
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। तखतपुर नगर के वार्ड क्रमांक 7 गुप्तापारा में शनिवार की रात एक विवाह समारोह में रील लाइफ जैसा हाई-वोल्टेज ड्रामा सच में तब्दील हो गया। घर में शहनाइयों की गूंज थी, उत्सव का माहौल था और जयमाला की रस्म भी हंसी-खुशी संपन्न हो चुकी थी। लेकिन जैसे ही 'सिंदूरदान'' की सबसे पवित्र रस्म का वक्त आया, विवाह मंडप में अचानक सन्नाटा पसर गया।
घूंघट की ओट में बैठी दुल्हन ने अचानक दूल्हे का हाथ पकड़कर सिंदूर भरने से रोक दिया और शादी से साफ इंकार कर दिया। ऐन वक्त पर दुल्हन के इस साहसिक लेकिन चौंकाने वाले फैसले से विवाह स्थल पर हड़कंप मच गया। पूरी रात दोनों पक्षों के बीच मान-मनौव्वल और समझाइश का दौर चला, लेकिन भविष्य की रक्षा के लिए दुल्हन अपने फैसले पर अडिग रही।
आखिरकार रविवार सुबह दूल्हे के पिता को बिना दुल्हन के ही बारात लेकर बैरंग लौटना पड़ा। तखतपुर के गुप्तापारा निवासी सिमरन उर्फ माही का विवाह मुंगेली जिले के करही निवासी सुभाष सिंह पिता भागवत ठाकुर के साथ तय हुआ था। शनिवार शाम को मुंगेली से ठाकुर परिवार की बारात पूरे लाव-लश्कर के साथ तखतपुर पहुंची। वधु पक्ष ने बारातियों का जोरदार स्वागत-सत्कार किया। डीजे की धुन पर बाराती जमकर थिरके और पारंपरिक ''परघनी' की रस्म पूरी की गई। इसके बाद मेहमाननवाजी और सुरुचि भोज का दौर चला। देर रात विवाह मंडप सजकर तैयार हुआ। वर-वधु दोनों पक्षों के चुनिंदा परिजनों की मौजूदगी में पंडित मंत्रोच्चार कर पाणिग्रहण संस्कार की रस्में पूरी करा रहे थे।
सिंदूरदान के वक्त पलटी बाजी, दुल्हन ने रोक दिया दूल्हे का हाथ
शादी की लगभग सभी रस्में ठीक-ठाक पूरी हो चुकी थीं और चारो तरफ हंसी-ठिठोली का माहौल था। अब वह मुख्य विधिक और धार्मिक घड़ी आई जब दूल्हा सुभाष सिंह अपनी जगह से उठकर दुल्हन सिमरन की मांग में सिंदूर भरने के लिए आगे बढ़ा। इसी दौरान दुल्हन ने फुर्ती से अपना हाथ निकाला और दूल्हे की कलाई थाम ली। उसने सिंदूरदान की रस्म को बीच में ही रोकते हुए विवाह से स्पष्ट इंकार कर दिया। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम से मंडप में बैठे माता-पिता, पंडित और बाराती सन्न रह गए।
दुल्हन की हुंकार: अगर आज चुप रह जाती, तो पूरी जिंदगी नरक हो जाती
बदनामी और सामाजिक प्रतिष्ठा का हवाला देकर माता-पिता और रिश्तेदारों ने युवती को समझाने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन उसने परिजनों के सामने जो सच्चाई रखी, उसे सुनकर सबके होश उड़ गए।
झूठ की बुनियाद पर तय हुआ था रिश्ता: युवती ने बताया कि लड़के के बारे में शादी के पहले दावा किया गया था कि वह मेडिकल लाइन में काम करता है, जो सरासर झूठ निकला।
मंडप में ही दे दी धमकी: हद तो तब हो गई जब पाणिग्रहण संस्कार के दौरान ही दूल्हे का गुस्से वाली प्रवृत्ति सामने आई। वह मंडप में ही दबी जुबान में दुल्हन को "देख लेने और जीवन बर्बाद कर देने" की धमकी दे रहा था।
भविष्य बचाने उठाया कदम: दुल्हन ने दोटूक कहा, "जब वह मंडप में ही मेरे साथ ऐसा व्यवहार कर रहा है और धमकी दे रहा है, तो शादी के बाद मेरा क्या हश्र करता? अपनी जिंदगी तबाह करने से बेहतर था कि मैं यहीं पर आवाज उठाऊं।
रातभर चली मान-मनौव्वल की पंचायत, सुबह खाली हाथ लौटे बाराती
इस अप्रत्याशित मोड़ के बाद मैरिज हाल में रातभर दोनों पक्षों की बैठक चलती रही। परिजनों ने लड़की को समाज और लोक-लाज का वास्ता दिया, लेकिन सिमरन अपने आत्मसम्मान और भविष्य के फैसले पर टस से मस नहीं हुई। उसने साफ कह दिया कि वह किसी भी कीमत पर एक सनकी और धमकी देने वाले युवक के साथ सात फेरे नहीं लेगी। आखिरकार, सुबह होते-होते दूल्हे के पिता भागवत ठाकुर बिना दुल्हन के ही बारात लेकर वापस लौट गए। क्षेत्र में दुल्हन सिमरन के इस साहसिक और त्वरित फैसले की जमकर सराहना हो रही है।