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"सुनियोजित साजिश है यह घोटाला": हाई कोर्ट ने ढेबर को बताया मुख्य साजिशकर्ता, जेल में ही रहेंगे अनवर,जमानत याचिका खारिज

अनवर ढेबर की जमानत याचिका खारिज होने की खबर छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों के लिए एक बड़ा घटनाक्रम है। हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणियों ने इस मामले की गंभीरता को और स्पष्ट कर दिया है।

By Digital DeskEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Fri, 15 May 2026 03:02:09 PM (IST)Updated Date: Fri, 15 May 2026 03:02:09 PM (IST)
"सुनियोजित साजिश है यह घोटाला": हाई कोर्ट ने ढेबर को बताया मुख्य साजिशकर्ता, जेल में ही रहेंगे अनवर,जमानत याचिका खारिज

HighLights

  1. आरोपी अनवर ढेबर को नहीं मिली राहत
  2. हाई कोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका
  3. प्रभावशाली होने से राहत नहीं मिलती

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने मैनपावर सप्लाई घोटाले में आरोपी अनवर ढेबर की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है, आर्थिक अपराध सामान्य अपराध नहीं होते, बल्कि ये समाज और देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाली सुनियोजित साजिश होते हैं।

कर्मचारियों के ओवरटाइम भुगतान में गड़बड़ी से जुड़ा मामला है। ED की जांच में 28.80 लाख रुपए नकद मिले थे। आरोप है, कर्मचारियों के ओवरटाइम के पैसे में भ्रष्टाचार किया गया। जांच के बाद, मिले सबूत के आधार पर ACB ने धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया है। अनवर ढेबर पर आरोप है, उन्होंने अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर CSMCL के कामकाज और पैसों के फैसलों में दखल दिया।


जांच रिपोर्ट के मुताबिक, संस्था को मैनपावर सप्लाई करने वाली निजी एजेंसियों के बिल तब तक पास नहीं किए जाते थे, जब तक वे तय रकम कमीशन के रूप में नहीं मिल जाता था। जांच में यह भी सामने आया है, शुरुआत में कमीशन तय दर पर लिया जाता था, लेकिन बाद में अनवर ढेबर के निर्देश पर इसे बढ़ाकर बिल राशि का एक-तिहाई या उससे ज्यादा कर दिया गया। आरोप है, चुनाव के नाम पर अवैध वसूली और बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए थे।

मामले में निगम के तत्कालीन अधिकारियों और कुछ निजी लोगों पर पैसे पहुंचाने वाले माध्यम के तौर पर काम करने का आरोप है। वे एजेंसियों से रकम लेकर अनवर ढेबर तक पहुंचाते थे। ED ने 29 नवंबर 2023 को ट्रैप कार्रवाई के दौरान ईगल हंटर सॉल्यूशंस एजेंसी के कर्मचारियों को 28.80 लाख रुपए की रिश्वत देते हुए पकड़ा था। इसी कार्रवाई में मिले सबूतों के आधार पर अनवर ढेबर को 23 फरवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया।

अनवर ढेबर ने हाई कोर्ट में दायर जमानत याचिका में कहा, यह कस्टडी का एवरग्रीनिंग है। उन्हें राजनीतिक द्वेष के चलते फंसाया गया है। एक ही मामले में बार-बार अलग-अलग एफआईआर दर्ज की जा रही हैं, ताकि याचिकाकर्ता को जेल से बाहर आने का मौका न मिले। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने जमानत का विरोध किया।

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है ऐसे मामलों में केवल इसलिए राहत नहीं दी जा सकती, क्योंकि आरोपी प्रभावशाली है या सीधे तौर पर धन की वसूली उसके पास से नहीं हुई है। जब मामला जनता के पैसे और सरकारी खजाने की लूट से जुड़ा हो, तो कोर्ट को अलर्ट रहना चाहिए। ऐसे घोटाले न केवल देश के आर्थिक ढांचे को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि सरकारी व्यवस्था में जनता के विश्वास को भी चोट पहुंचाते हैं। कोर्ट ने ढेबर को इस मामले का मुख्य साजिशकर्ता और फायदा लेने वाला बताया है।

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