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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 28, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

रीयल इस्टेट का बिजनेस ध्वस्त, एक मकान नहीं बेच पा रहे बिल्डर

बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि आर्थिक मंदी के बीच रीयल इस्टेट का बिजनेस लगभग ध्वस्त हो गया है। बीते एक महीने में बिल्डर एक या दो मकान नहीं बेच पा रहे है...और पढ़ें

By Nai Dunia News NetworkEdited By: Nai Dunia News Network
Publish Date: Wed, 28 Aug 2019 10:27:23 PM (IST)Updated Date: Wed, 28 Aug 2019 10:27:23 PM (IST)
रीयल इस्टेट का बिजनेस ध्वस्त, एक मकान नहीं बेच पा रहे बिल्डर

बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

आर्थिक मंदी के बीच रीयल इस्टेट का बिजनेस लगभग ध्वस्त हो गया है। बीते एक महीने में बिल्डर एक या दो मकान नहीं बेच पा रहे हैं। न्यायधानी के बिल्डर जिस तेज गति से मकान बना रहे थे उसकी रफ्तार भी धीमी हो गई है। उनका कहना है कि आर्थिक मंदी व सरकारी प्रक्रियाओं में जटिलता के कारण रीयल इस्टेट सेक्टर को जबरदस्त नुकसान हुआ है।

नईदुनिया द्वारा आर्थिक मंदी को लेकर इन दिनों लगातार बातचीत व परिचर्चा की जा रही है। ट्रांसपोर्ट, कोल, सराफा, ऑटोमोबाइल के बाद रीयल इस्टेट पर हमने विशेषज्ञों व बिल्डरों से आ रही दिक्कत को लेकर असलियत जाना। इसमें यह पता चला कि शहर व आसपास कंस्ट्रक्शन व नए मकान नहीं बन रहे हैं। जहां काम चालू है उसकी रफ्तार बहुत कम हो चुकी है। बिल्डरों के आठ सौ से अधिक मकान बनकर तैयार हैं। उन्हें खरीदने वाला कोई नहीं है। महीने में जहां एक बिल्डर 10 से 15 मकान आसानी से बेच देता था। आज की स्थिति में मुश्किल से एक या दो ही बिक रहे हैं। साफ है कि संकट बढ़ रहा है। अर्थशास्त्र के प्रो.केके शर्मा का कहना है कि सरकार द्वारा उद्योगों को दी गई छूट प्रभावी नहीं होगी। आर्थिक सुधारों में गति के सुझाव में कुछ पेंच फंसे हुए हैं। यहां प्रश्न है कि कौन सा सुधार? अभी तक का अनुभव यह है कि आर्थिक सुधारों के कारण ही मंदी आई है। जीएसटी जैसा सुधार लागू करने के कारण छोटे उद्योग दबाव में आ गए। इस दबाव से उनमें रोजगार के अवसर कम सृजित हुए। श्रमिकों के वेतन में कटौती हुई और मंदी पैठ कर गई। इसलिए यदि हम जीएसटी जैसे सुधारों को और मुस्तैदी से लागू करेंगे तो मंदी बढ़ेगी, न कि घटेगी। ऑटो व रीयल इस्टेट पर इसका ज्यादा असर दिख रहा है।


बिल्डरों ने यह कहा...

00 डायवर्सन की प्रकिया तक जटिल

रीयल इस्टेट सेक्टर में जबरदस्त गिरावट है। महीने में जहां 12 मकान हम बेच लेते थे। आज एक-दो भी मुश्किल से हो रहा है। आर्थिक मंदी और सरकारी प्रक्रियाओं की जटिलता के कारण ऐसा हुआ है। जीएसटी एक प्रमुख कारण है। डायवर्सन की प्रक्रिया इतनी पेचिदा है कि तहसीलदार के पीछे कई दिन घूमना पड़ता है।

-पीएन बजाज, बिल्डर गणेश कंस्ट्रक्शन, राजीव प्लाजा

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00 नोटबंदी के कारण आई है सुस्ती

बिल्डिंग निर्माण के क्षेत्र में आई मंदी का प्रमुख कारण नोटबंदी व जीएसटी है। बाजार सुस्त पड़ा हुआ है। एक पैसा लोग लगाने तैयार नहीं हैं। सरकार को इस ओर तेजी से कदम उठाना चाहिए। अभी जो कदम उठाए गए हैं वे प्रभावी नहीं हैं। टैक्स रिटर्न फाइल की प्रक्रिया को एकदम आसान करना होगा।

-अनिल अग्रवाल, बिल्डर, आकृति कंस्ट्रक्शन, वीआर प्लाजा

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00 मकान खरीदने से घबरा रहे लोग

आर्थिक मंदी के कारण लोग लोग एकदम से मकान खरीदने में भी घबरा रहे हैं। 15 से 25 लाख तक ठीक है उसके ऊपर तो बिल्कुल भी हाथ नहीं लगा रहे हैं। शहर के चारों ओर सन्नाटा है। बिल्डिंग मटेरियल का काम भी शांत है। मकान बिकने से बड़े पैमाने पर उद्योग जगत को फायदा होता है, लेकिन अभी ऐसा नहीं हो रहा है।

-गौरव तिवारी, बिल्डर, स्टार रीयल बिल्डकॉन प्रा.लि

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00 नोटबंदी का असल रिएक्शन है

रीयल इस्टेट सेक्टर नोटबंदी के बाद से अभी तक उबर नहीं सका है। कुछ हद तक रेरा कानून ने भी खलल डाला है। जीएसटी में भले ही राहत देने का प्रयास हुआ है, लेकिन आइटीसी का लाभ नहीं मिल रहा। जीएसटी पांच फीसदी से कम हो। लोन की प्रक्रिया आसान कर व शासन निवेश बढ़ाकर राहत देगा तभी हम उबर पाएंगे।

-चंद्रचूड़ त्रिपाठी, बिल्डर, श्रद्धा इंफ्रा इस्टेट प्रा.लि