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रावतपुरा सरकार केस में CBI को झटका, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने फोन टैपिंग अवैध बताई; रिकॉर्डिंग नष्ट करने का आदेश

बिलासपुर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की पीठ ने रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट के चेयरमैन रविशंकर महाराज से जुड़े स...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Fri, 07 Aug 2026 07:37:20 AM (IST)Updated Date: Fri, 07 Aug 2026 07:54:21 AM (IST)
रावतपुरा सरकार केस में CBI को झटका, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने फोन टैपिंग अवैध बताई; रिकॉर्डिंग नष्ट करने का आदेश

HighLights

  1. सीबीआई की फोन टैपिंग अवैध घोषित, रिकॉर्डिंग नष्ट करने का आदेश।
  2. हाई कोर्ट ने एफआईआर व चार्जशीट रद करने से किया इनकार।
  3. बिना फोन टैपिंग साक्ष्यों के चलेगा रावतपुरा सरकार केस।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: हाई कोर्ट ने रावतपुरा संस्थान के चेयरमैन रविशंकर महाराज को फोन टैपिंग मामले में महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल के डिवीजन बेंच ने सीबीआइ द्वारा की गई फोन टैपिंग को गैरकानूनी ठहराते हुए इसे रद कर दिया है।

हाई कोर्ट ने सीबीआइ को निर्देश दिया है कि वह टैपिंग के जरिए प्राप्त सभी रिकार्डिंग्स को नष्ट करे। हालांकि, कोर्ट ने सीबीआइ की एफआइआर और चार्जशीट को रद करने से इन्कार किया है। अब सीबीआइ को इस मामले में फोन टैपिंग के बिना अन्य दस्तावेजों और गवाहों के आधार पर सबूत पेश करने होंगे।


सीबीआइ ने 30 जून 2025 को देशभर के 35 मेडिकल संस्थानों के खिलाफ एफआइआर दर्ज की थी, जिसमें आरोप था कि स्वास्थ्य मंत्रालय और एनएमसी के अधिकारियों के साथ मिलकर रिश्वत, फर्जी मरीज और घोस्ट फैकल्टी के माध्यम से मेडिकल कालेजों को निरीक्षण रिपोर्ट में अनुकूलता दिलाई जाती थी।

रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज, रायपुर के चेयरमैन होने के नाते रविशंकर महाराज को भी आरोपित बनाया गया था। हाई कोर्ट ने सीबीआइ से पूछा कि जब मूल आदेश 28 जून को जारी हुआ, तो गृह मंत्रालय ने इसे 27 दिन पुरानी तारीख से कैसे मंजूरी दी। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फोन टैपिंग किसी व्यक्ति की निजता पर हमला है और इसके लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है। इस मामले में सुनवाई फोन टैपिंग के सबूतों के बिना जारी रहेगी।

मामले का पूरा ब्योरा और हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी:

  • फोन टैपिंग अवैध, रिकॉर्डिंग नष्ट करने का आदेश: हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति का फोन टैप करना उसकी निजता पर सीधा हमला है। इसके लिए तय कानूनी प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है, जिसका उल्लंघन हुआ है।

  • बैकडेटेड मंजूरी पर सीबीआई को घेरा: कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सीबीआई से पूछा कि जब मूल आदेश 28 जून को जारी हुआ, तो गृह मंत्रालय ने 27 दिन पुरानी (बैकडेटेड) तारीख से इसकी मंजूरी कैसे दे दी।

  • एफआईआर और चार्जशीट पर राहत नहीं: अदालत ने मामले की एफआईआर और चार्जशीट को रद करने से इनकार कर दिया है, जिससे रविशंकर महाराज के खिलाफ केस की सुनवाई चलती रहेगी।

  • बिना टैपिंग सबूतों के चलेगा केस: अब सीबीआई इस मामले में फोन टैपिंग रिकॉर्डिंग्स का उपयोग साक्ष्य के रूप में नहीं कर सकेगी। एजेंसी को अन्य दस्तावेजों और गवाहों के आधार पर ही सबूत पेश करने होंगे।

  • क्या था मूल मामला: सीबीआई ने 30 जून 2025 को देशभर के 35 मेडिकल संस्थानों पर स्वास्थ्य मंत्रालय व एनएमसी NMC अधिकारियों के साथ साठगांठ कर रिश्वत, फर्जी मरीज व घोस्ट फैकल्टी के जरिए अनुकूल निरीक्षण रिपोर्ट हासिल करने का आरोप लगाकर केस दर्ज किया था।