
नईदुनिया प्रतिनिधि बिलासपुर। विकास खण्ड बिल्हा में युक्तियुक्तकरण और कड़े प्रशासनिक आदेशों के बाद भी शिक्षकों द्वारा स्कूलों को छोड़कर दफ्तरों में बाबूगिरी करने में लगे हुए थे। डीपीआई से आदेश जारी होने के बाद की गई जांच में अब तक ऐसे छह शिक्षक मिले हैं, जो मूल शालाओं के बजाय अन्य विभागों में अटैच होकर मलाई काट रहे थे।
विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय बिल्हा की जांच में इस खेल का खुलासा हुआ है। जांच में पाया गया कि छह शिक्षक लंबे समय से गैर-शैक्षणिक कार्यों में संलग्न थे, जिन्हें तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर दिया गया है। इनमें से दो शिक्षक बीईओ कार्यालय के ही साक्षर भारत अभियान विभाग में अटैच थे, जिन्हें हटाकर मूल शाला भेजा गया है। वहीं सबसे गंभीर मामला तहसील कार्यालय बिल्हा का सामने आया है, जहां चार शिक्षक नियम-कायदों को ताक पर रखकर आदेश के बाद भी धड़ल्ले से बाबूगिरी कर रहे थे।
शासकीय व प्रशासनिक आदेश की धज्जिया उडाते हुए यह चार शिक्षक युक्तीयुक्त करण का मजाक उडा रहे थे। बीईओ भूपेंद्र कौशिक ने जांच रिपोर्ट के आधार पर चारों शिक्षकों की सैलरी तत्काल प्रभाव से रोक दी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जब तक ये शिक्षक अपनी मूल संस्था में कार्यभार ग्रहण कर वीएसके ऐप पर आनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं कराएंगे, तब तक इनका वेतन जारी नहीं होगा। कार्रवाई से दफ्तरों में जमे रसूखदार शिक्षकों में हड़कंप मच गया है। सरकार द्वारा स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए चलाए जा रहे युक्तियुक्तकरण अभियान को ऐसे ही शिक्षक बाबू पलीता लगा रहे थे, जिन पर अब जाकर गाज गिरी है।
वर्जन
बिल्हा क्षेत्र में अटैच मिले सभी छह शिक्षकों का संलग्नीकरण तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है। तहसील दफ्तर में जमे चार शिक्षकों की सैलरी रोकने के निर्देश दिए गए हैं। भूपेंद्र कौशिक, विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी बिल्हा