
बिलासपुर (निप्र)। जिला एवं सत्र न्यायाधीश एमडी कातुलकर ने पेंडारी में नसबंदी शिविर में ऑपरेशन के दो दिन बाद महिलाओं की मौत के मामले में प्रथमदृष्टया दोषी ठहराए गए व गैर इरादतन हत्या के आरोपी सर्जन डॉ. आरके गुप्ता की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। सुनवाई के दौरान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने चकरभाठा थाने से केस डायरी मंगाई थी।
बिलासपुर जिले के तखतपुर ब्लॉक के ग्राम पेंडारी में आयोजित नसबंदी शिविर में तकरीबन 83 महिलाओं का ऑपरेशन किया गया था। इसमें से 14 महिलाओं की मौत हो गई थी। जांच के दौरान प्रथमदृष्टया ऑपरेशन थियेटर, उपकरण और औजार में संक्रमण पाया गया था। चकरभाठा पुलिस ने भादवि की धारा 304 के तहत जुर्म दर्ज डॉ. गुप्ता को गिरफ्तार कर न्यायालय के आदेश पर जेल भेज दिया। जेल में बंद डॉ. गुप्ता ने अपने वकील के जरिए जिला कोर्ट में जमानत के लिए आवेदन पेश किया था। शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री कातुलकर के कोर्ट में हुई। जिला एवं सत्र न्यायाधीश के निर्देश पर शुक्रवार को चकरभाठा पुलिस ने केस डायरी के अलावा लिफाफे में बंद ड्रग व बिसरा रिपोर्ट सौंप दी। डीजे की मौजूदगी में चकरभाठा पुलिस द्वारा लिफाफा बंद रिपोर्ट को जिला लोक अभियोजक ने खोला और दोनों रिपोर्ट का अध्ययन किया। बचाव पक्ष के वकील को भी रिपोर्ट का अध्ययन करने का अवसर दिया गया। दोनों रिपोर्ट के अलावा केस डायरी का अध्ययन करने के बाद जमानत के संबंध में कोर्ट के सामने बहस प्रारंभ हुई। बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि पुलिस ने जानबूझकर को डॉ. गुप्ता को फंसाया है। इस पूरे मामले में षड़यंत्र करना साफ झलक रहा है। डॉक्टर लोगों को जीवन देने का काम करते हैं। किसी का जीवन लेना उनके पेशे में शामिल नहीं है। इसके अलावा 50 हजार से अधिक ऑपरेशन करने के लिए राज्य शासन ने डॉ. गुप्ता को अवार्ड भी दिया है। जिला लोक अभियोजक धनसिंह मसीह ने डॉ. गुप्ता को जमानत देने का विरोध करते हुए कहा कि ड्रग व बिसरा रिपोर्ट से यह साफ हो गया है कि ऑपरेशन के बाद जिन महिलाओं की मौत हुई है, उसमें संक्रमण के अलावा नकली दवा प्रमुख कारण है। केंद्रीय परिवार कल्याण मंत्रालय की गाइड लाइन का हवाला देते हुए कहा कि ऑपरेशन में सावधानी बरतने के साथ ही जानमाल की सुरक्षा के मद्देनजर एक ऑपरेशन में 20-30 मिनट का समय दिया गया है। निर्देशों की एक तरह से धज्जियां उड़ा दी गई हैं। दोनों पक्षों को सुनने के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री कातुलकर ने डॉ. गुप्ता की जमानत आवेदन को नामंजूर कर दिया है।
किसने क्या कहा
1. डॉ. गुप्ता के वकील ने कहा कि डॉक्टर जीवन देने का काम करते हैं। किसी की जान लेना चिकित्सकीय पेशा का हिस्सा नहीं है। मेरे मुवक्किल को पुलिस ने एक षड़यंत्र के तहत फंसाया है। अवार्डेड होने के साथ ही केद्र सरकार के कार्यक्रमों को संचालित करने में बेहद गंभीर है। 50 हजार नसबंदी करने के लिए राज्य शासन ने पुरस्कृत भी किया है।
2. शासन के वकील ने कहा कि ड्रग व बिसरा रिपोर्ट से साफ है कि महिलाओं की मौत संक्रमण व नकली दवा से हुई है। केंद्रीय परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक ऑपरेशन के लिए कम से कम 20-30 मिनट का समय निर्धारित किया है। इतने कम समय में 83 ऑपरेशन किस आधार पर कर दिए गए।