नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। धमतरी जिले के कुरुद स्थित श्री रामचंद्र जी मंदिर के प्रबंधन और संपत्तियों को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश दिया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने स्पष्ट किया कि मंदिर और उसकी संपत्तियों के कब्जे व प्रबंधन के संबंध में पक्षकार यथास्थिति बनाए रखेंगे। साथ ही मंदिर की संपत्तियों अथवा प्रबंधन में किसी तीसरे पक्ष का हित सृजित नहीं किया जा सकेगा।
2024 में हाई कोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी रोक
मामला सिविल अपील क्रमांक 6484/2024 से संबंधित है। सुप्रीम कोर्ट ने 13 मई 2024 को मामले में अनुमति देते हुए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के एकलपीठ के उस आदेश के संचालन पर रोक लगा दी थी, जिसमें दूसरी अपील स्वीकार करते हुए उत्तरदाताओं के पक्ष में मुकदमे की डिक्री पारित की गई थी।
इसके बाद मंदिर के प्रबंधन और संपत्ति को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई हुई।
एसडीओ ने मंदिर प्रबंधन से अलग होने कहा था
कोर्ट के समक्ष बताया गया कि 25 अप्रैल 2025 को कुरुद के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) ने संबंधित उत्तरदाताओं को मंदिर और उसकी संपत्तियों के प्रबंधन एवं कार्यों से अलग होने को कहा था। उन्हें मंदिर के मामलों अथवा संपत्तियों के संबंध में कोई कार्रवाई नहीं करने तथा उनके पास मौजूद दस्तावेज, चाबी, मूल्यवान वस्तुएं अथवा नकदी तहसीलदार एवं नगर पंचायत कुरुद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को सौंपने के लिए कहा गया था।
प्रशासन की ओर से जारी संचार में यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के 13 मई 2024 के अंतरिम आदेश के अनुपालन में बताया गया था।
मंदिर और संपत्ति के कब्जे पर यथास्थिति
इस प्रशासनिक संचार से नाराज उत्तरदाताओं ने सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम आवेदन दाखिल कर यथास्थिति बनाए रखने और 25 अप्रैल 2025 के संचार के प्रभाव पर रोक लगाने की मांग की थी।
दोनों पक्षों को सुनने और रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री देखने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 13 मई 2024 के अंतरिम आदेश के अतिरिक्त स्पष्ट किया कि मंदिर और उसकी संपत्तियों के कब्जे तथा प्रबंधन के संबंध में सभी पक्ष यथास्थिति बनाए रखेंगे।
तीसरे पक्ष का हित बनाने पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि उत्तरदाता मंदिर के प्रबंधन और उसकी संपत्तियों में किसी तीसरे पक्ष का हित न तो बनाएंगे और न ही कोई ऐसा कदम उठाएंगे जिससे वर्तमान स्थिति प्रभावित हो। मंदिर के खातों के साथ उनसे संबंधित सभी सहायक दस्तावेज सुरक्षित और व्यवस्थित रखने होंगे।
इन खातों और संबंधित दस्तावेजों की एक प्रति प्रत्येक तीन माह में कलेक्टर को देनी होगी। कोर्ट ने इन निर्देशों के साथ अंतरिम आवेदन का निपटारा कर दिया।
मुख्य अपील पर विवाद अभी बाकी
सुप्रीम कोर्ट का 4 अगस्त 2026 का आदेश मुख्य सिविल अपील के अंतिम गुण-दोष पर फैसला नहीं है। अदालत ने फिलहाल मंदिर के कब्जे और प्रबंधन की स्थिति को सुरक्षित रखने के लिए अंतरिम व्यवस्था तय की है। मुख्य अपील में मंदिर प्रबंधन और संपत्ति से जुड़े मूल विवाद पर अंतिम निर्णय होना बाकी है।
न्यायिकआदेश के 3 मुख्य पहलू:
संपत्ति की सुरक्षा व यथास्थिति: कानूनी लड़ाई चलने तक मंदिर की जमीन, चाबी और नकदी की वर्तमान स्थिति सुरक्षित रहेगी।
कलेक्टर की निगरानी अनिवार्य: हर 3 महीने में वित्तीय रिपोर्ट जमा होने से मंदिर के फंड के दुरुपयोग पर पूरी तरह अंकुश लगेगा।
प्रशासनिक हस्तक्षेप पर स्पष्टता: एसडीओ के एकतरफा आदेश के बाद उत्तरदाताओं को अंतरिम राहत मिली है, लेकिन अंतिम निर्णय मुख्य अपील पर निर्भर करेगा।