बिलासपुर में माड्यूलर किचन के नाम पर 30 हजार एडवांस लेकर काम नहीं किया, फर्म पर 10 हजार हर्जाना
बिलासपुर में माड्यूलर किचन के नाम पर 30 हजार एडवांस लेकर काम शुरू न करने वाली फर्म के खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग ने सख्त फैसला सुनाया है।
Publish Date: Thu, 22 Oct 2026 10:06:21 PM (IST)Updated Date: Thu, 22 Oct 2026 10:06:21 PM (IST)
HighLights
- माड्यूलर किचन के लिए 30 हजार एडवांस लेकर काम नहीं किया।
- . जिला उपभोक्ता आयोग ने फर्म पर 10 हजार हर्जाना लगाया।
- 9% ब्याज के साथ 45 दिन में रकम लौटाने का आदेश।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: माड्यूलर किचन तैयार करने के नाम पर 30 हजार रुपये अग्रिम लेने के बाद काम शुरू नहीं करना बिलासपुर की एक फर्म को महंगा पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने इसे सेवा में कमी मानते हुए फर्म संचालक को अग्रिम राशि नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने और उपभोक्ता को 10 हजार रुपये अतिरिक्त देने का आदेश दिया है।
आयोग ने भुगतान के लिए आदेश की प्रति मिलने से 45 दिन की समय-सीमा तय की है। मामला ग्राम हाफा, पोस्ट गनियारी, तहसील सकरी निवासी अजय कुमार पाण्डेय का है। उन्होंने अपने घर में मॉड्यूलर किचन बनवाने के लिए बिलासपुर की ‘इनसाइड स्टाइल’ फर्म से संपर्क किया था।
दोनों पक्षों के बीच 10 गुणा 10 फीट की रसोई तैयार करने के लिए 80 हजार रुपये में सहमति बनी थी। अनुबंध के अनुसार, नौ अप्रैल 2024 को किचन का नक्शा तैयार किया गया। इसी दिन अजय कुमार पाण्डेय ने 30 हजार रुपये नकद अग्रिम दिए, जिसकी रसीद भी उपलब्ध थी। तय समय के अनुसार 15 दिन के भीतर काम शुरू होना था, लेकिन फर्म ने न तो काम शुरू किया और न ही संतोषजनक जवाब दिया। लगातार संपर्क करने के बाद भी काम टालने पर उपभोक्ता ने जिला आयोग में परिवाद दायर किया।
फर्म की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल, सदस्य पूर्णिमा सिंह और आलोक कुमार पाण्डेय ने दस्तावेजों और साक्ष्यों का परीक्षण किया। फर्म की ओर से पेश नहीं होने के कारण उसके विरुद्ध एकपक्षीय कार्रवाई की गई। आयोग ने अग्रिम राशि लेने के बाद भी काम शुरू नहीं करने को सेवा में कमी माना।
45 दिन में करना होगा भुगतान
आयोग ने 16 अक्टूबर 2026 को पारित आदेश में फर्म संचालक को 30 हजार रुपये की अग्रिम राशि 9 अप्रैल 2024 से भुगतान की तारीख तक नौ प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज सहित लौटाने का निर्देश दिया है। इसके अलावा मानसिक और शारीरिक कष्ट के प्रतिकर के रूप में पांच हजार रुपये तथा वाद खर्च के लिए पांच हजार रुपये अलग से देने होंगे।