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रायपुर के मां मंगला नर्सिंग कॉलेज की मान्यता पर ''योग्यता प्रमाण-पत्र'' का पेंच, हाई कोर्ट ने 15 दिन में आवेदन करने कहा

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By Kamlesh RajakEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Fri, 18 Sep 2026 06:17:59 PM (IST)Updated Date: Fri, 18 Sep 2026 06:17:59 PM (IST)
रायपुर के मां मंगला नर्सिंग कॉलेज की मान्यता पर ''योग्यता प्रमाण-पत्र'' का पेंच, हाई कोर्ट ने 15 दिन में आवेदन करने कहा
प्रतीकात्मक चित्र

HighLights

  1. कॉलेज का कहना था कि संस्था पहले से मान्यता प्राप्त है, फिर भी मांगा जा रहा प्रमाण-पत्र।
  2. बीएससी नर्सिंग प्रवेश के लिए काउंसलिंग से पहले मान्यता और फैकल्टी मानकों का होगा सत्यापन।
  3. जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की अदालत से नर्सिंग कॉलेज प्रबंधन को मिली यह बड़ी राहत।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। रायपुर के मां मंगला नर्सिंग कॉलेज की बीएससी नर्सिंग पाठ्यक्रम की मान्यता को लेकर ''''योग्यता प्रमाण-पत्र'''' की अनिवार्यता के विवाद में हाई कोर्ट ने कॉलेज को संबंधित प्राधिकारी के समक्ष आवेदन करने का निर्देश दिया है। कॉलेज की ओर से याचिका डॉ. गोविंद चंद्र चौहान, उम्र 55 वर्ष, निवासी ग्राम रानीडीह, तहसील सरिया, जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ ने दायर की थी।

जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने निर्देश दिया कि आदेश की प्रति मिलने के 15 दिन के भीतर कॉलेज संबंधित प्राधिकारी के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करे। प्राधिकारी भारतीय नर्सिंग परिषद के वर्ष 2020 के निर्धारित नियमों के तहत कॉलेज की फैकल्टी और अन्य मानकों का सत्यापन कर आवेदन पर कानून के अनुसार निर्णय लेगा। कालेज ने हाई कोर्ट में 24 जुलाई 2026 को पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय और 27 जुलाई 2026 को छत्तीसगढ़ नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल की ओर से जारी पत्रों को चुनौती दी थी।


कॉलेज का कहना था कि संस्था पहले से मान्यता प्राप्त है, इसके बावजूद उससे भारतीय नर्सिंग परिषद का ''''योग्यता प्रमाण-पत्र'''' मांगा जा रहा है। कॉलेज की ओर से अधिवक्ता विपिन तिवारी ने बताया कि इस संबंध में संबंधित अधिकारियों के समक्ष अभ्यावेदन भी दिए गए हैं, लेकिन उन पर निर्णय नहीं हुआ। इस बीच शैक्षणिक सत्र 2026-27 में बीएससी नर्सिंग प्रवेश के लिए काउंसलिंग जल्द शुरू होने की संभावना है। इसलिए कॉलेज को मौजूदा मान्यता के आधार पर सत्र जारी रखने की अनुमति देने की मांग की गई।

विश्वविद्यालय और नर्सिंग काउंसिल ने जरूरी बताया

सुनवाई के दौरान प्रतिवादी विश्वविद्यालय और छत्तीसगढ़ नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल की ओर से कहा गया कि ''''योग्यता प्रमाण-पत्र'''' आवश्यक है। कॉलेज को निर्धारित प्रक्रिया के तहत संबंधित प्राधिकारी के समक्ष जाना होगा।

उनकी ओर से बताया गया कि कॉलेज की फैकल्टी और अन्य निर्धारित मानकों का सत्यापन किया जाएगा। सभी आवश्यक मापदंड पूरे पाए जाने पर भारतीय नर्सिंग परिषद से ''''योग्यता प्रमाण-पत्र'''' जारी करने के लिए सिफारिश की जाएगी।

कॉलेज ने संबंधित प्राधिकारी के पास जाने पर सहमति दी

बहस के दौरान कॉलेज की ओर से भी कहा गया कि वह ''''योग्यता प्रमाण-पत्र'''' प्राप्त करने के लिए आवश्यक सिफारिश के लिए संबंधित प्राधिकारी के समक्ष जाने को तैयार है।

हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को देखते हुए कॉलेज को 15 दिन के भीतर संबंधित प्राधिकारी से संपर्क करने का निर्देश दिया। इसके बाद संबंधित अधिकारी भारतीय नर्सिंग परिषद के नर्सिंग कार्यक्रमों को योग्याजा प्रदान करने के न्यूनतम पूर्वापेक्षा संबंधी विनियम, 2020 के तहत निर्धारित शर्तों का सत्यापन करेगा और आवेदन पर उचित आदेश पारित करेगा।

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हाई कोर्ट ने मेरिट पर कोई राय नहीं दी

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की है। संबंधित प्राधिकारी को कॉलेज के आवेदन पर स्वतंत्र रूप से और कानून के अनुसार निर्णय लेना होगा। इस आदेश के साथ हाई कोर्ट ने याचिका का निराकरण कर दिया।