
नईदुनिया बिलासपुर। गोंडपारा की निवासी 24 वर्षीय युवती पिछले एक साल से लगातार गंभीर रूप से बीमार थी। वह रोज रात को बुखार, कमजोरी और अत्यधिक पसीने आने से तड़प रही थी। सिम्स अस्पताल के डाक्टरों ने आधुनिक दूरबीन जांच के जरिए उसकी जान बचाकर उसे नया जीवनदान दिया है।
पीड़ित युवती कई निजी और जिला अस्पतालों के चक्कर काट चुकी थी, लेकिन कहीं भी उसकी बीमारी का सही कारण पकड़ में नहीं आ रहा था। लगातार इलाज के बाद भी उसकी सेहत लगातार बिगड़ती जा रही थी। सिम्स के डाक्टरों ने जब उसका एक्सरे और सीटी स्कैन कराया, तो फेफड़ों में निमोनिया जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दिए।
हैरानी की बात यह थी कि सामान्य बलगम जांच में रिपोर्ट बार-बार निगेटिव आ रही थी, जिससे असली बीमारी छिपी हुई थी। इसके बाद सिम्स के विशेषज्ञ डाक्टरों की टीम ने जोखिम उठाते हुए ब्रांकोस्कोपी (दूरबीन आधारित आधुनिक जांच) करने का निर्णय लिया। आधुनिक प्रक्रिया के माध्यम से फेफड़ों के भीतर गहराई से जांच की गई और वहां से नमूने लेकर सीबीनाट लैब भेजे गए। जांच रिपोर्ट आते ही डाक्टरों के होश उड़ गए, क्योंकि युवती फेफड़ों की गंभीर टीबी से पीड़ित थी।
बीमारी की सही पहचान होते ही डाक्टरों ने बिना वक्त गंवाए उसका इलाज शुरू किया। दवाइयों के असर से युवती की हालत में तेजी से सुधार हुआ और उसे अस्पताल से सकुशल छुट्टी दे दी गई। सफल इलाज के बाद परिजनों ने राहत की सांस ली है।
इन डाक्टरों की मुस्तैदी और टीम वर्क से बची युवती की जान
सिम्स के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डा. प्रतीक कुमार के कुशल निर्देशन में, डा. अनिल कुमार डनसेना सहायक प्राध्यापक ने, जटिल ब्रांकोस्कोपी जांच को सफलता पूर्वक अंजाम दिया। संवेदनशील प्रक्रिया के दौरान वरिष्ठ रेजिडेंट डा. आकांक्षा गुप्ता और उनकी पूरी टीम मुस्तैदी से डटी रही, जिससे मरीज को सही समय पर सटीक इलाज मिल सका।
लक्षणों को हल्के में न लें, समय पर जांच कराना बेहद जरूरी
चिकित्सा अधीक्षक डा. लखन सिंह ने आम जनता से अपील की है कि यदि किसी को लंबे समय तक बुखार, कमजोरी, वजन घटने या रात में अत्यधिक पसीना आने की शिकायत हो, तो उसे आम मौसमी बीमारी समझकर टालने की भूल न करें। यह टीबी के छिपे हुए लक्षण हो सकते हैं, जिसका सही समय पर इलाज ही बचाव है।
वर्जन
टीबी आज भी एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती है। कई बार प्रारंभिक जांचों में यह बीमारी पकड़ में नहीं आती। ऐसे पेचीदा मामलों में ब्रांकोस्कोपी और सीबीनाट जैसी, हमारी उन्नत तकनीकें रोग की सटीक पहचान करने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही हैं। समय पर सही निदान से ही मरीजों को गंभीर जटिलताओं से बचाया जा सकता है। डा. रमणेश मूर्ति, अधिष्ठाता सिम्स बिलासपुर