यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 01, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Shani Jayanti 2024: बिलासपुर न्यायधानी में शनिदेव का होगा तेलाभिषेक, भक्त करेंगे चालीसा का पाठ
शहर के राजकिशोर नगर स्थित शनि मंदिर, चिल्हाटी शनि धाम सहित अन्य सभी शनि मंदिरों में भीड़ जुटेगी। छह जून को वट सावित्री का व्रत भी रखा जाएगा। सुहागिन म...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 01 Jun 2024 08:35:13 AM (IST)Updated Date: Sat, 01 Jun 2024 08:40:43 AM (IST)
चिल्हाटी स्थित शनिधामHighLights
- शनि जयंती पर छह जून को चिल्हाटी पहुंचेंगे भक्तशनि जयंती छह जून को मनाई जाएगी।
- सुहागिन व्रत में सावित्री सत्यवान की कथा का श्रवण करती हैं।
- सनातन धर्म में वट सावित्री व्रत का बड़ा महत्व है। छह जून को वट सावित्री का व्रत भी रखा जाएगा।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। न्यायधानी में इसे लेकर भव्य तैयारी चल रही है। चिल्हाटी स्थित शनिधाम से लेकर राजकिशोर नगर, रेलवे काली मंदिर और रतनपुर के भैरव बाबा मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना होगी। चिल्हाटी में तेलाभिषेक होगा। भक्त दिनभर शनि चालीसा का पाठ करेंगे। चिल्हाटी स्थित शनिधाम के पुजारी विजय कोठारी के मुताबिक साढ़े साती या शनि का दहिया चल रहा है वह शनि स्त्रोत का पाठ करेंगे। इस दिन भक्तों का तांता लगा रहेगा। शनि चालीसा का पाठ करेंगे।
शनि मंदिर जाकर काले माह साबुत, तेल, काला कपड़ा, काला फल, सूखा नारियल शनि महाराज को अर्पित और शनि के बीच मंत्र का जाप करते नजर आएंगे। न्यायधानी के अलग-अलग मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होगी। चिल्हाटी स्थित शनिधाम में भक्तों में बड़ी संख्या में भीड़ उमड़ेगी। भक्तों को यहां प्रसाद का वितरण किया जाएगा। शनि मंदिर में रात से ही भक्तों की कतार लगी रहेगी। पूरे दिन यहां आस्थावान पहुंचेंगे।
सरसों के तेल का दीपक
मान्यता है कि इस दिन पीपल के पेड़ में जल अर्पित करने के साथ ही सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए। शनि से जुड़ी चीजों का दान करना चाहिए। शहर के राजकिशोर नगर स्थित शनि मंदिर, चिल्हाटी शनि धाम सहित अन्य सभी शनि मंदिरों में भीड़ जुटेगी।
वट सावित्री का व्रत भी इसी दिन
सनातन धर्म में वट सावित्री व्रत का बड़ा महत्व है। छह जून को वट सावित्री का व्रत भी रखा जाएगा। सुहागिन महिलाएं इस व्रत को पूरे विधि-विधान से करती हैं, उन्हें अखंड सौभाग्यवती होने का का वरदान प्राप्त होता है। यह व्रत महिलाएं अपनी पति की लंबी आयु के लिए रखती हैं। इसके अलावा, कुछ जगहों पर कुंवारी कन्याएं भी मनचाहा वर पाने के लिए इस व्रत का पालन करती हैं। बता दें कि इसी वट वृक्ष के नीचे सावित्री ने अपने पतिव्रत से मूत्य पति को जीवित किया था। तब से यह व्रत वट सावित्री के नाम से जाना जाता है। कुछ महिलाएं अमावस्या को ही व्रत रखती हैं। इस व्रत में सावित्री सत्यवान की कथा का श्रवण करती हैं। पूजा करते समय स्त्रियां वट वृक्ष को जल से सींचती हैं। परिक्रमा करती हैं।