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सर्पदंश मुआवजा घोटाला: जांच के डर से बिलासपुर तहसील में कर्मचारियों का अकाल, अब पटवारी संभालेंगे रिकॉर्ड रूम का प्रभार

सर्पदंश मुआवजा घोटाले की जांच के खौफ कर्मचरियों पर इतना छाया हुआ हैं कि तहसील कार्यालय में कर्मचारियों का भारी अकाल पड़ गया है। स्थिति को संभालते हुए ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Sun, 16 Aug 2026 08:18:52 AM (IST)Updated Date: Sun, 16 Aug 2026 08:18:52 AM (IST)
सर्पदंश मुआवजा घोटाला: जांच के डर से बिलासपुर तहसील में कर्मचारियों का अकाल, अब पटवारी संभालेंगे रिकॉर्ड रूम का प्रभार
सर्पदंश मुआवजा जांच का खौफ, अधिकांश कर्मचारी नदारद (AI तस्वीर)

HighLights

  1. सर्पदंश मुआवजा जांच का खौफ, अधिकांश कर्मचारी नदारद
  2. युक्तीयुक्तकरण में पांच गए, तीन लिपिक जेल में, कार्य हो रहा प्रभावित
  3. कलेक्टर के निर्देश पर मिले चार नए लिपिक, पटवारी को रिकॉर्ड रूम का प्रभार

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। सर्पदंश मुआवजा घोटाले की जांच के खौफ कर्मचरियों पर इतना छाया हुआ हैं कि तहसील कार्यालय में कर्मचारियों का भारी अकाल पड़ गया है। हाल ही में युक्तीयुक्तकरण के तहत पांच शिक्षक अपने मूल विभाग लौट गए हैं, जबकि सर्पदंश घोटाले में तीन लिपिकों के जेल जाने और अन्य के नदारद रहने से कार्यालय की कार्यप्रणाली पूरी तरह चरमरा गई है।

तहसील कार्यालय में कर्मचारियों की भारी कमी के चलते पिछले एक माह से बंद पड़े रिकॉर्ड रूम का ताला नहीं खुल पा रहा है। रोजमर्रा के प्रभावित कार्यों को देखते हुए एसडीएम मनीष साहू ने कलेक्टर से कर्मचारियों की कमी हवाला देते हुए कर्मचारियों की मांग व्यवस्था बनाने के लिए की थी।


कार्यालय को मिले चार नए लिपिक

स्थिति को संभालते हुए कलेक्टर के निर्देश पर तहसील कार्यालय को चार नए लिपिक मिल गए हैं, वही रिकॉर्ड रूम का प्रभार पटवारी को सौंपा गया है ताकि जरूरी दस्तावेजों की आवाजाही शुरू हो सके। जमीन-जायदाद के नामांतरण, बटांकन, नक्शा-खसरा और बी-1 की प्रमाणित प्रतियां लेने के लिए पहुंच रहे आम नागरिकों और वकीलों को इससे कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

यह भी पढ़ें- सर्पदंश मुआवजा फर्जीवाड़ा: 15 एफआईआर के बाद भी जांच धीमी, फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार

जांच के दायरे से सहमे कर्मचारी

सर्पदंश मुआवजा राशि में 17 करोड़ से अधिक के फर्जीवाडे और ताबड़तोड़ गिरफ्तारियों के बाद तहसील कार्यालय के भीतर डर और सन्नाटे का माहौल है। जांच की आंच तेज होने के कारण कई कर्मचारी कार्यालय आने से बच रहे हैं या पल्ला झाड़ रहे हैं, जिससे प्रशासनिक कामकाज पर सीधा असर पड़ा है।

कर्मचारियों की कमी और जांच के बाद उत्पन्न स्थिति से कामकाज कुछ समय के लिए प्रभावित जरूर हुआ था। कलेक्टर कार्यालय के निर्देश पर नए चार लिपिक मिल गए हैं और रिकॉर्ड रूम का प्रभार पटवारी को सौंपकर व्यवस्था को सुचारू कर दिया गया है। नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होने दी जाएगी। मनीष साहू, एसडीएम बिलासपुर।