• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • AI बूटकैंप
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • गणेशोत्‍सव 2026
  • हनुमान अंश
  • Mutual Funds मास्टरी
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • मानसून
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • बिलासपुर

'बड़े झाड़ का जंगल' निकली 18 लाख की जमीन, बिलासपुर में सरकारी जमीन को निजी बताकर बेचने वाले को झटका

बिलासपुर के सरकंडा थाना अंतर्गत खमतराई में 'बड़े झाड़ का जंगल' श्रेणी की सरकारी जमीन को निजी बताकर 18.75 लाख रुपये में बेचने के आरोपी श्रेयांशु कौशिक ...और पढ़ें

By Kamlesh RajakEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Fri, 18 Sep 2026 09:22:31 PM (IST)Updated Date: Fri, 18 Sep 2026 09:22:31 PM (IST)
'बड़े झाड़ का जंगल' निकली 18 लाख की जमीन, बिलासपुर में सरकारी जमीन को निजी बताकर बेचने वाले को झटका

HighLights

  1. सरकारी जमीन को निजी बताकर बेचने के आरोपी की याचिका खारिज।
  2. 18.75 लाख में 'बड़े झाड़ का जंगल' भूमि बेचने का मामला।
  3. हाई कोर्ट ने कहा- दीवानी विवाद से आपराधिक केस नहीं रुकता।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। सरकारी जमीन को निजी बताकर बेचने के आरोपित को हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली। बिलासपुर के गुलमोहर पार्क निवासी आरोपी श्रेयांशु ने खुद को केवल बिक्री विलेख का सत्यापनकर्ता गवाह बताया था। डिवीजन बेंच ने कहा कि प्रथम दृष्टया अपराध में उसकी भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता। मामला सरकंडा थाने में दर्ज अपराध से जुड़ा है।

शिकायतकर्ता कौशल्या थवैत ने आरोप लगाया कि उसने खमतराई स्थित प्लाट नंबर 17/25, खसरा नंबर 559/1/थ/6, 1500 वर्गफीट जमीन नसीम अहमद के माध्यम से मूल विक्रेता विश्वनाथ राय से 30 मार्च 2022 को 18.75 लाख रुपये में खरीदी थी।

बाद में नामांतरण के लिए आवेदन करने पर एसडीओ ने इसे खारिज कर दिया। राजस्व रिकॉर्ड में जमीन ‘बड़े झाड़ का जंगल’ दर्ज होने के कारण कलेक्टर की अनुमति के बिना इसकी बिक्री नहीं की जा सकती थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि इसके बावजूद जमीन को निजी बताकर बिक्री विलेख कराया गया और उससे रकम ली गई।


पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। आरोपित ने हाई कोर्ट में जमानत याचिका लगाई थी। हाई कोर्ट ने एफआईआर और आरोपपत्र के साथ प्रस्तुत दस्तावेजों को देखने के बाद कहा कि प्रथम दृष्टया जमीन ‘बड़े झाड़ का जंगल’ के रूप में दर्ज है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी विवाद में दीवानी उपाय उपलब्ध होना अपने आप आपराधिक कार्रवाई पर रोक लगाने का आधार नहीं है। यदि एफआईआर और जांच में संज्ञेय अपराध के आवश्यक तत्व प्रथम दृष्टा सामने आते हैं, तो जांच को केवल इस आधार पर नहीं रोका जा सकता कि विवाद दीवानी प्रकृति का भी है। इसी कारण डिवीजन बेंच ने श्रेयांशु कौशिक की एफआईआर और 19 अप्रैल 2026 के आरोपपत्र को रद्द करने की मांग खारिज कर दी।