बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। उसलापुर रेलवे स्टेशन के सामने नो- पार्किंग में गाड़ियां खड़ी करना चालकों को महंगा पड़ा। आरपीएफ ने ऐसी 15 गाड़ियां जब्त कर रेलवे अधिनियम के तहत कार्रवाई की। जब्त गाड़ियां में कुछ रेलकर्मियों की थी, जो स्टेशन में अलग-अलग विभागों में पदस्थ है और ड्यूटी पर थे। ऐसे कर्मचारियों को चेतावनी देकर छोड़ा गया। दोबारा उनकी गाड़ियों का जब्त की जाएगी। इसके अलावा रेलकर्मियों पर कार्रवाई की जाएगी।

उसलापुर रेलवे स्टेशन में कुछ महीने पहले पार्किंग को लेकर समस्या थी। स्टैंड संचालक ने लाइसेंस फीस जमा नहीं की तो स्टैंड को बंद करा दिया गया। वाहन रखने के लिए व्यवस्थित जगह नहीं होने के कारण उस गाड़ियां कहीं भी खड़ी कर दी जाती थी। आरपीएफ चाहकर भी इसलिए कार्रवाइ नहीं कर पा रही थी, क्योंकि यदि यात्री उनसे स्टैंड को लेकर सवाल करते हैं तो उनसे पास जवाब नहीं रहता। इसी समस्या को देखते हुए रेलवे ने नए सिरे से पार्किंग का ठेका किया। अब यह पार्किंग असतित्व में आ जा चुका है।

नियमाानुसार सभी को गाड़ियां यही खड़ी करनी है। इसके बावजूद पार्किंग का शुल्क बचाने के चक्कर में यात्री या उन्हें लेने के लिए पहुंचे स्वजन जहां मर्जी गाड़ियां खड़ी कर देते हैं। इसके कारण न केवल स्टेशन की पार्किंग अव्यस्थित नजर आ रही थी, बल्कि परेशानियों भी हो रही थी। इसे देखते हुए आरपीएफ आउपोस्ट की टीम ने अभियान चलाया। इस दौरान नो - पार्किंग में जितनी भी गाड़ियां खड़ी थी, उन्हें जब्त किया।

सभी के पहिए को जंजीर से कसकर ताला जड़ दिया गया। जब यात्रा, स्वजन पहुंचे थे उनके होश उड़ गए। उन्हें अलग- अलग तरह के बहाने बनाते नजर आए, लेकिन आरपीएफ ने किसी को नहीं छोड़ा। सभी के खिलाफ रेलवे अधिनियम की धारा 159 के तहत कार्रवाई हुई। करीब पांच गाड़ियां रेलकर्मियों की थी। पहले तो इन्हें नहीं छोड़ा गया, लेकिन पता चला कि ड्यूटी से आ रहे हैं, इसलिए पहली व आखिरी बार चेतावनी देकर छोड़ा गया। दोबारा यहां गाड़ी खड़ी नहीं करने के लिए कहा गया है।

Posted By: Manoj Kumar Tiwari

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