
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर : विश्वास की बुनियाद पर किराए पर दी गई करोड़ों की संपत्ति को हड़पने की नीयत से रचे गए फर्जीवाड़े का, न्यायालय भाड़ा नियंत्रण प्राधिकारी ने पर्दाफाश कर दिया है। मंगला स्थित बहुमंजिला होटल हरी चटनी पर कब्जा जमाने की फिराक में बैठे किराएदार शक्ति सिंह ठाकुर के झूठे दावों को अदालत ने सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने साफ किया कि छल-कपट से किसी की मिल्कियत नहीं छीनी जा सकती।
मंगला-उसलापुर मुख्य मार्ग पर स्थित 2554 वर्गफुट में तने जी 3 होटल को भूस्वामी मोतीलाल दयालानी ने अपने बेटे के भविष्य के लिए तैयार कराया था। अनुभव न होने का फायदा उठाकर शक्ति सिंह ने दिसंबर 2024 में 3 लाख रुपये मासिक दर पर 11 माह के लिए इसे किराए पर लिया।
शुरुआत में एक महीने का किराया देने के बाद किराएदार के मन में खोट आ गई। उसने किराया देना बंद कर दिया और 99 लाख में पूरी इमारत खरीदने का झूठा ताना-बाना बुनकर दीवानी अदालत में मुकदमा ठोक दिया। किराएदार के इस दुस्साहस के खिलाफ भूस्वामी ने न्यायालय भाड़ा नियंत्रण प्राधिकारी की शरण ली।
सुनवाई के दौरान किराएदार के झूठ का महल तब ढह गया जब उसके अपने ही दस्तावेज उसके खिलाफ खड़े हो गए। उसने होटल के जीएसटी पंजीयन के लिए इसी किराएदारी अनुबंध का इस्तेमाल किया था। अदालत ने उसे डिफाल्टर करार देते हुए एक माह में परिसर खाली करने और अगस्त 2025 से पूरा बकाया किराया चुकाने का आदेश दिया।
अदालत को गुमराह करने के लिए किराएदार ने अनुबंध को फर्जी बताते हुए पहली बार देखने का दावा किया। लेकिन भूस्वामी द्वारा पेश किए गए सरकारी दस्तावेजों ने उसकी पोल खोल दी। होटल का जीएसटी नंबर हासिल करने के लिए उसने खुद वाणिज्यिक कर विभाग में यही अनुबंध पत्र जमा किया था। अदालत ने कहा कि जो दस्तावेज बाहर लाभ दे रहा है, उसे अदालत में नकारा नहीं जा सकता।
किराएदार ने अदालत में दावा किया कि उसने 99 लाख में होटल खरीदने का सौदा किया था और 70 लाख रुपये नकद व चेक से दे दिए हैं। हालांकि, जब अदालत ने स्वामित्व के दस्तावेज मांगे, तो उसके पास कोई पंजीकृत विक्रय पत्र या राजस्व रिकार्ड नहीं मिला। बिना किसी पुख्ता दस्तावेज के मौखिक दावों के सहारे कब्जा जमाने की उसकी पूरी योजना विफल हो गई।