
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। प्रेम प्रस्ताव ठुकराने पर मारपीट से आहत युवती की आत्महत्या के मामले में सत्र न्यायालय ने दीपक चौहान को दोषमुक्त कर दिया। अपर सत्र न्यायाधीश नीरू सिंह ने कहा कि मृत्युपूर्व कथन विश्वसनीय है, लेकिन धारा 306 के तहत दोषसिद्धि के लिए आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण के कानूनी तत्व साबित नहीं हुए।
घटना 10 जून 2017 की रात करीब नौ बजे सीपत थाना क्षेत्र के ग्राम कौड़िया की है। रिश्ते में भाई लगने वाले दीपक ने 17 वर्षीय अंजलि चौहान के घर पहुंचकर प्रेम प्रस्ताव रखा। अंजलि के गाली देने पर उसने बाल पकड़कर मारपीट की। इसके बाद किशोरी ने खुद पर मिट्टी का तेल छिड़ककर चिमनी की आग से खुद को जला लिया।
इलाज के दौरान 17 जून 2017 को सिम्स अस्पताल में उसकी मृत्यु हो गई। बचाव पक्ष ने कहा कि मृत्युपूर्व कथन दर्ज करते समय कार्यपालिक मजिस्ट्रेट एवं तहसीलदार श्वेता यादव ने मृतका की मानसिक स्थिति ठीक होने का चिकित्सकीय प्रमाणपत्र नहीं लिया था। अदालत ने यह दलील खारिज करते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट ने सुनिश्चित किया था कि वह होश में है और बयान देने में सक्षम थी।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला बना आधार
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के एम अर्जुनन बनाम राज्य और उदय सिंह व अन्य बनाम हरियाणा राज्य के फैसलों का उल्लेख किया। उसके अनुसार, प्रेम प्रस्ताव और मारपीट की घटना तो सामने आई, लेकिन आत्महत्या के लिए उकसाने का आशय साबित नहीं हुआ। अभियोजन आरोप संदेह से परे साबित नहीं कर सका। अदालत ने जमानत बंधपत्र फैसले की तारीख से छह महीने तक प्रभावी रखने का निर्देश दिया।
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