
बिलासपुर। खाद्य सामग्री बनाने वाले निर्माताओं को अब ग्राउंड वॉटर (भूजल स्तर) का उपयोग करने से पहले सेंट्रल वॉटर अथॉरिटी (सीजीडब्ल्यूए) द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थाओं से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना जरूरी कर दिया है। बगैर एनओसी लाइसेंस का नवीनीकरण भी नहीं होगा।
प्रदूषित पानी के इस्तेमाल की लगातार मिल रही शिकायतों को देखते हुए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ
इंडिया ने यह व्यवस्था लागू की है। एक दिसंबर से इसे देश के साथ ही प्रदेश के सभी जिलों में लागू करने का फरमान जारी किया है। लिहाजा इसके पहले निर्माताओं को नए निर्देशों के तहत प्रक्रिया पूरी करने निर्देशित किया गया है।
जारी पत्र में इस बात का हवाला दिया गया है कि राष्ट्रीय स्तर पर कराए गए सर्वे में यह बात सामने आई है कि ज्यादातर बीमारियों का कारण दूषित पानी है। लिहाजा निर्माताओं को आवेदन की सुविधा के लिए ऑनलाइन व्यवस्था है। इसके बाद अथॉरिटी के अफसर भूजल की जांच करेंगे। मानक स्तर का पता लगाएंगे। उसके बाद एनओसी जारी करेंगे।
प्रदेश में 200 फीट गिरा भूजल स्तर
राज्य शासन द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट में खुलासा किया है कि प्रदेश में भूजल स्तर में 200 फीट की गिरावट दर्ज की
गई है। भूजल का सर्वाधिक दोहन उद्योगों में किया जा रहा है। इसके चलते भी जल स्तर में तेजी के साथ गिरावट आ
रही है।
इन पर रहेगी नजर
नमकीन,बेकरी व कनफेक्शनरी सहित अन्य खाद्य पदार्थ बनाने वाले संस्थानों पर विशेष नजर रहेगी। इन्हें अनिवार्य रूप से एनओसी लेनी होगी। कोर्ट ने भी लगाई है फटकार प्रदूषित जल आपूर्ति को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कमेटी बनाकर स्वच्छ जल आपूर्ति का निर्देश नगरीय निकायों को दिया है।
शासन का पत्र मिला
केंद्र सरकार के निर्देशों का पालन करने के संबंध में राज्य शासन का पत्र मिला है। संबंधित विभाग को परिपालन के संबंध में निर्देशित किया गया है - केडी कुंजाम, प्रभारी कलेक्टर