024 को नियुक्ति मिली थी। उस समय वह पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रही थीं, इसलिए संबंधित अधिकारियों ने उन्हें पीजी पूरी करने के लिए छूट दी थी।
असमंजस की बनी हुई है स्थिति
याचिकाकर्ता ने भारतीय रेलवे की नियुक्ति पर ज्वाइन करने के लिए राज्य सरकार से एनओसी मांगी, लेकिन उनका आवेदन 16 अप्रैल 2026 को खारिज कर दिया गया। याचिका में कहा गया है कि एनओसी नहीं मिलने के कारण रेलवे की नियुक्ति व ज्वाइन करने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है और बांड की शर्त के चलते कार्रवाई का भी खतरा है।
आवेदन खारिज करने का बताना होगा आधार
हाई कोर्ट ने सरकारों से अलग-अलग सवालों की सूची बनाकर जवाब मांगने के बजाय याचिका में उठाए गए मुख्य मुद्दों पर रिप्लाई दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने पूछा है कि एनओसी क्यों नहीं दी गई? राज्य सरकार को 16 अप्रैल 2026 को आवेदन खारिज करने का आधार बताना होगा।
सरकार के जवाब पर नजर
महत्वपूर्ण यह है कि हाई कोर्ट ने फिलहाल डा. बाजपेयी को रेलवे की नौकरी ज्वाइन करने की अनुमति नहीं दी है और न ही 75 लाख रुपये के बांड से छूट प्रदान की है। अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी। इसमें मिलने वाले जवाब के बाद कोर्ट आगे का निर्णय लेगा।