Road Safety Campaign Bilaspur: बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। रोड सेफ्टी सेल की ओर से गांधी चौक स्थित स्वामी आत्मानंद हिंदी माध्यम स्कूल में यातायात जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। रोड सेफ्टी सेल के प्रभारी एसआइ उमाशंकर पांडेय ने छात्र-छात्राओं को लाइव ट्रैफिक नियम के बारे में जानकारी दी। 18 साल से कम उम्र में मोटरसाइकिल चलाने से होने वाले नुकसान के बारे में भी बताया। स्कूली छात्रों को मोटरसाइकिल नहीं चलाने की समझाइश दी।
प्रभारी एसआइ उमाशंकर पांडेय ने छात्र-छात्राओं को बताया कि किसी भी चौक के पास पहुंचे तो रेड सिग्नल देखकर स्र्क जाएं। वहां उपस्थित यातायात के जवान पर नजर रखें। जवान जिस ओर इशार करेंगे। उसके मुताबिक वाहन चालक आगे बढ़ेंगे। बाकी दूसरे छोर के लोगों को इंतजार करना होगा। इस बीच यदि एक समय में एक छोर से एंबुलेंस और दूसरे छोर से फायर ब्रिगेड आ गई तो इस स्थिति में पहले फायर ब्रिगेड गाड़ी को रवाना करना है। एंबुलेंस में मरीज के लिए स्टाफ मौजूद रहता है।
इससे मरीज की देखभाल होती है और जिस जगह में आग लगी है। वहां समय पर फायर ब्रिगेड गाड़ी नहीं पहुंचेगी तो जन-धन का नुकसान हो जाएगा। इसलिए ऐसी परिस्थिति में फायर ब्रिगेड गाड़ी को आगे निकलने के लिए जगह देना चाहिए। एसआइ पांडेय ने कहा कि सड़क पर पैदल चलने के दौरान हमेशा बाईं तरफ चलना चाहिए। क्योंकि यदि कोई व्यक्ति सड़क पर दाईं साइड से पैदल जा रहे हैं तो पीछे से तेज रफ्तार से आने वाले वाहनों का पता नहीं चलता। कई बार चालक लापरवाहीपूर्वक चलाते हुए पीछे से पैदल चलने वालों को ठोकर मार देते हैं। इसलिए पैदल चलने वालों को सड़क के दाईं ओर चलना चाहिए।
छात्रों से पूछे सवाल
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान एसआइ उमाशंकर पांडेय ने छात्र-छात्राओं से प्रश्नों के जवाब पूछे। सही उत्तर देने वाले छात्रों को तालियां बजवाकर स्वागत किया। इस दौरान ज्यादातर छात्रों ने यातायात नियम के बारे में सही जवाब दिया। साथ ही छात्रों ने स्कूटी, बुलेट व किसी भी प्रकार के वाहन नहीं चलाने की बात कही। बालिग होने के बाद पहले लाइसेंस बनवाएंगे। इसके बाद ही वाहन चलाना सीखेंगे। इस दौरान विद्यार्थियों ने सड़कों पर सुरक्षित चलने का संकल्प भी लिया।
अभिभावकों को दी समझाइश
यातायात जागरूकता कार्यक्रम के दौरान स्कूल में छात्रों के अलावा उनके पालक भी पहुंचे। इस अवसर पर यातायात रोड सेफ्टी सेल के प्रभारी एसआइ उमाशंकर पांडेय ने पालकों को कहा कि अपने बच्चों को गाड़ी चलाने न दें। बच्चों को ऐसे संस्कार प्रदान करें कि बड़े होने के बाद भी यातायात नियम का पालन करते हुए वाहन चलाएं। क्योंकि परिवार तभी सुरक्षित रहेगा, जब आप सुरक्षित रहेंगे।