
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। झीरम घाटी नक्सली हमले की जांच के लिए गठित दूसरे न्यायिक जांच आयोग की कार्रवाई पर लगी रोक के मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट 21 दिसंबर 2026 को अंतिम सुनवाई करेगा। भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष और विधायक धरमलाल कौशिक ने दूसरे आयोग के गठन को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है। मई 2022 में हाई कोर्ट ने आयोग की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाई थी, जो अब तक प्रभावी है।
मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्र और न्यायमूर्ति संतोष शर्मा की पीठ में हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता की अनुपलब्धता के आधार पर सुनवाई टालने की मांग की गई। वहीं, मामले में हस्तक्षेप करने वाले पक्ष की ओर से अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने दूसरे आयोग के गठन को राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र का मामला बताते हुए याचिका खारिज करने और अंतरिम रोक समाप्त करने की मांग की।
झीरम घाटी में 25 मई 2013 को हुए नक्सली हमले की जांच के लिए पहले न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में आयोग गठित किया गया था। बाद में न्यायमूर्ति प्रशांत मिश्रा के आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनने के कारण उत्पन्न परिस्थिति में वर्ष 2021 में दो सेवानिवृत्त हाई कोर्ट न्यायाधीशों की अध्यक्षता में आयोग का पुनर्गठन किया गया। इसमें न्यायमूर्ति सतीश अग्निहोत्री और न्यायमूर्ति मिन्हाजुद्दीन शामिल थे।
पहले आयोग ने राज्यपाल के समक्ष अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी, लेकिन राज्य सरकार ने उसे स्वीकार नहीं किया। इसके बाद नए जांच बिंदुओं पर जांच के लिए आयोग का पुनर्गठन किया गया।
धरमलाल कौशिक ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि झीरम घाटी घटना की जांच के लिए पहले ही आयोग गठित किया गया था और वह अपनी जांच पूरी कर चुका है। ऐसे में उसी घटना की दोबारा जांच के लिए नया आयोग गठित करने की आवश्यकता नहीं है।
इसी याचिका पर मई 2022 में हाई कोर्ट ने नए आयोग की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। मामले में झीरम घटना से जुड़े एक कांग्रेस कार्यकर्ता की ओर से हस्तक्षेप याचिका भी दायर की गई है। अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने सुनवाई के दौरान कहा कि राज्य सरकार को आयोग में रिक्ति होने या नए जांच बिंदु सामने आने पर नया आयोग गठित करने का अधिकार है। उन्होंने दलील दी कि दूसरे आयोग को ऐसे बिंदुओं की जांच के लिए बनाया गया है, जो पहले आयोग के जांच दायरे में शामिल नहीं थे। इसलिए कौशिक की याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।
राज्य सरकार की ओर से मामले में आवश्यक निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगा गया। पीठ ने कहा कि प्रकरण में गंभीर कानूनी प्रश्न शामिल हैं, इसलिए इस पर विस्तार से सुनवाई आवश्यक है। कोर्ट ने हस्तक्षेप याचिका दायर करने वाले पक्ष को भी अपना पक्ष रखने की अनुमति देते हुए 21 दिसंबर 2026 को अंतिम सुनवाई के लिए तारीख तय की है। फिलहाल दूसरे जांच आयोग की कार्यवाही पर मई 2022 से लगी अंतरिम रोक जारी है। 21 दिसंबर को होने वाली सुनवाई में आयोग के गठन की वैधानिकता और रोक जारी रखने या समाप्त करने के मुद्दे पर पक्षकारों की दलीलें सुनी जाएंगी।